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सिवान की गलियों से न्याय के आसन तक। प्रथम प्रयास में ही जज बने रूपेश ने किया माता पिता व गाँव का नाम रौशन

गाँव की गलियों में ककहरा सीखकर गाँव के सरकारी स्कूल में शिक्षा के तप को आत्मसात करने वाले रूपेश ने सफलता के सोपान पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रथम प्रयास में ही बिहार न्यायिक सेवा में चयनित होकर सिवान जिले की जरखेज माटी की महक चहुओर फैलाया

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पटना Live डेस्क। देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद के गृह जिले की जरखेज माटी के लाल रूपेश कुमार ने सफलता के सोपान पर न केवल सशक्तक उपस्थिति दर्ज कराई है बल्कि सिवान जिले के गौरवशाली परंपरा को पुनः स्थापित करते हुए नया आयाम दिया है। दरअसल, किसान पिता के बेटे रूपेश ने अपने गाँव के सीमित संसाधनों में टिमटिमाती शिक्षा की लौ को अपने कठिन परिश्रम व कुछ कर गुजरने की अदम्य लालसा के जरिए बिहार न्यायिक सेवा में अपने प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल करते हुए बतौर सिविल जज का ओहदा पाकर मातापिता व गाँव जवार का नाम रौशन किया है। रूपेश की इस सफलता ने पुनः एक बार स्पष्ट कर दिया है अगर सच्ची लगन संग पूर्णतया समर्पित होकर ईमानदारी से प्रयास किए जाए तो सीमित संसाधनों व सुविधाविहीनता जैसे तर्क बेमानी साबित होते है।

गाँव की गलियों से इंसाफ के आँगन तक

सिवान ज़िलें के बड़हरिया प्रखंड के पलटूहाता गांव निवासी किसान पिता धनंजय सिंह एवं माता विमल देवी के पुत्र रूपेश कुमार अपनी दो बड़ी बहनों के बाद छोटे होने के कारण इनका बचपन बहुत ही ज़्यादा लाड प्यार व दुलार के साए मे बीता। मां की ममता और बहनों के दुलार के साए में रूपेश कुमार ने अपने गांव पलटूहाता की गलियों में ककहरा सीखा। फिर गांव के ही सरकारी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पाने की शुरुआत करते हुए पड़ोसी ज़िलें गोपालगंज के माधोपुर स्थित डी पी उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की जबकिं प्रमंडलीय मुख्यालय सारण के राम जयपाल महाविद्यालय से विज्ञान संकाय में इंटर के बाद राजेंद्र महाविद्यालय छपरा से स्नातक की उपाधि प्राप्त किया। अपने अबतक के सफर में बेहद संवेदनशील रुपेश तदुपरांत पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से विधि स्नातक एवं विधि स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूर्ण किया। अपने धुन के पक्के रूपेश ने तदुपरांत वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौरान वर्ष 2021 में आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यूजीसी नेट पास करने के साथ ही बिहार न्यायिक सेवा 2020 में शामिल हुए और नतीजा सामने है। रूपेश अब न्याय के आसन पर विराजमान होकर आम आदमी को इंसाफ देंगे।

पूत के पाँव – रूपेश कुमार

अपनी धुन के पक्के रूपेश ने सफलता की इबारत लिख दी है। सिवान की माटी के गौरवगान की परंपरा को नया आयाम दिया है लेकिन यह सफ़र कतई साधारण तो नही रहा। कहते है पूत के पाव पालने में ही दिख जाते है। तभी तो लाड़ दुलारे के बीच भी पढ़ाई के प्रति अपने समर्पण की बिना पर रूपेश ने मैट्रिक की परीक्षा से लेकर विधि स्नातकोत्तर तक की अपनी शिक्षाक्रम में अपनी मेधा का बखूबी परिचय देते हुए अबतक अपनी सभी शैक्षणिक परीक्षाए प्रथमश्रेणी से पास करते हुए बिहार न्यायिक सेवा में भी प्रथम प्रयास में ही सफलता अर्जित कर ली है।

सफलता का श्रेय महादेव व माता पिता को

स्वयं की सफलता के ओज से गर्वित रूपेश कहते है कि माता-पिता,अभिभावकगण, गुरुजनों एवं दोस्तों के साथ, मार्गदर्शन और सहयोग के कारण ही पहले ही प्रयास में तमाम तरह की परीक्षाओं में सफल रहा हूँ। इन सफलताओं के पीछे कहीं न कहीं बाबा विश्वनाथ की कृपा है। रूपेश स्पष्ट कहते है कि खाली समय बाहर निकल कर भ्रमण करने से अच्छा महादेव के सानिध्य में रहू। अपने शिक्षा अर्जन के दौरान साधनहीनता और संघर्ष तक़लिफों को याद कर रूपेश कहते है अपने संघर्ष को ही अपनी शक्ति में तब्दील कर 12-16 घंटों तक अध्ययन कर मैंने यह सफलता अर्जित किया है।

बधाई संदेशों को ताता

संघर्षो की कोख़ से एक और माटी के लाल रूपेश कुमार की सफलता का शोर चहुओर है। रूपेश के चयनित होने पर मार्गदर्शक के रूप में सहयोग करने वाले गया ज़िलें में पदस्थापित न्यायिक दंडाधिकारी कमलेश कुमार एवं लखीसराय में पदस्थापित न्यायिक दंडाधिकारी पप्पू कुमार पंड़ित, राजेन्द्र महाविद्यालय छपरा के प्राचार्य प्रो सुशील कुमार श्रीवास्तव, रामजयपाल महाविद्यालय छपरा के प्राचार्य डॉ इरफ़ान अली, राजकुमार राय, रिबेल के निदेशक विक्की आनंद, वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र कुमार रस्तोगी, सुदीश कुमार चुनचुन, पीयूष पराशर, सुशांत कुमार रोहित, साकेत श्रीवास्तव, निखिल शाही, विकाश समर आनंद सहित कई अन्य मार्गदर्शक, अभिभावक एवं दोस्तों ने बधाई दिया है।

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