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BiG Breaking – सत्येंद्र कुमार दुबे अवॉर्ड से पटना DM (IAS) कुमार रवि को नवाजेगा IIT कानपुर

आईआईटी कानपुर हर साल देश के किसी न किसी ईमानदार अधिकारी को सतेंद्र कुमार दुबे मेमोरियल अवॉर्ड प्रदान करता है। वहीं इस बार आईआईटी कानपुर ने कुमार रवि को इस अवार्ड के लिए चुना है। कुमार रवि आईआईटी कानपुर के छात्र रह चुके हैं।

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  • सत्येंद्र कुमार दुबे अवार्ड से सम्मानित होंगे पटना के डीएम कुमार रवि
  • अपनी ईमानदार और तेज तर्रार छवि के लिए जाने जाते हैं कुमार रवि
  • 2005 बैच के आईएएस कुमार रवि बेहद सरल स्वभाव और कर्मठ अधिकारी है।
  • मल्टीनेशनल से upsc टॉपर तक 

पटना Live डेस्क। देश के प्रतिष्ठित तकीनीकी संस्थानों में शुमार आईआईटी कानपुर हर साल देश के किसी न किसी ईमानदार अधिकारी को सतेंद्र कुमार दुबे मेमोरियल अवॉर्ड प्रदान करता है। इंजीनियर सत्येंद्र कुमार दुबे की उनकी ईमानदारी के चलते हत्या की गई थी। सत्येंद्र आईआईटी कानपुर के ही छात्र थे। वही इस बार आईआईटी कानपुर ने कुमार रवि को इस अवॉर्ड के लिए चुना है। कुमार रवि भी आईआईटी कानपुर के छात्र रह चुके हैं।

                    कुमार रवि अपनी ईमानदार और तेज तर्रार छवि से पूरे बिहार की जनता में लोकप्रिय आईएएस अधिकारी हैं। पटना के जिलाधिकारी पद पर तैनात कुमार रवि को आईआईटी कानपुर साल 2020 के सत्येंद्र कुमार दुबे मेमोरियल अवॉर्ड से सम्मानित करेगी।

पटना के 85वें डीएम है कुमार रवि

एक जनवरी 2018 को पटना के जिलाधिकारी के तौर पर कमान संभालने वाले 2005 बैच के आईएएस अधिकारी है। उल्लेखनीय है कि बहुमुखीं प्रतिभा के धनी कुमार रवि ने देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित यूपीएससी की परीक्षा में कुमार रवि ने 10वां स्थान प्राप्त किया था।

बेहद सरल स्वभाव और कर्तव्यपरायण कुमार रवि पटना जिलाधिकारी बनने से अपनी प्रशासनिक क्षमताओं का अहसास पहली बार मई 2009 में सुपौल के जिलाधिकारी बनते ही कराया। जहाँ उन्होंने बाल विकास परियोजना में धांधली करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की। बाढ़ नियंत्रण और एन एच 57 को फोर-लेन के काम में तेज़ी लाने के साथ-साथ ही उन्होंने जिले में विधानसभा,पंचायत और पैक्स का चुनाव कराया। साथ ही दो सौ से ज़्यादा स्कूलों के लिए जमीन मुहैया का काम सफलता पूर्वक करवाया।

 वेस्ट इलेक्ट्रोरल अवॉर्ड सम्मान 

जनवरी 2013 में कुमार रवि को दरभंगा का डीएम  बनाया गया। जहाँ उन्होंने आम लोगों को सरकारी परियोजनाओं से जोड़ने और ज्यादा से ज्यादा लोगो को लाभान्वित करवाने पर जोड़ दिया। कुमार रवि का बाढ़ नियंत्रण और सांप्रदायिक सौहार्द को जिला में कायम रखने का प्रयास बेहद सराहनीय रहा। दरभंगा में उन्होंने इंडोर स्टेडियम के लंबित पड़े कार्य को पूरा करवाया। कुमार रवि को दरभंगा में निष्पक्ष लोकसभा और विधानसभा चुनाव करवाने के लिए ज़िला निर्वाचन पदाधिकारी, दरभंगा के रुप में वेस्ट इलेक्ट्रोरल अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया।

गया बढ़ाया गौरव – टूरिज्म को दिया बढ़ावा

कुमार रवि को दिसंबर 2015 में गया का जिलाधिकारी बनाया गया। गया में उन्होंने अपने दो साल के कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार और स्वच्छता को तरजीह दी। पर्यटन स्थल होने की वजह से उन्होंने टूरिज्म के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया। इनके नेतृत्व में जिला प्रसाशन ने 2016 -17 में पितृपक्ष मेला, 2017 में दलाई लामा की अगुवाई में होने वाली काल चक्र पूजा को बेहद सफलतापूर्वक सम्पन्न करवाया।

कर्मठता की कहानियां-जनसुलभता की चर्चा

बतौर डीएम गया, दरभंगा और सुपौल आदि जिलों में जनमानस के लिए उपलब्धता, सहकर्मियों के साथ सहयोगपूर्ण रवैया और जनप्रतिनिधियों से बेहतर तालमेल के साथ जिला के विकास के लिए इनकी चर्चा आज भी की जाती है।

बिहार शरीफ की गलियों से बुलंदी का सफर

कुमार रवि का परिवार मूल रूप से नालंदा जिला के चुलिहारी गांव के रहने वाले हैं।एक सामान्य परिवार में जन्मे कुमार रवि के पिता बर्तन के व्यवसायी हैं और माता गृहणी थीं। वे पांच भाई बहनों में सबसे छोटे हैं।

नेतरहाट से आईआईटी कानपुर तक

                    कहते है “होनहार बिरवान के होत है चिकने पात” इस मुहावरे को चरितार्थ करने वाले कुमार रवि बाली उम्र से ही पढ़ने लिखने में काफी अच्छे छात्र रहे हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई बिहार शरीफ के एक स्कूल में हुई। छठी क्लास में उन्होंने उस दौर में संयुक्त बिहार के बेहद प्रतिष्ठित नेतरहाट स्कूल में प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त कर नामांकन लिया। उन्होंने 10वीं तक नेतरहाट में पढ़ाई की। इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने पटना साइंस कालेज पूरी की तदुपरांत आईटीआई एंट्रेन्स सफलता पाई और 1997-2001 बैच में आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर कॉरपोरेट दुनिया मे कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए कदम रखा।

                    लेकिन जब आमआदमी के संघर्ष और सरकारी तंत्र की अकर्मण्यता देखी तो एक इंजीनियर ने तय की इस सिस्टम को सुधार की आवश्यकता है। सुधार तभी होगा जब सिस्टम की कमान हाथ मे होगी और कमांड देने वाले बटन अपने हाथों में होंगे। फिर क्या था जिद्द और जुनून बनाया मिशन आईएएस शुरू कर दिया।

मल्टीनेशनल से नेशनल टॉपर तक 

2002 में मल्टीनेशनल की मोटी पगार और सुविधायुक्त नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में सफलता खातिर निश्चय किया | यूपीएससी की परीक्षा में पहली बार 2003 में उन्हें इंडियन रेवन्यू सर्विस मिला। लेकिन ये महज एक पड़ाव मात्र था  निशाने पर मछली की आँख थी। दूसरी बारी कुमार रवि ने यूपीएससी की परीक्षा में बड़ी कामयाबी हासिल के करते हुए पूरे देश में 10वां स्थान प्राप्त किया । फिर गृह राज्य बिहार कैडर आवंटित किया गया। 

कुमार रवि को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए भारत सरकार, बिहार सरकार और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा अनेक अवॉर्ड्स और सम्मान प्राप्त हैं।  जिनमें 2019 में वूमन एंड चाइल्ड डेवल्पमेंट मिनिस्ट्री की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर नैशनल न्यूट्रिशन मिशन अवॉर्ड, 2018 में राज्यों में सबसे बेहतर राज्य के डीएम का अवॉर्ड , लोकसभा चुनाव 2019 में बेस्ट इलेक्ट्रोरल अवॉर्ड आदि प्रमुख हैं।

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