Super Exclusive – मोदी सरकार ने मर्डर के नामजद अभियुक्त बिहार कैडर के 1985 बैच के IPS अधिकारी को बनाया SSB महानिदेशक

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पटना Live डेस्क।बिहार में सुशासन है यानी कानून का राज़ है। ये दावा हमारा नही बल्कि सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का है। तभी तो सुशासन बाबू के नाम से ख्यातिनाम भी है। बकौल सीएम के न उनकी सरकार किसी को फ़साति है न बचाती है कानून अपना काम करता है। लेकिन ज़मीनी हकीक़त इसके विपरीत है इसका दावा हमारी खबर करती है। दरअसल, सूबे के एक वरियतम एवं बेहद चर्चित आईपीएस अधिकारी जो वर्त्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर है। जो महज कुछ घंटे पहले एसएसबी के महानिदेशक के तौर पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा नियुक्त किये गए है। बिहार कैडर के 1985 बैच का यह आईपीएस अधिकारी हत्या जैसे जघन्य तथा संगीन मामले में नामज़द अभियुक्त होने के बावजूद न केवल समय समय पर राज्य सरकार द्वारा प्रमोट किया जाता रह। जिसका फलाफल ये हुआ है कि ज़नाब बिहार पुलिस के मुखिया यानी DGP की रेस में भी शामिल हो गए। नीतीश सरकार द्वारा UPSC को सूबे के अगले डीजीपी ख़ातिर वरीयता के क्रमानुसार इनके नाम का भी सुझाव भेजा गया है। हत्याकांड में नामित होने पर भी राज्य सरकार द्वारा आईपीएस महोदय को न केवल प्रोन्नती मिलती रही बल्कि मामले को दबाए रखने की पुरजोर कोशिश करने की भी आज़ादी दी गई। हालात किस कदर फेवरेवल बनाये गए इस बात की ताकीद इस बात से हो जाती है कि IPS को नामज़द अभियुक्त बनाने खातिर मकतूल के परिजनों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। लेकिन हद तो तब हो गई जब CJM के आदेश को भी पटना पुलिस ने ताखे पर रख दिया तो पीड़ित परिवार हाइकोर्ट जा पहुचा तब जाकर FIR दर्ज हो पाया।

                      आप सोच रहें होंगे ये बिहार के किसी दूर दराज जिले में हुआ होगा ? तो यहाँ आप बिलकुल गलत है यह पूरी साज़िश बिल्कुल सुशासन सरकार के नाक के नीचे रची गई और रची जा रही है। अब तक आप ने अंदाज़ा लगा लिया होगा या करीब करीब जान लिया होगा कि हम किस आईपीएस की बात कर रहे है। पहले हम आप को बताते है आखिर  किसके कत्ल में IPS नामज़द अभियुक्त। यह कत्ल कब ,कहा और कैसे हुआ आइए जानते है।

बेउर जेल में संदिग्ध मौत और जेल का वक्तव्य

बिहार के बेगुसराय जिले के बेहद चर्चित मंझौल एनकाउंटर मामले में रिटायर्ड डीएसपी महेश्वर महतो वर्ष 2014 से बेउर जेल के निगरानी वार्ड में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे। विशेष कोर्ट में उनके मामले का ट्रायल चल रहा था। महेश्वर महतो पर हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामले चल रहे थे। इसी दौरान 15 फरवरी 2016 दिन सोमवार को करीब पौने तीन बजे वह वार्ड में थे।अचानक उन्हें मैसिव हार्ट अटैक हुआ। 66 वर्षीय महतो को कारा अस्पताल लाया गया, जहां डॉ. राजाराम ने कार्डिक मसाज किया, लेकिन उनकी हालत बिगड़ने लगी। कारा प्रशासन ने उन्हें इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में भर्ती कराया, लेकिन उनकी मौत हो गई। महतो दरभंगा के कबड़ा के रहने वाले थे। बहरहाल उनकी मौत की सूचना बेउर जेल प्रशासन ने उनके पैतृक गांव में परिजनों को फोन पर बताई और लिखित में भी इस तरह लिखा हुआ भेजा। लेकिन, सांच को आंच नही की तर्ज पर इस तथाकथित सच को भी हम प्रमाण सहित आपके सामने रखने वाले है, जो झूठ को बेनकाब करेगा।

आइए, अब इस काण्ड से आपको तारीख़-ब-तारीख़
रूबरू कराते है साथ ही इस पूरे प्रकरण में कुछ चीजें महत्वपूर्ण है जिनका उल्लेख अनिवार्य है।

1- बेउर जेल पटना में 15.02.2016 को घटना 09.06.2016 को कम्प्लेन केस 1852(c) / 2016 CJM PATNA के यहां फ़ाइल होती है।                     

2. 1.07.2016 को CJM PATNA का आदेश होता है कि बेउर थाना इस मामले में CRPC की धारा 156(3) के तहत जांच कर के केस दर्ज करें।

2. CJM PATNA के आदेश के तीन माह बाद भी बेउर थाना केस दर्ज नही करती है और पीड़ित पक्ष पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनिल रिट फ़ाइल करता है 21.10 .2016 को।

3. कोर्ट जब नोटिस करता है कोर्ट जब नोटिस करता है और सरकार से रिपोर्ट आती है 11.05.2018 को कि sp पटना और बेउर थानाध्यक्ष कोई जवाब नही दे रहे है । जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद का आदेश आता है कि अगर अगले डेट पर रिपोर्ट नही आती है तो पटना sp और बेउर थानाध्यक्ष को व्यक्तिगत पेशी करवा देंगे । केस में 7 बार डेट पड़ता है किंतु पटना पुलिस की तरफ से कोई संतोषप्रद जवाब नही आता है। तदुपरांत कोर्ट का रुख जब सख्त होता है तब जाकर घटना के लगभग ढाई साल के बाद 18.08.2018 को अदालत को सरकारी वकील अवगत कराते है कि इस मामले में एक केस दर्ज कर लिया गया है।                            

4. मामले में IPS अधिकारी समेत अन्य को नामज़द किया गया है, लेकिन अभी तक इस मामले में किसी अभियुक्त ने जमानत के लिए किसी भी कोर्ट में प्रयास नही किया या फिर जरूरत नही समझी? वही दूसरी तरफ बेउर थाना पुलिस ने भी किसी तरह की कोई जांच या पूछताछ या गिरफ्तारी के प्रयास की जरूरत नही समझी है। जबकि आमतौर पर पुलिस अमूमन अबतक कुर्की जब्ती तक पहुंच जाती है।

5. गृह विभाग बिहार या गृह विभाग नई दिल्ली ने इस मामले में भी कोई करवाई नही की उल्टा IPS महोदय को प्रमोशन मिल जाना भी आश्चर्यजनक है।

6. ACJM-8 की अदालत में चार्जशीट या फाइनल फॉर्म के इन्तेजार में मामला अभी भी लंबित है।

7. सबसे आश्चर्यजनक और हास्यास्पद तथ्य यह है कि केस में सुपरविजन की जिम्मेवारी जिनपर है वह अभियुक्त के साथ संयुक्त बिहार के धनबाद में कार्यरत रहा है साथ ही पीड़ित पक्ष के अनुसार रिश्तेदार है। इस तथ्य के अवलोके में पीड़ित पक्ष बार बार उन्हें बदलने की गुहार लगा रहा है मगर सिस्टम का तो अपना ही स्वरूप है वहां भला कहाँ किसी पीड़ित के साथ दिखता है।

अभी तो महज कुछ सवाल उठाये गए है ….

इस साज़िश के हर पहलू को परत दर परत सरकारी कागजो, एफिडेवीटों, तथ्यों और बयानों के जरिए खोलने की हमारी मुहिम जारी है … ताकि खाकी का ख़ौफ़नाक चेहरा भी आवाम को दिख्याएँगे और कुछ ऑडियो भी सुनाएंगे ताकि साज़िश के रचने वाले चेहरों से नकाब उतर जाय……

खुलासा जारी है…. To BE Continued

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