बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

Patna News-16 साल से फरार 17 कांडों में नाम 50 हजार का ईनाम नागपुर के पौनापुरी का मकान कैसे पहुची STF

पटना में खौफ़ का दूसरा नाम रवि गोप जरायम की दुनिया में भी एक डरावना नाम है जिसके एक इशारे पर राजधानी में कही भी कभी भी गोलियों की तड़तड़ाहट और बमों के धमाके सुनाई दे जाते। दर्ज़न भर हत्याकांडों व हत्या के प्रयास,रंगदारी व लूट में नामित वर्ष 2006 से फरार था रवि यादव उर्फ रवि गोप,रंगदारी और अवैध ढंग से ज़मीन कब्जा कर बनाई अकूत सम्पति,बिहार एसटीएफ ने नागपुर की तीसरी यात्रा में बुधवार को धरदबोचा और कदमकुआं थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया

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पटना Live डेस्क। पिछले दो दशक से राजधानी पटना में आतंक का पर्याय बना रहा रवि गोप उर्फ गोपजी उर्फ लंबू अब पटना पुलिस की गिरफ्त में है। जरायम की दुनिया मे शिरकत करने के बाद यह पहली बार और आखिरी बार रवि गोप वर्ष 2005 में पकड़ा गया था। फ़िर वर्ष 2006 में बेउर जेल से छूटा था। तभी से कई मामलों में पुलिस को उसकी शिद्दत से तलाश थी। अब जाकर 16 साल बाद 50 हजार रुपये का ईनामी मोस्ट वांटेड अपराधी रवि गोप को बीते बुधवार को ही एसटीएफ ने महाराष्ट्र के नागपुर शहर के सोनेगांव के पौनापुरी इलाके के एक मकान से गिरफ्तार कर लिया। इस पर पटना में लूट, हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी के 17 से अधिक मामले दर्ज हैं। नागपुर से वाया रोड गुरुवार की रात एसटीएफ उसे लेकर पटना पहुंची। पूछताछ के बाद रवि यादव को कदमकुआं थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया। 9 जून वर्ष 2014 को कदमकुआं थाना इलाके के दरियापुर में एक डेयरी कंपनी के 26 लाख रुपये लूट कर भागने और बमबारी से जुड़े कांड संख्या 259/14 में रवि नामजद आरोपित था। इसी मामले में पुलिस द्वारा जेल भेजा जाएगा।

                  बीते 16 सालो तक पटना पुलिस के लिए छलावा रहा यह दुःसाहसी गैंगेस्टर बिहार से दूर रहा पर इसके गैंग में शामिल दुर्दान्त शूटरों और गुर्गों ने शहर में कोहराम मचाए रखा। इस दुर्दांत अपराधी की गिरफ्तारी के लिये पटना में अपनी तैनाती के दौरान तमाम कवायदों के जरिए कई आईपीएस अधिकारियों ने एड़ी-चोटी एक कर दिया पर यह उनके हत्थे नही चढ़ा।लेकिन हर बार कई बार बेहद शातिर रवि गोप राजधानी पटना में किसी बड़ी घटना को अंजाम देकर आसानी से निकल जाता था।

इधर, पूरी तरह बेख़ौफ़ बेधड़क होकर नाला रोड व दवामंडी गोविन्द मित्रा रोड से वाया अशोक राज पथ से पटनासिटी तक के बड़े छोटे व्यवसायियों से रंगदारी और पटना के अमूमन सभी इलाको के ज़मीन कारोबारियों से हिस्सेदारी वसूलते रहे। वर्ष 2006 से पटना पुलिस की जद से फरार रवि यादव उर्फ रवि गोप ने इस दौरान रंगदारी और अवैध ढंग से ज़मीन कब्जा कर अकूत सम्पति बनाई है।

 

जरायम की दुनिया खातिर भी डरावना नाम

सरगना रवि गोप भले ही राजधानी से कथित तौर पर सोलह साल तक दूर रहा करता पर इसने अपने विश्वस्त गुर्गो का ऐसा जाल तैयार कर रखा था कि शहर की हर खबर मिनट भर में उसके पास पहुच जाया करती। दूसरी तरफ बेहद दुःसाहसी शूटरों की फौज अपने आका के इशारे पर बेहिचक कही भी कभी भी गोलियों की बौछार कर टारगेट को हीट कर देते और फिर बमबाजी कर शहर की भीड़ में खो जाते। साथ ही साथ फरारी के दौरान सरगना के इशारे पर शूटरों द्वारा दुश्मनों को निर्दयता और निर्ममता से दिनदहाड़े मौत के घाट उतारा जाता रहा। नतीजतन कारोबारी तो खौफ़ में रहते ही अपने दुश्मनों को हर हाल में बेहद निर्मम ढंग से गोलियों की अन्धाधुन्ध बौछार और फिर बम मार कर चीथड़े उड़वाने वाले रवि गोप की जरायम की दुनिया में बादशाहत तो कायम हुई ही साथ ही इसका नाम अपराधियों के बीच भी खौफ़ की अलामत बन गया यानी डरावना नाम बन गया।

शूटरों श्रवण व गुड्डू मुनीम से करायी कई हत्याएं

राजधानी पटना छोड़ने के बाद रवि ने अपने प्रमुख शूटरों श्रवण कहार (2016 में हुआ गिरफ्तार) और गुड्डू मुनीम (दिल्ली में मार दिया गया) के ज़रिए अपने विरोधियों की एक-एक कर हत्या करवाई। दरअसल रवि ने अपनी बादशाहत खातिर हर उस प्रतिद्वंद्वी की हत्या कराइ जिससे उसके मतभेद या टकराव हुए। रवि गोप का नाम पहली बार तब सुर्खियों में आया जब इसने इस दौर में इलाके के कुख्यात अपराधी पंकज शर्मा की साथियों संग मिलकर पीरबहोर में 2001 में दिनदहाड़े हत्या कर दी। एक बार जरायम की दुनिया मे शाख क्या बनी इसने फिर पीछे मुड़कर नही देखा और खुद की बादशाहत खातिर हर उस अपराधी पर तब तक हमला करवाया जब तक वो मारा नही गया।कुख्यात पंकज शर्मा की गोली मारकर हत्या के बाद इसने वर्ष 2005 में कदमकुआं थाना इलाके में आपराधिक इतिहास वाले भाजपा नेता दीनानाथ क्रांति को नाला रोड से सटे दरियापुर प्रोफेसर लेन के मुहाने पर स्थित ‘राजधानी जेंट्स पार्लर’ (सैलून) में दोपहर बाद परलोक भिजवा दिया जब वो सेविंग करा रहे थे। फिर वर्ष 2005 में तत्कालीन कदमकुआं थानाध्यक्ष रमाकांत प्रसाद ने नाला रोड इलाके से रवि को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे रंगदारी के मामले में दबोचा था। फ़िर वर्ष 2006 में बेउर जेल से छूटा था।

छूटते ही फिर 2006 में इसने दीनानाथ के नजदीकी अपराधी संग्राम सिंह को साहित्य सम्मेलन के समीप सरेशाम गोलियों व बमों के जरिए ऊपर भिजवा दिया। फिर बारी आई वर्ष 2012 लोहानीपुर में पंकज शर्मा के शागिर्द रहे अंग्रेजवा की इसको भी गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया गया।लेकिन अग्रेजवा की हत्या के महज 3 महिने के भीतर वर्ष 2012 में अपने सबसे बड़े दुश्मन व पुलिस के नामवर खबरी लोहानीपुर निवासी अशोक गुप्ता को रास्ते से हटवा दिया। फिर वर्ष 2011 कोतवाली क्षेत्र में वीणा सिनेमा हॉल के समीप हापट गोप को निपटवाया फिर वर्ष 2012 में कदमकुआं में अनिल ओझा की गोली मारकर हत्या करवाई। फ़िर वर्ष 2014 के 9 जून को कदमकुआं थाना इलाके के दरियापुर में एक डेयरी कंपनी के 26 लाख रुपये लूट कर भागने और बमबारी से जुड़े कांड संख्या 259/14 में रवि नामजद आरोपित था। इसी मामले में पुलिस द्वारा जेल भेजा जाएगा।

एक गलती से चढ़ा एसटीएफ के हत्थे

राजधानी के बीचोबीच हुई कई चर्चित हत्याओं के बाद कुख्यात रवि गोप को पकडऩे के लिए तेज-तर्रार पुलिसकर्मियों की फौज लगाई जाती रही पर नतीज़ा शिफर ही रहता। हद तो देखिए पुलिस विगत डेढ़ दशक में रवि गोप की एक तस्वीर तक जुटा नहीं पाई। हालांकि, उसकी एक गलती का फायदा इतने वर्षों बाद पुलिस को मिला और केवल तीन दिनों की मशक्कत के बाद रवि पुलिस की गिरफ्त में आ गया।

उसने अपने एक मुकदमे के ट्रायल को लेकर अधिवक्ता से मोबाइल पर बात की थी। उसी केस से जुड़े एक व्यक्ति ने एसटीएफ के एक डीएसपी को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने अधिवक्ता का काल रिकार्ड खंगाला तो उसमें रवि के एक सहयोगी का नंबर मिला। इस पटनासिटी निवासी युवक से रवि लागातर बातचीत करता था। साथ ही कथित तौर पर यही शख्स रवि की कारोबारियों और व्यापारियों से बातचीत भी करता था। इस को जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वो नंबर मिला जिससे रवि संपर्क में रहता था।

 

उसी नंबर की लोकेशन के आधार पर एसटीएफ के दारोगा समेत दो जवानों की टीम महाराष्ट्र के नागपुर शहर के सोनेगांव के पौनापुरी इलाके के उस बेहद आलीशान मकान तक जा पहुची और फिर रेकी करने लगी। लेकिन शुरुआती 2 दिनों तक रवि जो वहां आलोक कुमार के नाम से रह रहा था नही दिखाई दिया बस उक्त मकान में एक युवती और एक छोटा बच्चा दिखाई दिया। एसटीएफ उसके स्क्रैप कारोबार के कार्यालय भी गई थी, लेकिन वह ग्राहकों से खुद संपर्क नहीं करता था। लेकिन बुधवार की दोपहर उक्त मकान के बाहर एक लग्ज़री एसयूवी आकर रुकी और एक लंबे कद का शख्स जिसकी हाईट 6 फुट से ज्यादा थी उतरा और उक्त घर में प्रवेश कर गया।पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से रवि को उसके मकान से धर दबोचा गया।

लम्बाई ने कराई पहचान सख्ती हुई तो कुबूला नाम

उल्लेखनीय है कि पटना पुलिस के पास मोस्टवांटेड रवि यादव की एक बेहद पुरानी तस्वीर जब वो महज 17-18 साल का था तब की थी। लेकिन हद तो देखिए विगत 16 साल से जिस शख्स की तलाश में पटना पुलिस की कई एसआईटी टीमें और तमाम तेज-तर्रार पुलिस कर्मियों की फौज और एसटीएफ तक डेढ़ दशक दशक तक खाक छानती पूरे देश मे टहलती रही उसकी एक हालिया तस्वीर तक नही इंतजाम कर सकी थी।सिर्फ एक ही क्लू था उसकी लंबाई (रवि गोप की हाईट लगभग 6.3″ बताई जाती है) और टेक्निकल सर्विजलान्स से मिली लोकेशन और फिर ह्यूमेन इनपुट जो गिरफ्तारी में बेहद अहम साबित हुआ।

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महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से रवि गोप को उसके मकान से धर दबोचा गया। लेकिन पकड़ा गया 50 हजार का ईनामी रवि गोप ही है इसको लेकर एसटीएफ आश्वस्त होना चाहती थी। रवि को कब्जे में लेने के बाद एसटीएफ ने मोबाइल से उसकी तस्वीर खींच कर कथित कुछ करीबी लोगों को भेजी, मगर वे भी पहचानने का दावा नहीं कर रहे थे। लेकिन उसकी कद काठी उसकी चुगली कर रहे थे। साथ ही उसके बातचीत के लहजे में बिहार टच भी एसटीएफ के इसके रवि गोप होने का इशारा कर रहे थे।यकीन पुख़्ता हुआ तो आखिरकार पुलिस ने अपना स्टाइल अपनाया तो रवि यादव ने अपनी पहचान उजागर करते हुए सच कुबूल लिया।फिर तो एसटीएफ ने इसकी जानकारी तुरंत अधिकारियों को दी कि रवि यादव उर्फ रवि गोप गिरफ्तार कर लिया गया है।

नहीं करता मोबाइल से संपर्क

बताया जाता है कि 2006 में पटना से फरार होने के बाद रवि नेपाल चला गया था। वहां उसने एक कंपनी का कार्यालय भी खोला था। इसके बाद चंडीगढ़ से दवा तैयार करा अपनी कंपनी के नाम से बेचा करता था। उसने रंगदारी से वसूली गई रकम को कई धंधों में निवेश किया और करोड़ों की संपत्ति बना ली। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में भी अशोक राजपथ से लेकर पटना सिटी तक के कई प्रतिष्ठानों से रवि के गुर्गे रंगदारी वसूल रहे थे। उसके दर्जन भर गुर्गे कई दवा कंपनियों के स्टाकिस्ट हैं। इस मंडी मे भी रवि के गुर्गों ने अतुल पांडेय नामक शख्स की हत्या कर दी थी।

नागपुर में शादी कर बन गया आलोक 

पटना से फरार होने के बाद इसने नेपाल का रुख किया फिर पटना पुलिस ने जब यह ठिकाना खोजना शुरू किया, उसने नागपुर में नया ठिकाना बनाया और पहले केबल के धंधे में हाथ डाला। उसमें अच्छी कमाई के बाद स्क्रैप का धंधा शुरू किया और वहीं की लड़की से शादी कर ली। साथ ही अपना नाम बदल कर आलोक कर लिया और उससे संबंधित दस्तावेज भी बना लिया। उसने नागपुर के सोनेगांव में तीन कट्ठे जमीन पर आलीशान मकान बनाया और दो लक्जरी वाहन भी खरीद लिये। मुम्बई व गोवा तक कारोबार फैलाकर रहने परिवार के साथ आराम की जिंदगी जीने लगा।

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