बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

Fact Finding -(विडियों) वो कौन है? सबको है मालूम, पटनासिटी के ज्वैलर्स का काल “रंगबाज” जो बनता जा रहा खौफ़ की अलामत

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  • वो फोन करता है, मिलने का करता है फ़रमान जारी
  • फिर मोबाइल से ही मांगता है रंगदारी 
  • जब दुकानदार मानता नही बात तो भेजता हरबे हथियार के साथ कई गुर्गे एक साथ 
  • फिर भी गर नही बनती है बात ठाय ठाय के जरिए भेजता है आदेश
  • वो कौन है ? सबको मालूम है पर ज़ुबान पर लगे  खौफ के ताले 

पटना Live डेस्क।बिहार की राजधानी का पटनासिटी अंचल जितना इसका इतिहास पुराना है उतना ही यहाँ की मंडियों का ख्याति पुरानी है। इलाका घनी आबादी और मंडियों से अटा पड़ा है। तमाम तरह के खाद्य पदार्थो से लेकर कॉस्मेटिक्स तक और कपड़ो से लेकर रोजमर्रा के समान तक, सोने-चांदी के हर प्रकार के आइटम से लेकर शादी ब्याह के नेगचार की वस्तुओं तक सब कुछ थोक व खुदरा खरीदी बेची जाती है। इसी सिटी अंचल में चौक थाना अंतर्गत पड़ता है मथलीतल का इलाका। इस सड़क की दोनो तरफ दुकानों की लंबी कतार में सोने-चांदी नौग्रहों के पत्थरो- रत्नों और आर्टिफिशियल श्रृंगार के समान थोक व खुदरा बेचा जाता है। सड़क के दोनो बाजू ज्वेलर्स की भी तमाम दुकानें है। कुछ नई तो कुछ बेहद पुरानी है। अमूमन शांत रहने वाला यह आवासीय सह व्यवसायिक परिसरों वाली सड़क वर्त्तमान दौर में बमो के धमाके, गोलियों की तड़तड़ाहट फिर धड़ाधड़ गिरतें दुकानो के शटरों की वजह से सुर्खियों में है। दरअसल,इस सड़क के आजु-बाजू की दुकानों से एक बेहद दुःसाहसी और दुर्दांत रंगबाज रंगदारी वसूलने खातिर लगातार ज्वेलरी शॉप के मालिकों को फोन करता है और रकम नही देने पर अपने गुर्गों को भेजकर फ़ायरींग करवाकर दहशत कायम करने की कवायद में जुटा है। ख़ौफ़ कायम भी होता जा रहा है। वो कौन है? अमूमन शॉप ऑनर्स को मालूम भी है, तभी तो वो रंगदारी तो मांगता ही है साथ ही आकर मिलने का भी फरमान जारी करता है। हर बार एक ही जगह बुलाता है। इसके कई प्रमाण भी है।

लेकिन हक़ीक़त की पड़ताल में जुटी टीम पटना Live को सच तलाशने के दौरान कई ऐसे तथ्यों और जानकारों से मुख़ातिब होना पड़ा,जो खुरेजी की इन घटनाओ के पीछे एक बेहद संगठित और खूंखार गिरोह के होने के न केवल पुख्ता सुबूत साबित हुए बल्कि पहले मोबाइल से रंगदारी मांगना फिर उक्त ज्वैलर्स पर जानलेवा हमला और अब दिनदहाड़े एक अन्य ज्वैलर्स की उसकी दुकान में घुसकर हत्या की कड़ियों को आपस मे जोड़कर इन सभी का एकही मकसद साबित करते है और वो मकसद है सिर्फ और सिर्फ रंगदारी (प्रोटेक्शन मनी) वसूलना चाहे कितनी ही खूंरेजी क्यों न करनी पड़े।

पहले आप को बताते है इस पूरी साज़िश का वो पहलू जो अपराधियों के गिरोह को सिर्फ ज्वैलर्स को टारगेट करने की वजह बनी है। दरअसल,महेंद्रू से लेकर कटरा बाजार के बीच छोटी बड़ी कुल 432 स्वर्ण व्यवसायियों की दुकाने और प्रतिष्ठान है। इसी इलाके में मथनीतल से मोर्चा रोड भी पड़ता है।

मथलीतल ही क्यो है टार्गेट पर 

दरअसल, मथलीतल और मोर्चा रोड के बीच प्राप्त जानकारी के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण विक्रेताओं की कुल जमा 31 दुकाने है। वही बात अगर सिर्फ मथली तल की करे तो इस रोड पर 19 दुकाने है। कई पर बोर्ड लगे है कई पर नही है। इस सड़क पर तो कई दुकानें बेहद पुरानी है जिनकी बड़ी साख तो है ही उनका मार्केट में अच्छा खासा दखल भी है। यानी इस इलाके में “दहशत कायम” होने का मतलब महेंद्रू से कटरा तक के ज्वैलर्स पर न केवल तगड़ा असर पड़ेगा बल्कि खौफ़जदा होकर रंगदारी देने का रास्ता भी खुल जायेगा। इसी शातिराना साज़िश के तहत “कुख्यात” ने अपने गुर्गों के ज़रिए महज एक पखवाड़े में 2 बड़ी घटनाओं को अंजाम दिलाया है। दोनो ही घटनाओं में निशाने पर स्वर्ण व्यवसायी ही रहे। पहले हमले में ज्वेलर्स बाल बाल बच गया तो फिर दूसरे यानी बाबा ज्वैलर्स के मालिक से फ़ोन पर रंगदारी मांगी लेकिन रंजन बाबा ने तवज्जो नही दी तो उन्हें दुकान में घुसकर गोलियों से छलनी कर दिया गया ताकि रंगदारी की डिमांड को हल्के में न लिया जाए, व्यापारी वर्ग पर ख़ौफ़ कायम हो जाए,मैसेज साफ और सफ्फाक फैल जाए कि पैसा देना ही होगा वार्ना…

रंगदारी दो वार्ना होगी गोलियों की बारिश

यही वो संदेश है जो उस रंगदार ने स्वर्ण व्यवसाइयों तक दिनदहाडे ताबड़तोड गोलियों की बौछार कर बाबा ज्वेलर्स के मालिक की निर्मम हत्याकांड को अंजाम दिलाकर दी है। वो अपने गेम में सफल भी हो गया प्रतीत हो रहा है क्योंकि मार्केट में यह खबर आग की तरह चहु ओर फैल ही गई है साथ ही मीडिया के माध्यम से दूर तलक जा चुकी है कि आलोक रंजन मिश्र को हत्या से पहले रंगबाज ने फोनकर न केवल रंगदारी की मांग की थी बल्कि आकर मिलने के लिए कहा था।लेकिन रंगदारी मांगे जाने की बात मकतूल ने अपने परिवारजनों से साझा न करते हुए बस इस बात की जानकारी से अपने उत्पाद विभाग में कार्यरत बड़े भाई को अवगत कराया। फिर दिन बीतते गए और बात आई गई हो गई। न तो उन्होंने उक्त नम्बर पर सम्पर्क किया ना ही रंगदारी की मांग को तवज्जों ही दी थी। नतीजा निकला शुक्रवार 13 मार्च को शाम को 5 बजे उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन पुलिस के अपने ही तर्क है। पटना पुलिस का कहना है कि रंगदारी को लेकर ही हत्या हुई है या अन्य कारणों से इस दिशा में अभी अनुसंधान जारी है। कांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही हत्या की असल वजह का खुलासा हो पायेगा।

लगातार हुए काण्डों की क्रोनोलॉजी समझिए

एक जनवरी 2020 से आज की तारीख तक कि बात करे तो “वो रंगबाज़” चौक थाना क्षेत्र के इस इलाके के 2 दुकानदारों से फोन पर रंगदारी की मांग कर चुका है यह अब सर्वविदित वारदाते है।

लेकिन सच कुछ अलहदा है। बहुुुत हद तक टटोलने के बाद अति विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक हकीकत में अबतक रंगबाज ने इलाके के 5-6 ज्वैलर्स को मोबाइल पर रंगदारी ख़ातिर फोन किया है। सभी को एक ही अंदाज़ में कॉल किया गया है। सभी को दिन में एक बजे से 2 बजे के बीच “रंगदार” ने मोबाइल फोनकर रंगदारी की मांग की साथ ही आकर उनसे मिलने के लिए कहा”।

रंगदारी खातिर फोन आते ही तमाम ज्वैलर्स मालिक खौफ़जदा हो गए, एक-दो ने संपर्क किया और शायद समय लिया या पैसे दिए इसकी सही व सटीक जानकारी उपलब्ध नही हो पाई है। क्योकि रंगदारी का फोन आने के बाद खौफज़दा दुकान मालिको ने बेहद सतर्कता तो बरतनी शुरू कर ही दी बल्कि अपने बेहद करीबियों को ही फोन आने के बाद क्या किया इसकी भनक लगने दी। लेकिन रंगदारी खातिर फोन किए जाने की बात पुलिस तक नही ही पहुच पाई और मामला दबा रह गया। इसका फलाफ़ल यह हुआ कि “रंगबाज” का दुःसाहस बढ़ता ही चला गया।

सोमवार (24 फरवरी) रात 8 बजे

लेकिन रंगदारी मांगे जाने का खुलासा तब हुआ जब “रंगबाज” के गुर्गे ने 24 फरवरी की रात चौक थाना क्षेत्र के मथनीतल के ही ज्वैलर्स शॉप पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैला दी। गोलीबारी की घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ था क्योकि गुर्गो का मकसद भी महज़ दहशत कायम करना ही था और वो अपने मकसद में कामयाब रहे।

दरअसल, सोमवार की रात हुआ यूं था कि रात्रि आठ बजे मथनीतल मोहल्ले में स्थित लक्ष्मी ज्वेलर्स दुकान के मालिक मुन्ना प्रसाद का बेटा गुड्डू दुकान बंद करने की तैयारी में थे। बकौल दुकानदार के तभी अचानक एक युवक दुकान में दाखिल हुआ और उसके साथ रहे 2 युवक बाहर खड़े रह गए। अंदर घुसते ही हथियारबंद बदमाश ने जोर से कहा कि “बात क्याें नहीं करते हो” दुकानदार ने कहा कि हम क्याें बात करेंगे? उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले मुन्ना प्रसाद के मोबाइल पर फोन कर रंगदारी की मांग की थी साथ ही आकार मिलने को भी कहा गया था। पर मुन्ना ने कोई प्रतिक्रिया नहीं कि थी।

गुर्गों का इरादा ज्वैलरी शॉप लूटने का था ही नही

दुकान मालिक द्वारा बात करने से इनकार करते ही बदमाश आक्रोशित हो गया और आव देखा न ताव ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। गुड्डू ने काउंटर के नीचे छुपकर जान बचायी थी। अपराधियों की मंशा कही से भी लूटपाट की नही थी। दरअसल,मंशा दहशत कायम करने की थी।इलाके के दुकानदारों को खौफ़जदा करने की थी। यानी रंगदारी ख़ातिर ही ताबड़तोड फ़ायरींग कर खौफ़जदा किया गया ना कि इरादा लूट या हत्या थी।

तभी तो अपराधी ने दुकान अंदर होने के बावजूद दोनो गोलियां शॉप की छत में दागी थी। वही स्थानीय लोगों ने बताया था कि भागने के क्रम में भी अपराधियों ने फायरिंग की थी। गोलियों की आवाज से बाजार में अफरातफरी मच गई।दुकानों के शटर गिर गए। सूचना मिलने पर एएसपी मनीष कुमार, तात्कालिक चौक थानाध्यक्ष मितेश कुमार भी वहां पहुंचे थे। तफ़्तीश में पुलिस ने घटनास्थल से पांच खोखा बरामद किया था। साथ ही पुलिस द्वारा घटनास्थल के आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल गया तो रात होने की वजह से कैमरे से बहुत साफ कुछ नहीं मिला।

मामला चौक थाने के अनुसंधान जारी है के चक्रव्यूह में फस गया। कथित तौर पर पुलिस आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी अभियान में जुटी रह गई। दूसरी तरफ 24 फरवरी की घटना से इलाके के दुकानदारों में दहशत व्याप्त हो गया।

बाबा ज्वैलर्स के मालिक को  रंगदारी का फोन

शुक्रवार को ताबड़तोड गोलियों की बौछार कर रंजन बाबा की हत्या के बाद से हुमाद गली स्थित उनके पैतृक आवास पर मौत की खबर पहुंचते ही मातम पसर गया। चीख-पुकार मच गयी। मोहल्ले में कोहराम मच गया। सभी की जुबान पर बस एक ही बात हैं कि बेहद विनम्र मिलनसार हरदिल अज़ीज़ रंजन बाबा की किसी से कोई अदावत भी नहीं थी। फिर क्यो ? इस सवाल का जवाब इस घटना क्रम से समझिए

24 फरवरी की रात तकरीबन आठ बजे बदमाशो के निशाने पर रहा लक्ष्मी ज्वैलर्स और मारे गए आलोक रंजन मिश्र की दुकान बाबा ज्वैलर्स एक दूसरे के लगभग आमने सामने ही स्थित है बस बीच सड़क का फासला है। लक्ष्मी ज्वैलर्स पर हुईं गोलीबारी की घटना के महज तीसरे या चौथे दिन (जैसा कि परिजनों से बातचीत में उजागर हुआ है) दोपहर में रंजन बाबा को उनके मोबाइल नम्बर पर रंगदारी ख़ातिर अज्ञात (क्या सच मे वो अज्ञात है क्योकि वो मिलने भी बुलाता है) ने फोनकर रंगदारी की मांग की साथ ही आकर उनसे मिलने के लिए कहा। फिर क्या हुआ कैसे हुआ और कब हुआ आप इस लिंक को क्लिक कर पढ़ ले।

BiG Breaking (वीडियो) पटना में रंगदारी ख़ातिर ज्वैलरी शॉप में घुसकर सरेआम मारी गई ताबड़तोड कई गोलिया,मौत

विरोध में बंद रही दुकानें

अपराधियों द्वारा गोलियों से छलनी किए गए बाबा ज्वेलर्स के मालिक रंजन बाबा हत्याकांड के विरोध में शनिवार को मथनी तल से मोर्चा रोड की अधिकतर दुकानें बंद रहीं। बन्दी का जोरदार असर देखने को मिला अमूमन गुलजार रहने वाली सड़क पर सन्नाटा पसरा रहा। महेंद्रू से लेकर कटरा बाजार तक के तमाम स्वर्ण व्यवसायियों द्वारा साथी व्यवसायी की निर्मम हत्या से उपजी असुरक्षा के बीच सुरक्षा की मांग को लेकर दोपहर में एसपी (पूर्वी) जितेंद्र कुमार को चौक थाना में ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान दुकानों को बंद कर विरोध भी जताया गया।

हत्या ही था किलर दस्ते का इरादा

घटना के बाबत चौक थानाध्यक्ष टी एन तिवारी ने बताया कि बाइक पर आए बदमाशों का इरादा लूटपाट करने का नहीं था। दुकान में घुसते ही बदमाशों ने आलोक रंजन मिश्र पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। हत्या के कारण का पता नहीं चल सका है। एएसपी मनीष कुमार का कहना है कि अपराधियों की संख्या का अभी तक ठीक ठीक पता नहीं चल सका है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। वही,बकौल प्रत्यक्षदर्शियों तीन बाइक पर सवार होकर 9 बदमाश आए थे। इनमें से छह के हाथ में पिस्तौल और झोले में बम था।पुलिस का कहना है कि रंगदारी को लेकर हत्या हुई है या अन्य कारणों से, इस दिशा में अभी अनुसंधान जारी है।

टीम पटना Live द्वारा वारदात स्थल, स्थानिए जानकारों,व्यापार जगत और अपराध जगत से जुड़े सूत्रों और लंबे समय तक इलाके के इतिहास भूगोल और जरायम की दुनिया के गुर्गो को बड़ी बारीकी से समझने बुझने और खाकी का अभिन्न हिस्सा रहने वालों से बातचीत कर जुटाये गए जानकारी का लब्बोलुआब यह तथ्यात्मक यानी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट है। वही, हक़ीक़त तलाशने के दौरान एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि “वो कौन है” जो रंगदारी मांगता है आकर मिलने को कहता है। वो कोई अदृश्य या अज्ञात नही है। बल्कि वो बाशक्ल है बाहैसियत बड़ा बदमाश है। पटना सिटी अंचल का एक नामवर बड़ा गैंगेस्टर है। जिसके नाम का सिक्का अपराध जगत में चलता है। उसके काण्डों की लंबी फेरहस्ति पुलिस फाइलों में दर्ज है। उसका नाम, पता ठिकाना और मोबाइल नम्बर भी इलाके के व्यवसायी जानते है। पर जुबान नही खोलते है। अनजान नम्बर से मोबाइल की बजती घण्टी से दुकानदार चिहुक उठ रहे है मतलब उसका खौफ दिमाग पर तारी है। कृपया आप कॉमेंट और सुझावों के जरिए आप भी मार्गदर्शन करें।

क्रमशः …

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