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Fact Finding-पटना पुलिस के दावों की खुलने लगी पोल बालू माफ़िया की बेटी बोली मेरे पिता की साथी संग हुई हत्या,2 शव गंगा से मिले

स्थानीय लोगो का दावा इस भीषण खूनी टकराव में एक दर्जन से ज्यादा लोगो की हुई है हत्या,तीन नाम का हुआ खुलासा, बिहटा के गोरैयस्थान निवासी बालू माफ़िया शत्रुघ्न राय और ब्यापुर भुअर टोला के लालदेव राय, वही तीसरा एक मजदूर कमलेश जो भोजपुर का था मूल निवासी, वही पटना पुलिस ने गंगा से गोली लगे 2 शव किए बरामद मतलब साफ 5 लोगो की हुई पुष्टि,अन्य का इंतजार

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पटना Live डेस्क। बिहार में सत्ता परिवर्तन होते ही जो करतूतें और कारकर्दगी लुक छिप कर और पर्दे के पीछे हो रहा था,वह अब बाकायदा दिन के उजाले में खुलेआम होने लगा है। माफिया अतिसक्रिय हो गए हैं और जरायम व बाहुबल प्रदर्शन समेत हत्याए व अन्य संज्ञेय गंभीर अपराध आम घटना के मानिंद हो गई है। भोजपुर, पटना और सारण (छपरा) के गंगा और सोन नदी के दियारा क्षेत्र बालू के अवैध खनन के माफियाओं का अड्डा बन गया है और यहाँ पुलिस भी दिन के उजाले में भी जाने से घबराने लगी है। बंदूकों के साए में इन घाटों पर सोन का सोना लुटा जा रहा है। गुरुवार को अंजाम पाए भीषण रक्तपात के महज 12 घंटे के बाद ही देखिए कैसे संगीन के साये में अवैध खनन जारी है।

पिछले कुछ दिनों से सोन नदी के बालू घाट पर वर्चस्व को लेकर दो गिरोहों में इतनी गोलियाँ चलीं कि पूरा इलाका थर्रा गया। यहाँ भोजपुर से सटे पटना जिले के मनेर इलाके के अमनाबाद गाँव के बालू घाट से लोगों ने 500 गोलियों के खोखे बटोरे। कहा जा रहा है कि इसमें करीब 1000 राउंड गोलियाँ चली हैं। घटनास्थल पर आधा दर्जन से अधिक जगहों पर खून के धब्बे थे। इतनी गोलियां चली की खोखा बीनते और ढूढते पुकिस को कई घंटे लग गए।

इस गोलीकांड में अब तक 16 लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है। हालाँकि, पुलिस सिर्फ एक मौत का दावा कर रही है। वहीं, स्थानिए लोगो द्वारा कहा जा रहा है कि इस खुंनी तांडव में बिहटा के गोरैयास्थान के शत्रुघ्न राय और ब्यापुर भूअर टोला के लालदेव राय की इसमें मौत हो गई है।

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शत्रुघ्न राय की बेटी का सुनीता का कहना है कि उसके पिता और लालदेव अपनी नाव लेकर बालू लादने गए थे, लेकिन उनकी हत्या कर दी गई और लाश को बालू में दफन कर दिया गया है। बेटी का कहना है कि जब वह पुलिस के पास पहुची और पिता के साथी संग हत्या की बता कही तो पुलिस ने भगाते हुए कहा कि भागो कोई हत्या नहीं हुई है। पुलिस पर मृतकों की संख्या छिपाने के आरोप लग रहे हैं।

उधर भोजपुर जिले के कमलेश कुमार के भी मारे जाने की बात कही जा रही है। कमलेश मजदूरी करता है और वह घाट वाले रास्ते से अपने गाँव लौट रहा था। इसी दौरान उसे गोली लगी। गोली लगने के बाद माफिया उसे लेकर जाने लगे, लेकिन उसके परिजन जैसे तैसे लेकर भागे।

लोगों का कहना है कि इस कांड में कम से कम 16 लोग मारे गए हैं और माफियाओं ने उनकी लाशों को बालू में गड्ढा खोदकर दफन कर दिया है। स्थानीय लोगों की माँग है कि घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉयड को लाया जाए। इससे दफन मृतकों का राज खुलेगा।

कहा जा रहा है कि यहाँ वर्चस्व को लेकर दो गुटों में पिछले तीन महीनों से छिटपुट गोलीबारी हो रही है। इसमें कार्बाइन से लेकर एके-47 तक अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया गया है। कुछ हथियारों की रेंज इतनी है कि नदी के उस पार से चलाई गई गोली इधर के इलाके को भी पार कर गई।

गैंगवार को देखते हुए लोगों के द्वारा बिहटा थाना पुलिस को लगातार आवेदन दिया जाता रहा, लेकिन पुलिस शिथिल बनी रही। हालाँकि, जब मामला गंभीर हो गया तो एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। उस दौरान पुलिस पर भी बालू माफियाओं ने फायरिंग कर दिया और फरार हो हो गए।

दरअसल लगभग बुधवार गुरुवार की दरमियानी रात बालू माफ़िया के बीच हुई खूनी भिड़त में शामिल बालू माफ़िया श्रीराय की संलिप्तता की जानकारी पर जाँच करने पुलिस अमनाबाद में उसके घर छापेमारी करने गई थी तो पुलिस टीम पर गोलीबारी कर दी गई। इसके बाद फायरिंग करते हुए श्रीराय, उसके दो बेटे प्रवीण कुमार और नवीन कुमार, चचेरे भाई गोपाल राय और अन्य बसाथी भाग निकले। हालाँकि, कथित तौर पर पुलिस ने भागते हुए पुलिस ने घर की तीन महिलाओं को दिलेरी दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया। फिर श्रीराय के घर की तलाशी के दौरान देसी कट्टा 5 गोलियाँ और डेढ़ लाख रुपए बरामद किए।

दियारा क्षेत्र में फौजी और सिपाही गैंग की हुकूमत चलती है। यहाँ और गैंगवार आम बात है, लेकिन गैंग के सदस्य या गोली लगने से किसी बाहरी की मौत होने पर लाश वहीं दफन कर दी जाती है, ताकि कोई सबूत ना बचे। प्रशासन भी बदनामी से बचने के लिए ऐसी खबरों पर पर्दा डालता रहता है। तो वही स्थानिए थाना पुलिस इस इसे अवसर मानकर वसूली कर चुप ही रहती है। कहा जाता है कि इन गुटों पर खाकी और खादी का वरदहस्त है। यही कारण है कि पुलिस भी इस झमेले में नहीं पड़ती है। बस मौन रहने का नजराना वसूल कर लेती है।

अमरकंटक से निकलने वाली सोन नदी का बालू सोना माना जाता है। इसकी डिमांड बहुत है। इसी सोन नदी के दियारे इलाके मे बिहटा प्रखंड के अमानबाद मौजे के 1/197 खेसरा में स्थित करीब 323 एकड़ भूमि 1987 में बालू का टापू बन गया है। इस पर वर्षों से अवैध बालू खनन का काम होता है और गोलीबारी का प्रमुख कारण भी बनाता है। इसके किनारे का इलाका पटना व भोजपुर जिलों को जोड़ता है। दो जिलों की सीमा होने के कारण बालू माफिया इसका फायदा लंबे समय से उठा रहे हैं। दोनों जिलों की पुलिस यहाँ जाने से भी इनकार करती है। क्योंकि हरबे हथियार से लैश शूटरों की खेप सदैव यहाँ बंदूक साए में खनन करवाते है। तमाम अत्याधुनिक हथियार लिए ये दुर्दान्त शूटर पुलिस पर भी हमले से बिल्कुल भी नही हिचकते है।

जब सोन नदी में पानी बढ़ जाता है तो छपरा, भोजपुर, पटना के चारों तरफ से यहाँ नावों का आवागमन शुरू होता है। यहा से हर दिन हजारों नावों पर बालू की तस्करी होती है। प्रत्येक नाव पर प्रति क्यूबिक फीट 500 रुपए की दर से रंगदारी शुल्क वसूल किया जाता है। इसी वसूली के लिए माफियाओं में गैंगवार होता है।

इससे पहले फौजी और सिपाही गैंग के बीच गैंगवार में दोनों पक्षों के कई सदस्यों की जान जा चुकी है। तीन साल पहले फौजी की हत्या के बाद वर्चस्व को लेकर एक बार फिर गैंगवार छिड़ गया है। मूल रूप से भोजपुर के बड़हरा के लौहर फरना गांव निवासी कुख्यात शंकर सिंह उर्फ़ फौजी की अप्रैल 2019 में गोली मार हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि गोली मारने के बाद कुल्हाड़ी से शव पर वार किया गया था। सारण के रिविलगंज थाना क्षेत्र के दारोगा राय के डेरा के पास दियारा इलाके में घटना को अंजाम दिया गया। शंकर सिंह उर्फ फौजी पर कई जिलो में कई मामले दर्ज थे।फौजी की हत्या में मनेर के सिपाही राय प्रमुख अभियुक्त था। इस बार के गैंगवार में श्री राय मुख्य अभियुक्त है।

वर्त्तमान में बेउर जेल में बंद मनेर की सूअरमरवा पंचायत के पूर्व मुखिया और अपराधी उमाशंकर उर्फ सिपाही को पुलिस की विशेष टीम ने विगत वर्ष दीघा थाना इलाके के जेपी सेतु के समीप से गिरफ्तार कर लिया था। तब से बेउर जेल में कैद है। सिपाही पर पर मनेर, बिहटा, सारण के रिविलगंज, कोईलवर में हत्या के मामले दर्ज हैं। सूत्रों के मुताबिक उमाशंकर बालू का कारोबार करने वालों से रंगदारी वसूलता है। इसके साथ ही भोजपुर के रहने वाले फौजी गैंग से भी उसके कनेक्शन थे।शुरूआती दिनों में शंकर सिंह फौजी से उमाशंकर उर्फ सिपाही का 36 का आंकड़ा था कई बार दोनो गुटों में मुठभेड़ हो गया था। इसके बाद दोनों में वर्चस्व की लड़ाई चलने लगी। बाद में दोनों गिरोहों में समझौता हो गया। हालांकि फौजी का सफाया होने के बाद उमाशंकर बालू माफियाओं से अकेले ही रंगदारी वसूलने लगा और बालू के अवैध खनन के धन्धे का बेताज बादशाह बन गया। जेल में कैद होने के बावजूद आज भी उसका हिस्सा बेखटक उस तक पहुचता है। जेल से बालू के खेल पर सिपाही की पकड़ का अंदाज़ा इस बात से लगता है कि उसके फरमान की नाफरमानी मतलब …. मौत।

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