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Fact Finding(वीडियो) मुंगेर पुलिस की बेपरवाही, बदनीयती और बेचारगी को मैं क्या नाम दूँ?15 साल बाद भी नही दिला सके न्याय

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  • कर्त्तव्य की बलिवेदी पर मुंगेर के SP रहे आईपीएस के सी सुरेंद्र बाबू और उनके 5 गार्ड्स की शहादत
  • अब तो शहीद IPS की मूर्ति भी पूछने लगी है सवाल,कब मिलेगा न्याय
  • क्या सिर्फ माला पहनाकर कर संकल्प ही लेते रहोगे?
  • 15 साल बाद भी खाली हाथ ना ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ना ही मिला न्याय 

पटना Live डेस्क। बिहार पुलिस का आदर्श वाक्य है “Voyage Of Excellence” हिंदी में इसका तर्जुमा करे तो अर्थ होता है- “उत्कृष्टता की यात्रा” इसे यूँ समझे बेहतर से बेहतरीन की यात्रा। अब शायद आप समझ गए होंगे असली मतलब। खैर,बात निकली है तो दूर तलक जायेगी अब बात करते है मुंगेर के गौरवशाली इतिहास की और मुंगेर पुलिस की बदनीयती, बेपरवाही और बेचारगी की हद की, शायद आप इस सच को जानकर कर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि जब मुंगेर पुलिस अपने एसपी और जवानों की शहादत को न्याय नही दिला पाई तो फिर आम आदमी की बिसात क्या?

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15 साल बाद भी मुंगेर पुलिस के पास नही है जवाब

हर शहादत दिवस यानी 5 जनवरी को शहीद एसपी केसी सुरेन्द्र बाबू के शहादत के दिन खड़गपुर थाना परिसर में एक सादे समारोह में श्रद्धाजंलि दी जाती है। प्रशासनिक और पुलिस अमले समेत गणमान्य लोग उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करते है। बड़े बड़े वायदे और बातें कहते है कि केसी सुरेन्द्र बाबू की शहादत बेकार नहीं जाने दिया जायेगा। इस बार भी यही हुआ रविवार को हवेली खड़गपुर थाने में आयोजन हुआ भाषण भी दिया गया।

लेकिन पुलिसवालों की हकीकत जानकर कर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि जब बिहार पुलिस के अधिकारी और जवानों की बदनीयत का ही सबब है कि 15 साल बीतने पर भी IPS और उनके गार्ड्स को न्याय नही मिल पाया है।

ये हक़ीक़त तब है जब गवाहों,में अधिकतर पुलिसवाले ही थे के मुकरने से मुंगेर के प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी ने तीन आरोपियों राज कुमार दास,भोला ठाकुर और मंगल राय को बाइज्जत बरी कर दिया। यह हश्र हुआ 5 साल तक चले ट्रायल चलने के बाद हुआ। मुंगेर पुलिस, एसपी सुरेंद्र बाबू हत्याकांड में तीनो आरोपियों का हाथ साबित करने में विफल रही। मुंगेर पुलिस की भारी फजीहत हुई।

अपने एसपी की शहादत के मामले में भी मुंगेर पुलिस के ख़ाकीवाले गवाहों के मुकरने से हुई चहुओर फजीहत की वजह बना इस मामले के तीन संदिग्ध को साक्ष्य के आभाव में न्यायालय द्वारा दोष मुक्त कर दिया जाना। तीन संदिग्ध की रिहाई के बाद सरकार की ओर से वर्ष 2013 में कांड का अनुसंधान फिर से शुरू कराया गया।

अपने चीथड़ों को समेट ने की कवायद के तहत फरवरी, 2013 में इस केस को दोबारा खोलने का आग्रह सीजेएम (मुंगेर) से किया। तब जाकर फिर यह केस एक बार फिर पुनः अनुसन्धान के तहत जारी है।

फ़ास्ट ट्रैक से वाहवाही पर SP के मामले में सन्नाटा

एसपी के.सी. सुरेंद्र बाबू हत्याकांड का मसला ऐसे ढेर सारे सवाल को जन्म देता है। जैसे बिहार पुलिस ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए तमाम अपराधियों को सज़ा दिलवाकर पूरे देश मे वाहवाही लूटी पर अपने ही IPS हत्याकाण्ड में इसे लागू नही किया है। अनुसन्धान की परिक्रिया जारी है। इसी बीच एसपी हत्याकांड में कार्रवाई को आगे बढ़ाने को तीनो संदिग्ध आरोपियों का रिमांड बेहद जरूरी था पर रिमांड नही लिया गया। हद तो ये की उक्त काण्ड में स्पीडी ट्रायल से दुनिया भर वाहवाही बटोरने वाली बिहार पुलिस ने इस मामले के स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था नहीं की है।

अबतक गिरफ्तार नक्सली

बिहार के मुंगेर जिले के भीमबांध इलाके से पुलिस ने पूर्व आरक्षी अधीक्षक सुरेन्द्र बाबू की हत्या के मामले में वांछित नक्सली विष्णुदेव दादा उर्फ अघौडा को गिरफ्तार कर लिया गया। मुंगेर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र बाबू को पांच जनवरी दो हजार पांच को नक्सलियों ने भीमबांध के सोनरवा गांव के समीप बारुदी सुरंग में विस्फोट कर मौत के घाट उतार दिया था।तब के राज्य के पुलिस महानिदेशक अभयानंद ने बताया कि इस मामले में पहले से आरोपित पंकज राम के खुलासे के आधार पर पुलिस ने अघौडा को गिरफ्तार किया गया।

नक्सली को SSB ने गिरफ्तार किया

बिहार के जमुई जिले में तैनात सशस्त्र सीमा बल (Sashastra Seema Bal-एसएसबी) की 16वीं बटालियन के जवानों ने मुंगेर जिले के गंगटा पुलिस स्टेशन के स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन मेंएक वांछित नक्सली को गिरफ्तार किया। बाबू एक पुलिस अधीक्षक की हत्या में भी वांछित था। नक्सली बाबू लाल यादव की गिरफ़्तारी सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखी गई। नक्सली बाबू लाल को गंगटा गांव (बिहार) से गिरफ्तार किया। वह मूलरूप से बिहार के मुंगेर जिले के घुघलाडीह गाँव का रहने वाला है।

लेकिन अब भी न्याय आस जारी है ..

कोर्ट से तीनों संदिग्धों की रिहाई के बाद सरकार की ओर से वर्ष 2013 में कांड का अनुसंधान फिर से शुरू कराया गया। अबतक कथित तौर पर 3 कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है जिनके स्वर्गीय एसपी सुरेंद्र बाबू के शहादत में शामिल होने के दावे है। लेकिन 15 साल बीतने के बाद भी न्याय की आस जारी है।

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