Explosive FACT FINDING – मोतीपुर थानेदार हुए है एक बेहद “शातिराना साज़िश” का शिकार, शराब माफिया और मीडिया के दल्लों की जुगलबंदीे का नतीजा पड़ा मद्यनिषेध का जोरदार छापा … पढ़िए पूरा सच

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पटना Live डेस्क। रविवार की देर शाम अचानक पटना से मद्य निषेध की टीम ने तकरीबन साठे सात बजे एसडीपीओ और एसडीओ(वेस्ट) मुजफ्फरपुर के साथ मोतीपुर थाना परिसर व मोतीपुर थानेदार के चीनी मिल क्वार्टर स्थित सरकारी आवास पर धावा बोला। टीम के साथ पहुचे पुलिस के जवानो ने थाना परिसर और थानेदार के आवास को घेर लिया। इस दौरान मोतीपुर थाने का नज़ारा अजीब सा हो गया एसाल्ट राइफल वाले पुलिसवालों की पहरेदारी में थाने के पुलिसकर्मी भौचक्क जहाँ के तहा बैठे थे या खड़े थे।फिर अचानक एक शख्स बड़ी तेजी से पुलिसवालो के घेरे में थाने में प्रवेश करता है और फिर रेड की कार्रवाई शुरू होती है।
दरअसल, मोतीपुर थानेदार का शराब तस्करों से प्रगाढ़ संबंध के साथ ही अपने सरकारी आवास में शराब का जखीरा रखे जाने की गुप्त सूचना मद्य निषेध आईजी रत्न संजय को मिली थी।इसी सूचना पर कार्रवाई करते हुए आईजी ने मद्यनिषेध के एसपी राजीव रंजन के नेतृत्व में विशेष दस्ते को मामले की जांच करने का फरमान जारी किया। आदेश के अवलोक में एसपी मद्यनिषेध रविवार की शाम 5 बजे मुजफ्फरपुर के कांटी के सदातपुर चौक पर पहुचे और फिर सदातपुर चौक पर ही कांटी व अहियापुर थाने की पुलिस एवं बीएमपी के जवानों को।लेकर मोतीपुर थाने की घेराबंदी कर ली। कुछ ही देर बाद डीएसपी पश्चिमी कृष्ण मुरारी प्रसाद, एसएसपी मनोज कुमार भी पहुंच गए। इस बीच थानेदार कुमार अमिताभ थाना परिसर से कही निकल गए। फिर इंस्पेक्टर सुभाष प्रसाद को बुलाया गया। रात 11 बजे तक थानाध्यक्ष के आवास का ताला तोड़ा गया। थानेदार के आवास का ताला तोड़कर चार घंटे तक घेराबंदी कर भारी मात्रा में शराब व कैश बरामद किया।                   
तबतक मोतीपुर थाने पर मद्यनिषेध के पटना से पहुची टीम की रेड की खबर आग की तरह समाचार माध्यम में आग की तरह फैल चुकी थी। इस रेड के बाबत जानकारियों की बाढ़ आ चुकी थी। लेकिन तब एक मद्यनिषेध दस्ते की कार्रवाई मुकम्मल नही हुई थी। थानेदार के सरकारी आवास से बरामद शराब और कैश की जांच होनी बाकी थी। लेकिन खबरों में शराब का जखीरा बरामद होने की जानकारी फैला चुकी थी। लेकिन शराबबंदी के बाद अब तक जब्त शराब का मिलान किया जाना अभी बाकी था।                            
तभी एक और खबर आग की तरह फैली की एसएसपी के आदेश के बावजूद मोतीपुर थानेदार कुमार अमिताभ मोबाइल बंद कर मोतीपुर इलाके से भाग निकले है और एसएसपी ने थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अतबक बिहार समेत पूरे देश मे मोतीपुर थानेदार को लेकर कई तरह की खबरों का अंबार प्रकाशित और दिखाया जा चुका है। खबरों को प्रकाशित करने में पटना Live ने भी भूमिका निभाई।

खैर,आइए अब पूरे वाक्ये का सच परत दर परत खंगालते है और घटना क्रम को सिलसिलेवार ढंग से पुरी तफ्तीश और हकीकत के धरातल से आपको बताते है।

जानिए कुमार अमिताभ को                        

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेहद चर्चित थानों में शुमार है मोतीपुर थाना। विगत दिनों 1994 बैच दरोगा जो प्रमोशन पाते हुए इंस्पेक्टर बन चुके कुमार अमिताभ को इस थाने की कमान सौंपी गई। अबतक कुमार अमिताभ पटना एसटीएफ,सीतामढ़ी,वैशाली जिले में अपने सेवाकाल में पोस्टेड रहे है। इनके बाबत मिली जानकारी की अनुसार अमिताभ अपने अक्खड़पन और जुनून की वजह से अपराधियों में इनका खौफ रहा है। बेहद साहसी यह ख़ाकीवाला अपनी मिली जिम्मेदारियों को अपनी जान की बाजी लगाकर कर भी पूरा करता रहा है। इसी वजह से अबतक अपने तमाम वरीय अधिकारियों द्वारा न केवल सराहा जाता रहा है बल्कि उनका चहेता भी रहा है।

 चीनी मिल के गोदाम में चलता है थाना                    मुजफ्फरपुर जिले का मोतीपुर थाना दरअसल चीनी मिल के गोदाम में अवस्थित है। थाना परिसर चुकी मोतीपुर चीनी मिल परिसर में है। चीनी मिल के मजदूर क्वार्टर में ही थानाध्यक्ष का सरकारी आवास भी है। आवास भी चीनी मिल के दो चार क्वार्टर को किसी तरह मिलाकर बनाया गया है। जो समय के साथ धीरे धीरे ही सही पर विभिन्न थानेदारों द्वारा रहने लायक में तब्दील कर दिया गया है। वही अगर बात करे थाने की करे तो थाना में मालखाना है ही नही, यह बात तमाम वरीय अधिकारियों की जानकारी में है। हालात ये है कि थाना स्टाफ को नेचर कॉल के लिए जब थाने से बाहर का रुख करना पड़ता है तो आप अंदाजा लगा सकते है कि थाना कितना बड़ा है।

सवाल पे सवाल लेकिन …. जवाब नदारद क्यो ?खैर, बात अब मद्यनिषेध दस्ते की छापेमारी की करते है। कुछ सवाल जो बेहद जायज है।

सवाल नंबर -1

रविवार 7 बजे पड़ी रेड के 24 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बावजूद अब तक मद्यनिषेध की टीम यह नही सार्वजनिक नही कर सकी है कि थानेदार के उक्त सरकारी क्वार्टर में बरामद शराब के कार्टून्स में कितना थाने द्वारा बरामद है और कितनी शराब की पेटियां अवैध है ?

सवाल नंबर-2

अगर थानेदार के खिलाफ शराब मामले मद्यनिषेध दस्ते को सुबूत मिले है,अवैध शराब का जखीरा मिला है तो अबतक अब तक कुमार अमिताभ की गिरफ्तारी की नही हुई पुष्टि या थाने में FIR दर्ज होने की पुष्टी क्यो नही की जा रही है ?

सवाल नंबर-3

पूर्व थानाध्यक्ष ने भी की है ताकीद सरकारी आवास में भारी मात्रा में बरामद शराब पुलिस द्वारा पूर्व में जब्त की गई हुई मालखाने की शराब है, जो मालखाना नही होने की वजह से क्वार्टर में रखी जाती रही है तो फिर अवैध शराब का जखीरा क्यो कहा गया?

सवाल नंबर-4

कहा जा रहा है कि सरकारी मोबाइल के साथ फरार थे थानाध्यक्ष लेकिन विश्वस्त सूत्र बताते है कि कुमार अमिताभ लगातार मुजफ्फरपुर पुलिस के संपर्क में थे बल्कि नवनियुक्त थानाध्यक्ष को दोपहर में सरकारी मोबाइल भिजवा दिया था। फिर फरार और गिरफ्तार की बात का सच क्या है ?

सवाल नंबर-5

आखिर क्यों ?  मोतीपुर थाने में शराबबंदी के बाद अब तक जब्त शराब को नष्ट नहीं किया गया था। हाल ही में थानाध्यक्ष ने विभाग को जब्त शराब को नष्ट करने का प्रस्ताव भेजा था। शराब नष्ट करने का आदेश भी प्राप्त हो चुका है। लेकिन, उत्पाद टीम के नहीं आने के कारण नष्ट करने की कार्रवाई नहीं हो रही थी।

सबसे बड़ा सवाल

विगत दिनों जेल से बाहर निकले स्थानीय शराब माफिया, खादी वाले सफेदपोश,स्थानीय पत्रकार (जिनका शराब माफिया से है रिश्ता) और उनके खाकी वालो संरक्षक बिरादरी की शातिराना साजिश का हिस्सा तो नही है मोतीपुर थाना शराब कांड ?

शराब माफिया और मीडिया के दल्लो की साज़िश

दरअसल, मुजफ्फरपुर का मोतीपुर थाना क्षेत्र के सदैव से सुर्खियों में रहा है। यह क्षेत्र काले कारनामे करने वाले सफ़ेदपोश लोगो का आखेटस्थल रहा है। वही सूबे में शराब बंदी के बाद से इस क्षेत्र के इतिहास पर गौर करेंगे तो जिले का मोतीपुर थाना क्षेत्र हमेशा से शराब माफियाओं का अड्डा रहा है। कई बार कई बड़े शराब के कंसाइनमेंट पकड़े गए है। विगत महिनो में कई शराब माफ़िया जेल से बेल पर बाहर आये है। मोटी का कमाई का चस्का लग चुका है। लेकिन इधर मोतीपुर की कमान अक्खड़ मिज़ाज थानेदार को मिल गई है। वही इलाके के तीन शातिर बड़े शराब कारोबारियों के जेल से छूटने के बावजूद उनके शराब की खेप मोतीपुर में उतर नही पा रही थी। माफिया त्रस्त था, खाकी उर खादी को रकम नही मिल रही थी। सभी थानेदार को मोतीपुर से कही और ठिकाने लगाने की कवायद में जुटे थे। तभी सत्ताधारी दल के विधायक के न्यूज़ चैनल के इन्फॉर्मर पर थानेदार कुमार अमिताभ ने 31 दिसम्बर को NH जाम करने के जबरिया खेल में उसकी करतूतों और दंबगई से आज़िज़ आकर FIR कर दिया।फिर क्या था? शातिराना खेल शुरू हो गया। शराब माफिया ने इस अवसर का लाभ उठाया और फोर रची गई बेहद शातिराना साजिश। शराब के धंधेबाजों ने पैसा झोंका,खादी ने एप्रोच और चैनल इन्फॉर्मर ने पत्रकारिता के नाम पर टेसुए बहाकर कर स्थानीय मीडिया कर्मियों से झूठा FIR का रोना रोया और सहानुभूति हासिल कर ली। फिर तो मुजफ्फरपुर और राजधानी के बीच जमकर मोबाइल की घंटिया बज़ी और नतीजा आपके सामने है।

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