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BiG News-देवघर कोर्ट हत्याकांड बिहार पुलिस का सिपाही निकला बेउर में कैद कुख्यात माणिक का खबरी,हुआ गिरफ्तार ASI के साथ,खोले राज़

18 जून को देवघर कोर्ट में कत्ल कर दिए गए अमित सिंह हत्याकांड में बिहार पुलिस का सिपाही ताबिश खान निकला लाइनर,सिपाही ताबिश खान और ASI रामावतार राम हुए गिरफ्तार, CDR ने खोले राज़, साज़िश में शामिल हो जेल में कैद बाप-बेटा गिरोह यानी मनोज सिंह व माणिक सिंह के गुर्गे से लगातार टच में था सिपाही तो पिता मनोज सिंह रांची में बैठकर साज़िश को पहुचाया अंजाम तक

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पटना Live डेस्क। 18 जून को देवघर कोर्ट परिसर में कत्ल कर दिए गए सज़ायाफ्ता बिहटा निवासी अमित सिंह उर्फ निशान्त मामले में देवघर पुलिस ने अपने अनुसन्धान में बड़ा खुलासा किया है। कोर्ट परिसर में हुए इस कत्ल में अमित को लेकर देवघर गई बिहार पुलिस की सुरक्षा दस्ते में शामिल ASI रामावतार राम और पूर्व से ही एक संदिग्ध चरित्र के सिपाही ताबिश खाँ को गिरफ्तार करते हुए पूरी साज़िश को बेनकाब कर दिया है।

वही, ASI रामवतार राम और सिपाही ताबिश खाँ को अमित सिंह हत्याकांड में गिरफ्तारी की जानकारी देवघर पुलिस ने पटना पुलिस से साझा कर दी है। साथ ही हत्याकांड में इनकी गिरफ्तारी के तमाम सुबूतों के बाबत भी जानकारी दी है। दोनों की भूमिका लाइनर के तौर पर हुई है। दोनो ख़ाकीवालो के फोन का CDR भी उनके लगातार साजिशकर्ताओं के संपर्क में होने का पुख्ता प्रमाण साबित हो रहा है।

                       वही बाकी अन्य तीन सिपाहियों की काण्ड में भूमिका होने के प्रमाण नही मिले है। लेकिन अब भी तीनो को एहतियातन देवघर टाउन थाना पुलिस के निगहबानी में थाना परिसर में ही रखा गया है। पटना पुलिस के देवघर आपने पर तीनों को सौंपा जाएगा। इधर, दोनो गिरफ्तार पुलिसवालों को पटना पुलिस ने निलंबित कर दिया है। साथ ही विभागीय एक्शन भी लिए जाने की कवायद की ज रही है। वही बाकी के तीन सिपाहियों को पटना लाने ख़ातिर एक टीम को भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

           दरअसल, मारे जाने से पहले अमित सिंह स्क्रैप व्यवसायी चंचल कोठारी अपहरण मामले में अमित सिंह को तीन बार देवघर कोर्ट में पेशी हुई थी। तीनों दफा सहायक दरोगा रामावतार राम उसे लेकर देवघर पहुंचे थे। वहीं आरक्षी ताबिश खाँ दो बार आया था। विश्वत सूत्रों कि माने तो जब-जब अमित सिंह देवघर कोर्ट में पेशी के लिये आता था, तब-तब लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ ही आता आता था। बताया जाता है कि कोर्ट में पेशी के दौरान अमित सिंह और उसका काफिला दो बार देवघर के एक होटल में रूका था।

                  साथ ही इस बात की मुुुक़म्मल जानकारी देवघर पुलिस को मिली है कि अमित सिह हर बार लाव लश्कर के साथ कोर्ट में पेेेश होंने पहुचा करता था। कारों का काफिला होता और उसके साथ तीन वाहन में उसके गुर्गे भी रहते थे। देवघर पुलिस ने अपनी जाँच में यह भी पाया है कि अमित सिंह होटल में रुकने के बाद देवघर में बाबा मंदिर में पूजा करने भी गया था।

बिहार पुलिस की घातक लापरवाही बेनकाब

अमित सिंह की हत्या के बाद जांच में बिहार पुलिस के सुरक्षा दस्ते की कारगुजारियों किरचें किरचें खुल रहे है। बिहार पुलिस की इतनी बड़ी लापरवाही तामाम सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि जितनी दफा बिहार पुलिस हिस्ट्रीशीटर अमित सिंह को पेशी के लिए देवघर पहुंची लेकिन एक बार भी स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। नियम है कि यदि ट्रेन से उतर कर स्टेशन में रूकने की बात होती है तो जाआरपी थाना में सूचना देनी है और रात होने पर अपराधी को GRP के हाजत में रखना चाहिये था।

वहीं अगर शहरी क्षेत्र में रखना होता है तो लोकल थाना को जानकारी देकर अपराधी को थाना हाजत में रखना चाहिये था,लेकिन बिहार पुलिस जितनी बार उसे पेशी के लिये साथ लेकर देवघर पहुंची उतनी बार उसे उसकी मर्जी के होटल या उसके किसी दोस्त के घर में रखा।17 जून को भी वही किया और दिग्विजय सिंह नामक एक फारेस्ट अफसर के निजी आवास पर उसे रखा था।

शुरू से ही शक के घेरे में था सिपाही

देवघर कोर्ट में हुई हत्या मामले में पुलिस को अपनी शुरुआती जांच में ही एक सिपाही की भूमिका पर शक हो गया था। उसने ही लाइनर बन कर विरोधी गुट को सूचना दी थी। सिपाही अपने साथ आये एएसआइ व अन्य जवानों को नाश्ता कराने लेकर भी गया था। हत्या के बाद से ही एएसआइ समेत चारों जवान पुलिस की हिरासत में रहे। सभी से देवघर नगर थाने में पूछताछ की जाती रही। हद तो तब हो गई जब बिहार पुलिस के एएसआइ व जवानों ने झारखंड पुलिस को झूठी कहानी सुनायी और महज कुछ घण्टों में ही उनकी कहानी का पर्दाफ़ाश हो गया।

पटना पहुची देवघर पुलिस

कोर्ट परिसर में हत्या जहां से एसपी देवघर का घर महज 100 मीटर की दूरी पर है ने झारखण्ड पुलिस को सकते में डाल दिया। कुख्यात अमित सिंह हत्याकांड मामले में जांच के लिए देवघर पुलिस की एक टीम पटना रवाना हुई और अमित के गैंग से किस गैंग को अदावत थी की जांच शुरू की तो कड़िया जुड़ने लगी। बेउर जेल से लेकर देवघर तक इंच इंच नापने की कवायद शुरू हुई। देवघर पुलिस के राजधानी मे जम गई है। साथ ही आ हर एंगल को खंगालन कवायद की है और कर रही है। शुरुआत बेउर जेल से की गई तो कड़िया जुड़ने लगी और संदिग्ध सिपाही की कांड में भूमिका पुख़्ता होते गई। तब देवघर पुलिस की एक टीम मकतूल अमित के साथ रहे पांचों पुलिस कर्मियों को पटना लेकर आई। ताकि जेल से देवघर कोर्ट तक के सफर को समझा जा सके और साज़िश को बेनकाब किया जा सके।

जांच के दायरे में बेऊर जेल के जेलर की भूमिका

सूत्रों की मानें तो, कुख्यात अमित सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर पेशी के लिए देवघर लाया गया था लेकिन, बेऊर जेल के जेलर ने पटना के स्थानीय अदालत से उसके डिपार्चर की परिमिशन नहीं ली थी। इस बाबत खुलासा होने के साथ ही जेलर की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई। सवाल ये खड़ा हो गया कि आखिर किन परिस्थितियों में कुख्यात को बगैर कैदी वाहन या रेल मार्ग से पेशी के लिए रवाना किया गया। मामले की जांच के दौरान ऐसे कई हैरान कर देने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। अमित सिंह की कोर्ट परिसर में हत्या साथ आए सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही का ही नतीजा रहा है।

पुलिस के ब्लडर्स और सिर्फ ब्लडर्स 

जांच ज्यो ज्यो आगे बढ़ रही है बेउर जेल और बिहार पुलिस के घातक ब्लंडर्स और सिर्फ ब्लंडर्स की पोल पट्टी खुल रही है। लगातार सवाल उठ रहे है कि आखिर क्यों? और किन परिस्थितियों में कुख्यात को बगैर कैदी वाहन या रेल मार्ग से पेशी के लिए रवाना किया गया? आखिर क्यों अमित को ख़ाकीवाले इतना प्रिफरेंस देते थे। आख़िर क्यो वही दस्ता और पदाधिकारी अमित को देवघर लेकर जाते थे? सवाल दर सवाल ने बिहार पुलिस को बैंकफुट पर धकेल दिया है।

सिपाही व माणिक का गुर्गा सोनू थे संपर्क में

देवघर पुलिस ने शुरू से शक के दायरे में रहे सिपाही ताबिश के दो मोबाइल का जब CDR निकाला तो पता चला कि वो लगातार एक पटना के बिहटा इलाके के एक शख्स जिसका नंबर 7***3**** है से लगातार संपर्क में था। उक्त नंबर के बाबत जब पूछा गया तो ताबिश इधर उधर घुमाने लगा पर जब देवघर एसपी ने अपना रौद्र रूप दिखाया और पुलिसिया स्वरूप अपनाया तो ताबिश खा तोते की तरह बोल पड़ा और देवघर कोर्ट परिसर में टपका दिए गए अपराधी अमित सिंह के सनसनीखेज़ हत्याकांड के साजिश से पर्दा उठ गया।

             दरअसल, ताबिश खाँ सोनू नामक एक युवक से लगातार संपर्क में था। माणिक के रिश्ते में भाई लगता है। सोनू मूल रूप से बिहटा के मसौढ़ा गाँव का रहने वाला है। यह अपराधी प्रवृति का युवक है जो इसी महीने के पहले सप्ताह में आर्म्स एक्ट के मामले में बेउर जेल से जमानत पर बाहर निकला था। जेल में यह माणिक के साथ वार्ड पाँच (5) बाइस (22) में रहता था। यह बाप-बेटा गिरोह यानी मनोज-माणिक गैंग का सक्रिय गुर्गा है। पुलिस इसे पकड़े ख़ातिर ताबड़तोड़ छापेमारी में जुटी है।

बाप बेटे की साज़िश और मारा गया अमित

File Pic

              खाकी के खलनायकों की गिरफ़्तारी ने झारखंड के देवघर में टपकाए गए सजायाफ्ता अमित सिंह हत्याकाण्ड की साज़िश का पर्दाफाश कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार बेउर जेल में बंद अपराधी बेटे माणिक ने साज़िश रची और लंबे समय से फरार कुख्यात अपराधी बाप मनोज सिंह ने बाहर शूटरों का इंतज़ाम कर काण्ड को अंज़ाम दिलवाया है। वही सूत्रों का दावा है कि 16 जून से लेकर 17 जून के दोपहर तक कुख्यात मनोज सिंह देवघर में ही मौजूद था। फिर वो रांची के लिए निकल गया था। वही सूत्रों का दावा है कि अमित के देवघर पहुचने से पहले 17 तरीख को ही सोनू सुबह सबेरे सोनू वहाँ पहुच गया था।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय अपराध की दुनिया मे सक्रिय मनोज सिंह का झारखंड में लंबा चौड़ा नेटवर्क रहा है। बता दे कि मनोज सिंह का अपराधी बेटा माणिक जो वर्त्तमान में बेउर जेल में निरुद्ध है को लंबे प्रयास के बाद एसटीएफ ने झारखंड के ही हजारीबाग से गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्रों द्वारा बताया जाता है कि जब एसटीएफ ने माणिक सिंह को दबोचा था तो शातिर मनोज सिंह भी उक्त स्थान पर मौजूद था पर चकमा देकर फरार हो गया था। सूत्रों का दावा है कि देवघर में अमित की पेशी से पहले पहुचे मनोज सिंह ने शूटरों को हॉयर किया और सबकुछ सेट कर शहर से निकल गया। तामम खुलासे के बाद अब एक बार फिर से पुलिस जोर शोर से मनोज सिंह की तलाश जुट गई है।

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