जेडीयू की चेतावनी के बीच सारी नजरें शरद पर,राजद की रैली में हिस्सा लेने शरद पहुंचे पटना,पार्टी से निष्कासन संभव

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पटना Live डेस्क.  सूबे की राजनीतिक हलकों में दो चीजें बिल्कुल साफ नजर आ रही हैं. पहली चीज है शरद यादव का जेडीयू के चेतावनियों के बाद भी लालू प्रसाद की रैली में शामिल होना..वहीं दूसरी चीज जेडीयू को लालू की रैली में हिस्सा ले रहे शरद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना..शरद भी रैली में शामिल होने को लेकर पटना पहुंच चुके हैं और खुलेआम राजद के पक्ष में बयान दे रहे हैं जबकि जेडीयू ने भी पटना आने से पहले शरद को चिट्ठी भेजकर अपने पाले से गेंद शरद के पाले में फेंक दी थी..चेतावनी के तौर पर के सी त्यागी के लिखे पत्र में यह अनुरोध किया गया था कि शरद किसी भी हाल में लालू की रैली में शामिल न हों..लेकिन शरद भी अपनी बातों पर अटल हैं.. और दूसरी तरफ जेडीयू भी अपनी बातों पर अटल है..इसलिए संभवतया रविवार को लालू अपनी रैली कर समर्थकों से पार्टी को मजबूत करने की तैयारियों में लगने को अपील करेंगे तो वहीं रैली के बाद शायद शरद यादव को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. जनता दल यूनाइटेड ने यूं तो अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से आग्रह किया है कि वो आगामी रविवार को आयोजित राष्ट्रीय जनता दल की रैली में भाग ना लें लेकिन पार्टी का एक तबक़ा चाहता है कि शरद यादव भाग लें और नीतीश कुमार को निशाने पर रखकर जमकर भाषण दें.

जनता दल यूनाइटेड के कई ऐसे नेता हैं जिनका मानना है कि शरद यादव ने यदि राजद की रैली में हिस्सा लिया और भाषण दिया तब उनकी सदस्यता रद्द कराने का उनके पास पुख़्ता आधार होगा. हालांकि अभी भी उनके पास ‘साझा विरासत’ और ‘जन अदालत’ के बैनर तले शरद के भाषण हैं जिसमें नीतीश मुर्दाबाद के नारे लगाए गए.

दरअसल पार्टी शरद यादव को निलंबित नहीं करना चाहती क्योंकि तब पार्टी को उनकी सदस्यता रद करने के लिए हर बार राज्य सभा में व्हिप के उल्लंघन का इंतजार करना होगा और बर्खास्त कर देने से शरद अपनी राह चलने को स्वतंत्र होंगे. पार्टी की पुरज़ोर कोशिश है कि जब शरद ने भी नीतीश के साथ नहीं रहने का मन बना लिया है तब उनकी सदस्यता रद करके उनसे पूरा नाता रिश्‍ता खत्‍म किया जाए.

संविधान के 10वीं अनुसूची के क्‍लॉज 2 में इस बात की विस्तार से चर्चा है कि किसी सदन के सदस्य की सदस्यता सदन के बाहर उनके पार्टी विरोधी आचरण के कारण जा सकती है. इस आधार पर भाजपा के बिहार से राज्यसभा सांसद जय नारायण निषाद, जनता दल यूनाइटेड के उपेंद्र कुशवाहा और बिहार विधान परिषद के कई सदस्यों की सदस्यता जा चुकी है.