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सीएम नीतीश की विधानपरिषद की सदस्यता मामले पर SC में सुनवाई,कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस,दो हफ्तों में मांगा जवाब

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पटना Live डेस्क. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधानपरिषद की सदस्यता से अयोग्य करार किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है…साथ ही कोर्ट ने दो हफ्तों में जवाब मांगा है…सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में नीतीश कुमार की विधानपरिषद की सदस्यता पर सवाल उठाए गए हैं…वकील एमएल शर्मा की दायर याचिका में यह कहा गया है कि नीतीश कुमार ने चुनाव के दौरान साल 2004 और 2012 में दिए शपथ पत्र में यह नहीं बताया कि 1991 में हुए एक मर्डर को लेकर दर्ज एफआईआर में उनका भी नाम है…नीतीश कुमार ने यह जानकारी अपने शपथ पत्र में नहीं दी है… याचिका में यह भी कहा गया है कि नीतीश कुमार अपने संवैधानिक पद पर नही रह सकते क्योंकि नीतीश कुमार ने अपने दिए हलफनामे में साक्ष्य को छुपाया है. साथ ही नीतीश कुमार के खिलाफ मर्डर केस की जांच में तेजी लाई जाए.
याचिका में आगे दावा किया गया कि नीतीश ने अपने कार्यकाल की संवैधानिक ताकत के चलते 1991 के बाद से ही गैर जमानती अपराध में जमानत तक नहीं ली. साथ ही 17 साल बाद मामले में पुलिस से क्लोजर रिपोर्ट भी फाइल करवा ली. सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ जांच का आदेश देने की मांग भी याचिका में की गई है.

वकील ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस तरह का आदेश जारी करे कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज है तो वह किसी भी संवैधानिक पद पर ना बैठ पाए.

 

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