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दुष्कर्म की शिकार महिला ने तोड़ा दम,छोड़े ढेरों सवाल, HIV पीड़ित महिला ने गर्भपात के लिए सुप्रीम कोर्ट से लगायी थी गुहार

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पटना Live डेस्क. हैवानों की दरिंदगी की शिकार इस महिला की आखिरकार मौत हो गई..कई महीनों तक कानूनी दांव-पेचों में उलझी इस महिला की जिंदगी ने आखिरकार इसका साथ छोड़ दिया..और छोड़ गया ढेरों सवाल…इस महिला को दरिंदों ने कई बार दुष्कर्म का शिकार बनाया… एचआईवी पीड़ित यह महिला जब गर्भवती हो गई तो इसने अजन्मे बच्चे को इस खतरनाक बीमारी से बचाने की खातिर गर्भपात के लिए पटना हाईकोर्ट से इजाजत मांगी… हाईकोर्ट ने महिला की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद यह फैसला किया कि गर्भ के इस चरण में महिला का गर्भपात कराना उसकी जिंदगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है..और राज्य सरकार का यह दायित्व है कि उसके बच्चे को सुरक्षित रखा जाए…हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की इजाजत देने की गुहार लगायी..महिला की तरफ से वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से यह गुहार लगायी कि महिला का एम्स के डॉक्टरों की एक टीम द्वारा स्वास्थ्य की जांच करायी जाए..महिला की इस दलील को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और उसकी जांच एम्स के डॉक्टरों से करवाने की हामी भर दी…सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एम्स के विशेषज्ञों की टीम ने महिला के स्वास्थ्य का परीक्षण किया और कहा कि इस समय महिला का गर्भपात उसकी जान को खतरे में डाल सकता है…एम्स की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महिला को गर्भपात करने की इजाजत नहीं दी…सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद महिला की वकील ने सुप्रीम कोर्ट से उसे पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में शिफ्ट करने की इजाजत मांगी..साथ ही उन्होंने एम्स की चिकित्सा के आधार पर ही इलाज करने की मांग की जिससे बच्चे को एचआईवी संक्रमण से बचाया जा सके…दीपक मिश्रा की बेंच ने महिला की मांग को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया था की महिला का इलाज एम्स के डॉक्टरों द्वारा सुझाए इलाज की तरह ही हो.. जिससे उसकी हालत ज्यादा खराब न हो…साथ ही बेंच बिहार सरकार को महिला को मुआवजे के तौर पर तीन लाख रुपए देने का भी निर्दश दिया था…

 

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