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BiG News-दरिंदगी का चरम दिनदहाडे बिहार पुलिस के ASI की लोहे की रॉड से हत्या,फिर रच डाली सड़क दुर्घटना साज़िश

हत्यारे पंक्चरवाले ने पुलिसकर्मी की हत्या कर दी और फिर अपना अपराध छुपाने खातिर शव को घसीट कर सड़क के दूसरी तरफ रख दिया और बाइक को आड़े तिरछे रख दुर्घटना में मौत होने की  रची साज़िश लेकिन थानेदार नीरज तिवारी ने महज कुछ घंटों में सच ढूढ लिया और गिरफ्तारियां कर लीया

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पटना Live डेस्क। उत्तर प्रदेश के कानपुर में 2-3 जुलाई की दरमियानी रात डीएसपी समेत 8 पुलिस वालो की नृशस हत्या का मामला अभी ठंडा भी नही हुआ था कि बिहार में एक पुुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई। दरअसल बिहार पुलिस के सहायक दरोगा की दिनदहाडे सरेआम महज 5 रुपये के विवाद में लोहे के रॉड से पीट कर नृशस हत्या से कोहराम मच गया। पुलिसकर्मी की हत्या की यह वारदात बिहार के बांका जिले की है। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में सनसनी फैल गई। 

                      दरअसल, शुरुआत में बिहार पुलिस अपने ASI की मौत दुर्घटना में हुई मान रही थी। मामला बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र के नारिपा मोड़ का है। यहां पर गुरुवार को पुलिस कर्मी चंद्रशेखर झा ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए बाइक से आरा जा रहे थे। लेकिन इसी बीच पुलिस को नारिपा मोड़ के पास उनकी लाश मिली। उनकी मौत की खबर इलाके के ही एक बाइक मिस्त्री सह पंचरवाले रितेश यादव ने दी थी।

                     मिली जानकारी के अनुसार बांका जिले में गुरुवार को सिर्फ ₹5 के विवाद में बिहार पुलिस के ASI की आयरन रॉड से मार मारकर हत्या कर दी गई। यह बेहद दुःसाहसिक हत्या जिले के रजौन थाना क्षेत्र की है। रजौन थाना क्षेत्र के खैरा मिर्जापुर गांव निवासी चंद्रशेखर झा बिहार पुलिस में सहायक दारोगा थे। पूर्व में मक़तूल रोहतास जिले में तैनात थे।लेकिन विगत दिनों ही एएसआई चंद्रशेखर का तबादला भोजपुर (आरा) जिला बल में कर दिया गया था। आरा जिले में तबादला किए जाने के बाद आरक्षी चंद्रशेखर झा वहां रहने लायक कुछ इंतजाम न होने तक परिवार को घर पहुंचाने अपने गांव आए हुए थे।

परिजनों को गाँव पहुचाकर गुरुवार को चंद्रशेखर ड्यूटी ज्वाइन करने हेतु आरा लौट रहे थे। उन्हें भागलपुर से गाड़ी पकड़नी थी,तो अपने गांव से बाइक से भागलपुर के लिए निकले थे।भागलपुर जाने के दौरान रजौन के नरीपा मोड़ के समीप उनकी बाइक का पिछला पहिया पंचर हो गया। पंचर बनवाने खातिर सड़क किनारे स्थित एक पंक्चर दुकान पहुचे और मिस्त्री से पंचर बनाने को कहा। वारदात के बाबत बताया गया है कि पंक्चर मिस्त्री से उनकी पांच रुपये मजदूरी ज्यादा माँगने को लेकर बहसबाजी हो गई। 5 रुपये ज्यादा लेनदेन को लेकर विवाद बढ़ता ही चला गया।

लोहे की रॉड से किया सर पर कई वार

प्रतीकात्मक

महज 5 रुपये खातिर विवाद इतना बढ़ गया कि बढ़ते विवाद के बीच अचानक मिस्त्री रमेश ने उनपर टायर खोलने वाले लोहे के रॉड से हमला कर दिया। हत्या आरोपी पंचरवाले ने रॉड से उठाकर मक़तूल पुलिस जवान पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। सिर पर रॉड मारे जाने से चंद्रशेखर झा वही जमीन पर गिर पड़े और संभवतः वही उनकी मौत हो गई।

हत्या को दुर्घटना साबित करने की साज़िश

लोहे के रॉड से वार कर ख़ाकीवाले की हत्या करने के बाद शातिर पंचारवाले ने अपना जुर्म छुपाने खातिर इस घटना को दुर्घटना का रूप देने के कवायद कर डाली। शव को घसीट कर सड़क के दूसरी ओर पहुंचा दिया और बाइक को शव के समीप सड़क पर बेतरतीब लिटा दिया। ताकि लोगों को उनके एक्सीडेंट होने का भ्रम हो। इस शातिराना साज़िश को पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद पंक्चर मिस्त्री एवं उसकी भाभी ने खुद पुलिस के पदाधिकारियों के समक्ष न केवल कुबुल किया बल्कि अपने बयान में उक्त कवायद को कैसे अंजाम दिया तफ्सील बताया भी।

दुर्घटना साबित करने हो गया था सफल

उल्लेखनीय है कि सुबह आरोपी हत्यारे रितेश ने सड़क पर शव मिलने की सूचना स्थानिए थाने को मोबाइल से दिया था। मिली जानकारी पर पहुची पेट्रोलिंग दस्ते ने भी प्रथम दृष्टया इस मामले की जानकारी मिलने पर पहुची स्थानिए थाना पुलिस ने इस मामले को एक्सीडेंट का केस मानते हुए, पंचरवाले की जानकारी पर ही सच की मुहर लगाते हुए दुर्घटना का ही मामला दर्ज किया था।

ऐसे हुआ हत्या का खुलासा

थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने पर रजौन थानाध्यक्ष नीरज तिवारी भी एक्सीडेंट के इस कथित मामले की जांच में वारदात स्थल पर पहुचे। घटनास्थल के मुआयने और शव की जामा तलाशी के दौरान थानेदार को सिर पर चोट के निशान की वजह से शक हो गया था। तदुपरान्त पुलिसकर्मी शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम खातिर पंचनामा करा कर भिजवाने के बाद थानेदार नीरज ने अपने मुखबिर नेटवर्क के ज़रिए कथित दुर्घटना के बाबत जानकारी लेनी आरम्भ की तो चंद घंटे में ही युवा थानेदार का शक सही साबित हो गया।

दरअसल, यह ममला दुर्घटना नही हत्या का था। थानेदार ने इस सच से वरीय अधिकारियों को भी अवगत कराया और मामले का खुलासा कर दिया। मामले में हत्या की बात सामने आते ही पुलिस ने पंक्चर मिस्त्री पर दबिश बनाई और उसे हिरासत में ले लिया। साथ ही रितेश की भाभी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में दोनों ने पुलिस वालों को काफी देर तक बरगलाने की तमाम कोशिशें की पर जैसे ही पुलिस ने अपना असली चेहरा दिखाया, दोनों ने पुलिस के समक्ष आरक्षी चंद्रशेखर झा की हत्या की बात स्वीकार करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी।

 

उनकी स्वीकारोक्ति के आधार पर रेड करते हुए पुलिस ने उस लोहे के रॉड को भी बरामद कर लिया जिससे ASI की हत्या की गई थी। तदुपरांत दुर्घटना का यह मामला मृतक पुलिसवाले कि पत्नी के बयान पर हत्या का दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी मैकेनिक रितेश यादव और उसकी भाभी को गिरफ्तार कर लिया।

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