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कौन हैं? 17 दलों की संयुक्त राष्‍ट्रपति पद की विपक्ष की उम्‍मीदवार मीरा कुमार..जानिए पूरा सच

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पटना Live डेस्क। चुनाव आयोग राष्ट्रपति चुनाव का नोटिफिकेशन जारी कर चुका है।17 जुलाई को चुनाव होगा। राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है।इसके लिए 28 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

                                 आखिरकार राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के चयन के लिए गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 17 विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में फैसला किया गया कि मीरा कुमार राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की साझा उम्मीदवार होंगी। उनके नाम का प्रस्ताव एनसीपी चीफ शरद पवार ने रखा।इसके बाद राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए द्वारा रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब विपक्ष ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार विपक्ष की उम्मीदवार होंगी। उनके नाम का ऐलान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया।

17 जुलाई को कॉंग्रेस नित 17 दलों की उम्मीदवार मीरा कुमार

कॉंग्रेस के नेतृत्व में राष्‍ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्‍यक्ष मीरा कुमार को अपना साझा उम्‍मीदवार बनाया है। जब भी मीरा कुमार का राजनीति में नाम आता है, तो उनके साथ पिता जगजीवन राम का भी नाम आता है। पिता जगजीवन राम भारत में दलित राजनीति का कद्दावर चेहरा रहे हैं। जगजीवन राम 1977 से 1979 तक रक्षा मंत्री और 1979 में उप प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। उनकी माँ इन्द्राणी देवी एक स्वतन्त्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। मीरा कुमार विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं।बिहार के सासाराम से जीतने वाली मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है।


बिहार के भोजपुर जिले 31 मार्च 1945
जन्मी मीरा कुमार कॉन्वेन्ट एडुकेटेड हैं। उनकी शिक्षा दीक्षा देहरादून, जयपुर और दिल्ली में हुई है। मीरा कुमार दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और बेहद प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस से एमए और एलएलबी किया है। मीरा कुमार ने कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज व मिरांडा हाउस से की। मीरा कुमार कानून में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। इसके अलावा उनके पास स्पैनिश भाषा में एडवांस्ड डिप्लोमा भी है।
1973 में मीरा कुमार ने भारतीय विदेश सेवा उत्तीर्ण की। उन्होंने आईएफएस के रूप में 1976-77 तक भारत व मैड्रिड में और 1977-79 तक लंदन के भारतीय उच्चायुक्त विभाग में काम किया। 1980-85 तक उन्होंने विदेशी मामलों के मंत्रालय में भी काम किया है। लगभग एक दशक तक मीरा कुमार ने आईएफएस की नौकरीकी। इसके बाद पिता जगजीवन राम और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कहने पर वह राजनीति में आईं।
उत्तर प्रदेश से अपने सियासी सफर की शुरुआत की मीरा कुमार ने अपने पहले चुनाव में सन 1985 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव वर्तमान दौर के दलित राजनीति केे धुरंधर मायावती, रामविलास पासवान जैसे सियासी दिग्गजों को धूल चटकार दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए पहली बार संसद में कदम रखा।हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में वह बिजनौर से हार गईं।इसके बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला और 11वीं तथा 12वीं लोकसभा के चुनाव में वह दिल्ली के करोलबाग संसदीय क्षेत्र से विजयी होकर फिर संसद पहुंचीं। 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें करोलबाग सीट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मीरा कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने अपने राज्य बिहार के सासाराम जा पहुंचीं। उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट बिहार के सासाराम से वर्ष 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। अब तक के सियासी सफर में मीरा ने 2004 से 2009 तक कानून मंत्रालय सँभाला और 2009 में कुछ समय तक वह जल मंत्री भी रहीं। स्पीकर बनने से तीन दिन पहले ही उन्होंने अपने मंत्रालय से त्यागपत्र दे दिया था। 2009 से 2014 तक उन्होंने 15वीं लोकसभा में स्पीकर का कार्यभार सँभाला। उन्हें महिला स्पीकर के रूप में निर्विरोध चुना गया। हालांकि, 2014 के चुनाव में मीरा को सासाराम  से भी हार का सामना करना पड़ा।भारतीय जनता पार्टी के छेदी पासवान ने उन्हें 63,627 वोटों से हराया।

हाथ का साथ एक बार छोड़ भी चुकी हैं मीरा कुमार

मीरा कुमार ने 1991-92 में कांग्रेस महासचिव के रूप में काम किया। इसके बाद 1996 में फिर से उन्हें कांग्रेस महासचिव के रूप में सर्वसम्मति से चुना गया और फिर उन्होंने दोबारा 1999 तक महासचिव का पद सँभाला। 1991 से 2000 और 2002 से 2004 तक वह सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कमेटी, कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की कार्यकारी सदस्य भी रहीं। एक बार वह 2000 में कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा भी दे चुकी हैं। वह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाराज़ थीं। लेकिन 2004 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ फिर से थाम लिया।

व्यक्तिगत जीवन

बेहद विनम्र और शांत स्वभाव की मानी जाने वाली मीरा कुमार ने मंजुल कुमार से शादी की,जो पेशे से वकील है। सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं। मीरा कुमार एक बेटे व 2 बेटियों की माँ हैं। मीरा कुमार को भारतीय इतिहास के साथ-साथ कला एवं साहित्य से विशेष लगाव है। इसके अलावा भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, राइफल शूटिंग और अश्वारोहण में उनकी विशेष रुचि है।

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