बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

BiG News – ADG कुंदन कृष्णन बनाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के संयुक्त सचिव

बिहार के वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन गये केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में बने संयुक्त सचिव

344

पटना Live डेस्क।बिहार कैडर के बेहद चर्चित और ख्यातिनाम IPS अधिकारी व वर्त्तमान में सिविल डिफेंस के ए.डी.जी. सह अपर नागरिक सुरक्षा आयुक्त कुंदन कृष्णन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। अगले 3 वर्षों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की गई है। इस संबंध में मंगलवार को गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने अधिसूचना जारी कर दी।

                        इसमें कहा गया है कि ए.डी.जी. कुंदन कृष्णन को वर्तमान पद का प्रभार त्याग करने की तिथि से विरमित करते हुए उनकी सेवाएं गृह मंत्रालय को सौंपी जाती है। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में योगदान करके गृह विभाग को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

सख्त तेवर व क्राइम कंट्रोल की रही है पहचान 

1994 बैच के बिहार कैडर के आई.पी.एस. अफसर कुंदन कृष्णन की गिनती बिहार पुलिस के सुपर कॉ़प में होती है।खासकर अपराधियों के खिलाफ कड़क मिजाज, सख्त तेवर और क्राइम कंट्रोल के लिए उन्हें जाना जाता है। पटना के एसएसपी, आईजी (सेंट्रल रेंज),आईजी (ऑपरेशन) से लेकर एडीजी (मुख्यालय) तक वे अपनी काबलियत की छाप छोड़ चुके हैं। विशेषकर डेढ़ दशक पहले पटना में क्राइम कंट्रोल में तत्कालीन एसएसपी के रुप में कुंदन कृषणन की अहम भूमिका रही थी। एएसपी रहते ही तब उनकी बाहुबली आनंद मोहन से पटना जंक्शन पर भिंड़ंत भी सुर्खियों में रही थी।

नक्सलियों पर नकेल कसने में है महारत 

आईजी (ऑपरेशन) की जिम्मेवारी संभालने के बाद कुंदन कृष्णन ने नक्सलियों की नींद उड़ा रखी थी। आलम यह था कि गया जिले के चकरबंधा जंगल समेत कई जगहों पर उन्होंने नक्सलियों के गढ़ में एसटीएफ का कैंप खोल कर सीधे चुनौती दी थी। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर भी उनके प्रयासों को उस समय सराहना मिली थी जब बिहार में नक्सलियों के आधार क्षेत्र में काफी कमी आई थी। इस दौरान हुए मुठभेड़ में कई बड़े या इनामी नक्सली एसटीएफ की गोलियों का निशाना भी बने थे। एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगे सीआरपीएफ व एसएसबी के बिहार सेक्टर या हेडक्वार्टर के तत्कालीन आईजी ने भी आईजी (ऑपरेशन) के रुप में कुंदन की नक्सलियों के खिलाफ कामयाबी को सराहा था।

Comments are closed.