Super Exclusive-(खुलासा) बैंक ने DIG के 70 थानेदारों के तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने के फरमान की महज़ कुछ घंटे में उड़ाइ धज़्ज़िया क्रेडिट कर दी गई सैलरी

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कुलदीप भारद्वाज, मैनेजिंग एडिटर, पटना Live

पटना Live डेस्क। राजधानी पटना में गुरूवार को सेट्रल रेंज के डीआईजी राजेश कुमार ने पटना पुलिस प्रशासन में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 थानेदारों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया।खबर के साथ समाचार माध्यमो में फरमान की कॉपी भी प्रसारित की जाने लगी।वेतन बधित करने के लेटर के समाचार माध्यमो में प्रसारित होने के बाद से पटना ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पदस्थापित थानेदारों में हड़कंप मच गया। इस ख़बर को पटना Live द्वारा भी न केवल कवर किया गया बल्कि फरमान की कॉपी को भी ख़बर के साथ साझा किया गया। चुकी ख़बर बेहद बड़ी थी, कुल 70 थानेदारों का वेतन रोकने का फरमान जारी हुआ था। इस ख़बर पर पटना Live ने विशेष तौर पर नज़र बनाये रखा।चुकी महीने का आखरी दिन था।अमूमन सरकारी कर्मचारियों का वेतन उनके खातों क्रेडिट करने का दिन यही होता है। ताकि फरमान जारी होने और उसके सच की हक़ीक़त से पाठको को अवगत कराया जा सके साथ ही सरकारी महकमो के आपसी समन्वय को जांचना भी रहा।                            फरमान और हक़ीक़त                                  सेंट्रल रेंज के डीआईजी राजेश कुमार द्वारा 70 थानेदारों के वेतन रोकने संबंधित जो फ़रमान जारी किया उसका ज्ञापांक संख्या 3654 है,जारी करने की तारीख 30 नवम्बर अंकित है। साथ ही हस्ताक्षर के साथ तारीख भी उल्लेखित है। बिहार सरकार के विभिन्न महकमो में कर्मचारियों को सैलरी अमूमन महीने के आखरी दिन और विशेष प्रयोजनों में पूर्व निर्धारित तारीख को बैंकों के माध्यम से सैलरी एकाउंट में क्रेडिट कर दी जाती है।बिहार पुलिस कर्मियों को भी इसी परिपाटी के तहत बैंक के माध्यम से तमाम अधिकारियों और कर्मियों को उनकी सैलरी बैंक खातों में ट्रासफर कर दिया जाता है।अतः इसी परिपाटी के तहत डीआईजी के फरमान के बावजूद बैंक ने पटना जिला पुलिस बल के कर्मचारियों समेत उन थानेदारों की भी सैलरी निर्गत कर दी जिनकी सैलरी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फरमान जारी किया जा चुका था।
फरमान की उड़ी धज़्ज़िया                                                          पुलिस उप-महानिरीक्षक केंद्रीय क्षेत्र के फरमान से वेतन बधित करने के लेटर के समाचार माध्यमो में प्रसारित होने के बाद से पटना के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पदस्थापित थानेदारों में जो हड़कंप मच गया था,वो महज कुछ घंटों में ही न केवल काफूर हो गया क्योकि गुरुवार यानी 30 नवम्बर की रात तकरीबन 9 बजे के बाद से ही फरमान में उल्लेखित थानेदारों के चेहरे पर मुस्कान लौटनी उस वक्त शुरू हुई जब फोन बैंकिंग की सुविधा के अनुसार उनके खाते में सैलरी क्रेडिट होने वाले एसएमएस उनके फ़ोन स्क्रीन पर नज़र आने लगे।यानी पुलिस महकमे के एक बड़े अधिकारी के फरमान के उलट रात में ही बैंक द्वारा थानेदारों की सैलरी उनके बैंक एकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाने का सिलसिला शुरू हो गया।  कोर्डिनेशन की कमी या घोर लापरवाही                                          अब आप ही अन्दाज़ा लगाये की पुलिस के एक वरीय अधिकारी के कार्यालय यानी पुलिस उप-महानिरीक्षक के कार्यालय से ज्ञापांक जिसकी प्रतिलिपी तमाम कार्यालयों को प्रेषित की गई हो उसका हश्र जब ये है तो सरकारी महकमो में आमआदमी के आवेदनों और शिकायतों का क्या हाल होता होगा। ये अपने आप मे हरि कथा हरि कथा अनंता के तर्ज पर सरकारी कार्यालयों के सच को उजागर करने में सक्षम है।                        हैरान करने वाली हक़ीक़त                                                                       डीआईजी(सेंट्रल रेंज)राजेश कुमार के आदेश का महज कुछ घंटों के अंदर ही बैंक ने धज़्ज़िया उड़ाते हुए सभी की सैलरी उनके बैंक में क्रेडिट कर दिया। यानी कही न कही पुलिस महकमे, सैलरी निर्गत करने वाले टेबल और बैंक के बीच समन्वय की कमी का लाभ थानेदारों को मिला और उनकी सैलरी तत्काल प्रभाव से बधित होने के बाद भी उनके खाते में ट्रांसफर कर दी गई।तभी तो तत्काल प्रभाव से बधित करने के फरमान के उलट सब की सैलरी 30 नवम्बर की देर रात उनके बैंक एकाउंट में क्रेडिट कर दी गई है।                                  क्या था फरमान                                                                                      उल्लेखनीय है कि सूबे में कानून व्यवस्था में कोताही और पुलिसकर्मियों की लापरवाही को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जायेगा,इसी तर्ज पर वैसे पुलिसकर्मियों को दंडित किया जायेगा,जो अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतते हैं। इसी तर्ज पर पटना सेंट्रल रेंज के डीआइजी राजेश कुमार ने सुस्त और लापरवाह थानेदारों पर गाज गिराते हुए सबसे बड़ी कार्रवाई की। डीआइजी ने 70 थानाध्यक्षों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया। बताया जा रहा है कि इसमें सबसे ज्यादा पटना शहर और पटना ग्रामीण इलाके के थानेदार शामिल हैं।इस फैसले के बाद पटना ग्रामीण और शहरी इलाके में पदस्थापित पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया।जिन 70 थानेदारों के तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने वाले फरमान की लिस्ट..इसमें महिला थानाध्यक्ष,पुुनपुन,कादिरगंज और पिपरा भी शामिल है।

                 साथ ही डीआइजी राजेश कुमार ने थानेदारों के कार्य की सही तरीके से मॉनेटरिंग नहीं करने वाले डीएसपी स्तर के अधिकारियों पर भी गाज गिरायी है।राजेश कुमार ने ऐसे सभी 10 डीएसपी को शो कॉज नोटिस जारी किया है,जो अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के अंदर डीएसपी से कहा गया है कि वह अपना रिपोर्ट दें। खासकर शराबबंदी को लेकर बेहतर कार्य करने की बात कही गयी है राजेश कुमार ने यह कार्रवाई लापरवाही को लेकर की है। बताया जा रहा है कि डीआइजी को बहुत दिनों से यह रिपोर्ट मिल रही थी कि पटना ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के इलाकों में थानेदारों द्वारा अपने काम को सही तरीके से और समय पर अंजाम नहीं दिया जा रहा है।रिपोर्ट मिलने के बाद डीआइजी राजेश कुमार ने उसकी समीक्षा की और वेतन रोक कर कार्रवाई की है।

 

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