राष्ट्रपति के भाषण पर कांग्रेसी सदस्यों का राज्यसभा में हंगामा,जेटली से हुई तीखी नोंक झोंक

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पटना Live डेस्क.  नव निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ ग्रहण के बाद पढ़े गए भाषण को लेकर राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. कांग्रेसी सदस्यों ने उनके भाषण को दुर्भाग्यपूर्ण कहा जबकि आनंद शर्मा की इस मसले पर अरुण जेटली के साथ तीखी नोंक-झोंक हुई. अरुण जेटली ने कांग्रेसी सदस्यों के हंगामे पर सवाल उठाया और कहा कि राष्ट्रपति के भाषण पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. हो हंगामें के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी. दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को शपथग्रहण के तुरंत बाद अपने भाषण में राष्ट्रपिता महात्‍मा गांधी और दीनदयाल उपाध्‍याय का एक साथ ज़िक्र किया था, जिस पर कांग्रेस ने आपत्त‍ि जताई थी, और बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान किया है. आनंद शर्मा के इस आरोप का जवाब देने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली खड़े हुए और उसके बाद हंगामा शुरू हो गया.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथग्रहण के तुरंत बाद देश को संबोधित करते हुए कहा था, “हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा… एक ऐसा समाज, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय जी ने की थी… ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है… ये हमारे सपनों का भारत होगा… एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा… ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा…”

इसे लेकर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी का अपमान करने का आरोप लगाते हुए दीनदयाल उपाध्याय की महात्मा गांधी से तुलना करने को लेकर सवाल किया. उनके सवाल पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई सदस्य राष्ट्रपति के भाषण पर सवाल खड़ा करे. अरुण जेटली ने आनंद शर्मा के बयान को कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिसके बाद सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले भाषण में रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र निर्माता की अपनी परिभाषा कई उदाहरणों के ज़रिए समझाई थी. कोविंद ने अपने भाषण में देश के आठ नेताओं का ज़िक्र किया, और उनमें छह कांग्रेस के ही नेता थे, लेकिन पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का ज़िक्र नहीं होने पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया था.