Super Exclusive (वीडियो) पटना पुलिस के “पीपुल्स फ्रेंडली” चेहरे का सच देखिये, निर्दोष को जेल भेजने का खेल देखिये, अपने ही बिछाए जाल में फसे ..

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पटना Live डेस्क। बिहार के पुलिस नवनियुक्त मुखिया भी लगातार पुलिस को “पीपुल्स फ्रेंडली” बनने की बातें करते है। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त क्या है ये हर आम बिहारी को मालूम है।सूबे के थानों में बेरुखी,बदसलूकी, बदजुबानी और बेरहमी की दस्ताने हरि कथा हरि कथा अनन्ता की तरह है। इसी कड़ी में एक नए खुलासे ने पटना पुलिस के पीपुल्स फ्रेंडली चेहरे के दावो का जबरिया पहना गया नकाब न केवल नोच फेका है बल्कि क्रूरता और साजिशन जेल भेजने के षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश कर दिया है। इस खुलासे का खौफनाक पहलू ये है कि कोर्ट में पटना पुलिस का न केवल फर्जीवाड़ा बेनक़ाब हुआ बल्कि गवाहों ने ऐफिडेविट देकर पुलिस का रहा सहा कपड़ा भी नोच लिया है। इस पूरी साज़िश का सच अब पटना Live आपको बताने जा रहा है। साथ ही वो सुबूत भी आप से साझा करने जा रहा है।
बिहार पुलिस पब्लिक फ्रेंडली है मगर सच क्या है अब ये जानिए। यह घटना है राजधानी पटना जिले के नौबतपुर थाना का। जहाँ एक बेकसूर व्यक्ति को जबरदस्ती महज खाना पूर्ति के लिए और पुलिसिया रौब ग़ालिब करने को जेल भेज दिया गया था।
मामला है नौबतपुर थाने का जहां एक व्यक्ति को जबरदस्ती ठुकाई कर बयान उगलवा कर उसे जेल भेज दिया गया था। नौबतपुर थाना काण्ड संख्या 4/18 जो नौबतपुर थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हदसपुरा के समीप एक शीशम का हरा पेड़ काटने के जुर्म में एक युवक को जेल भेज दिया गया था। नौबतपुर पुलिस ने इस काण्ड में थाना के चौकीदार समेत दो सोन नहर के कर्मी को गवाह बनाई थी।पुलिस का कहना था कि उक्त तीनों गवाहों के आंखों देखा बयान दर्ज किया गया था,हालांकि बाद में जो नौबतपुर पुलिस की करतूत जो सामने उभर के आई वो पटना पुलिस के दामन को और काला करने का कारण बन गया है।
गौरतलब है कि थाना क्षेत्र के हदसपुरा निवासी सम्पत कुमार जो आरा मशीन चलाते है और पेड़ों का भी क्रय विक्रय करते है। इसी वर्ष बीते 3 जनवरी की रात नौबतपुर थाना क्षेत्र में दो अलग अलग जगहों पर दो व्यक्तियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अपराधियों को दबाव बढ़ा तो स्थानीय थाने ने सम्पत को उसी हत्या मामले में पूछताछ के लिए स्थानीय पुलिस उनके हदसपुरा स्थित घर से रात्रि के समय लेकर आई और फिर मारपीट करते हुए जबरन लकड़ी चोरी का आरोप लगा कर उन्हें जेल भेज दिया था। जिस लकड़ी चोरी का केस थाना के द्वारा बनाया गया था उसमें कुल तीन गवाह जिसमे एक नौबतपुर थाना क्षेत्र के श्रीवर गोपालपुर गांव निवासी चौकीदार छोटन गोप पिता-कामेश्वर गोप(चौकीदार नम्बर-6/5) सहित दो सोन नहर में कार्यरत मो.कलाम पिता मो.युनुस अंसारी ग्राम निसरपुरा लख एवम राम सुभाष सिंह पिता दीपू सिंह ग्राम बगोदर जिला गढ़वा निवासी कर्मी को गवाह बना कर सम्पत को जबरन जेल भेज दिया गया था।

ऐफिडेविट देकर दावो की उड़ाई धज़्ज़िया ल्लेखनीय है कि सभी तीनो गवाहों ने इस काण्ड में पुलिसिया दबिश के आगे नही झुकते हुए अपने होसो हवास में सम्पत पर लगे आरोप को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि शीशम का पेड़ जो सुखी पड़ी थी वह काफी दिनों से प्राथमिक विद्यालय हदसपुरा के समीप गिरी हुई थी।


वहीं चौकीदार ने अपने कोर्ट में दिए एफडीविट बयान में साफ कहा है कि मेरे बारे में जिस पेड़ को काटते देखने का एफआईआर में जो चर्चा किया गया है मैं अपने होशोहवास में स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि उस दिन मैं ड्यूटी में थाना में ही मौजूद था और कहीं थाना के बाहर उस रात को मैं नही गया था और ना ही किसी को वृक्ष काटते हुए देखा और नाही किसी को सूचना ही दिया हूँ।वहीं सम्पत ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि मेरे ऊपर थानेदार ने मारपीट करते हुए मुझसे ज़बरदस्ती जो गुनाह किया नही उसे करने को कुबूल करने का दबाव बना रहा था। मेरे लाख मना करने पर भी नही माना औऱ मुझे मारपीट कर जेल भेज दिया था। सुुुने सच

 जाहिर सी बात की अगर इन तीनो गवाहों इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर रहा है तो आखिर किसके इसारे पर इस एफआईआर को दर्ज किया गया और अगर एफआईआर दर्ज किया गया तो काण्ड दर्ज होने से पहले जांच क्यों नही हुई।।क्या पुलिस की यही पब्लिक फ्रेंडली है जो एक बेकसूर व्यक्ति को जेल भेज देती हो?तमाम बातें उभर कर सामने आ रही है।
अब देखना है कि बिहार पुलिस के मुखिया और पटना के एसएसपी इस खुलासे पर क्या रुख अख्तियार करते है?