बड़ी खबर – बिहार ने माटी का लाल तो झारखण्ड ने खोया अपराधियों और नक्सलियों के लिए ख़ौफ़ का दूसरा नाम बन चुके थे आईपीएस प्रवीण कुमार

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पटना Live डेस्क। बिहार की माटी के लाल झारखड कैडर के 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह का रविवार को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में शाम साढ़े पांच बजे निधन हो गया। वर्तमान में प्रवीण कुमार सेंट्रल डेपुटेशन के तहत दिल्ली में एनआईए के डीआईजी के पद पर तैनात थे। मिली जानकारी के अनुसार विगत दो सालों से प्रवीण ब्रेन डिज़ीज़ से गंभीर रूप से पीड़ित थे। रविवार शाम 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रवीण सिंह झारखंड के चाईबासा हजारीबाग और रांची जैसे शहरों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम कर चुके थे। रांची के एसएसपी और डीआईजी रह चुके हैं।
मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के निवासी प्रवीण झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ बेहद सफल कार्रवाई करने के लिए भी जाने जाते हैं।साथ ही साथ झारखंड की राजधानी रांची में उस दौर में पनपते अपराधी गिरोहों के तमाम बड़े शूटर्स और गैंग लार्ड को धराशायी कर न केवल अपराधियों की कमर तोड़ दी बल्कि माफिया को पनपने नही दिया। प्रवीण सिंह पिछले दो साल से सेंट्रल डेपुटेशन पर दिल्ली में थे।  

बतौर SSP रांची प्रवीण सिंह ने तीन मौकों पर रांची को दंगे की आग में जलने से बचाया। इन कारणों से उनके विरोधी भी उनकी तारीफ करते थे। निधन की सूचना पाकर प्रवीण सिंह के परिवार में मातम पसर गया। वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रवीण सिंह के निधन पर शोक जताया है।सीएम रघुवर दास ने कहा कि इस दुख की घड़ी में उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
मिल रही जानकारी के मुताबिक प्रवीण कुमार सिंह कुछ अरसा पहले विदेश गए थे। जहां उनके भोजन में कोई कीड़ा चला गया था। जिसे खाने के बाद वे बीमार पड़ गए। खाने में मिला कीडे ने उनके ब्रेन को प्रभावित कर दिया। इस बीमारी से जूझ रहे प्रवीण इलाज के लिए अमेरिका तक गए। लेकिन वहां भी उनकी बीमारी में सुधार नहीं हो सका। जिसके बाद वे दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हुए। जहां उनके मस्तिस्क का आकर लगातार बढ़ने लगा। लम्बे समय तक बीमारी से जूझ रहे प्रवीण ने दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल रविवार को दम तोड़ दिया।

नक्सलियों-अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम.         

1998 बैच के आईपीएस प्रवीण कुमार सिंह एक दबंग पुलिस अधिकारी माने जाते थे। जिस शहर में उनकी पोस्टिंग रही वहां से अपराधियों का सफाया तय माना जाता था। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में उनकी कोई सानी नहीं थी। अपने कुशल रणनीति के लिए वे पूरे पुलिस महकमे में जाने जाते थे। रांची को नक्सलियों से मुक्ति दिलाने में प्रवीण कुमार सिंह का सबसे बड़ा योगदान था। कुख्यात कुंदन पाहन सहित कई बड़े नक्सली प्रवीण सिंह के कार्यकाल के दौरान भूमिगत हो गए थे।

आईपीएस प्रवीण सिंह की छवि रॉबिन हुड की जैसे थी। उनके कनीय अधिकारी कहते थे कि उनके दरवाजे से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लौटा। रात के 12 बजे तक भी लोगों की समस्याएं वो सुनते थे और उसे सुलझाते थे।

व्यक्तिगत ज़िन्दगी

आईपीएस प्रवीण कुमार सिंह की शादी यूूपी के एक दिन केेे CM रहे भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल की छोटी बेटी पूजा पाल सिंह के साथ हुई थी। प्रवीण सिंह के दो बेटे हैं। IPS प्रवीण सिंह के असमय देहान्त से पूरा पुलिस महकमा सदमे में है।

बेहद जहीन और पढ़ाई लिखाई के शौकीन

आईपीएस प्रवीण सिंह को पढ़ाई लिखाई का काफी शौक था। रांची डीआईजी रहते हुए भी उन्होंने आईआईएम रांची से मैनेजमेंट की डिग्री ली। वह जमशेदपुर एनआईटी से ग्रेजुएट थे।

एक समय था जब रांची जिला में नक्सली कुंदन पाहन का आतंक थ। रांची-टाटा रोड में कई बड़ी घटनाओं को नक्सलियों ने अंजाम दिया था। हालात इतने खराब हो गये थे कि अगर किसी अधिकारी को रांची से जमशेदपुर जाना होता था, तब नामकुम से लेकर चांडिल तक फोर्स की तैनाती करनी पड़ती थी। तब सरकार ने उन्हें रांची का एसएसपी बनाया।जिसके कुछ दिनों बाद उनके नेतृत्व में पुलिस ने कुंदन पाहन और उसके दस्ते को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था।