शर्मनाक!अस्पताल प्रबंधन ने नहीं मुहैया कराया एंबुलेंस तो मृत बेटे की लाश को कंधे पर लादकर चल पड़ा पिता!

पटना Live डेस्क. राजधानी पटना का आइजीआइएमएस अस्पताल. कहने को तो राज्य का बड़ा और प्रतिष्ठित अस्पताल. जहां लोग इस भरोसे से आते हैं कि चलो यहां आकर अच्छे डॉक्टरों से इलाज होगा और जल्दी ही स्वस्थ होकर घर लौट जाएंगे. लेकिन ये सब बातें महज कहने के लिए हैं. इस अस्पताल की हकीकत जानकर आप चौंक जाएंगे. पटना के बड़े अस्‍पताल में शामिल आइजीआइएमएस के आरसीसी वार्ड नंबर तीन में भर्ती एक लड़के की कैंसर के कारण मौत हो गई. मौत के बाद जब शव को ले जाने के लिए किसी तरह की सहायता उपलब्‍ध नहीं करवायी गई तो, पिता ने अपने कलेजे पर पत्‍थर रखकर पुत्र के शव को कंधे पर उठाकर ले गया. पीछे-पीछे उसकी पत्नी चलती रही।

ये हकीकत है उस अस्पताल की, जिसका मरीजों की सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट बनाया जाता है. इस अस्पताल में अगर आपके पास उस स्तर की पैरवी नहीं है तो यहां आपको पूछने वाला कोई नहीं है. हां अगर आपके पास राजनीतिक रसूख है तो आपको सारी सुविधाएं मिल सकती हैं. मतलब है कि बीमार मरीजों की जिंदगी भी पहुंच के आधार पर तय की जाती है. डॉक्टरों की मनमानी ऐसी की आप चाहकर भी इनके पास आसानी से नहीं जा सकते. अस्पताल प्रशासन ऐसा की आपकी लाख शिकायतों के बाद भी ये कोई न कोई बहाना बनाकर अपनी कमियों को ढंक देंगे. इलाज तो इलाज यहां अगर कोई मरीज मर जाए तो उसे यह अस्पताल बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा पाता. राजधानी पटना के सटे रामपुर डुमरा इलाके का एक बच्चा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के चलते यहां भर्ती होता है. कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो जाती है, लेकिन मौत के बाद भी अस्पताल बच्चे के पिता को एक एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवा पाता. लाख कहने के बाद भी अस्पताल प्रशासन बच्चे की पिता की बातों को अनसुना कर देता है आखिरकार थक हारकर मजबूर पिता अपने मृत बच्चे को कंधे पर ही लादकर घर की ओर रवाना हो जाता है. ये हकीकत है पटना के इस प्रतिष्ठित अस्पताल की. ये तो थी प्रशासनिक विफलता की कहानी अब जरा गंभीर रुप से बीमार इस बच्चे की इलाज की कहानी जानिए. इलाज में कोताही की कहानी जब आप इस बच्चे के परिजनों से सुनेंगे तो आपका कलेजा भी मुंह का आ जाएगा. मृतक के पिता की मानें तो अस्पताल में उनके बच्चे के इलाज में घोर लापरवाही बरती,उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में न तो ठीक से इलाज किया जाता है और न ही समय पर मरीजों को दवाइयां दी जाती हैं. रात में डॉक्टर अपने कमरे में आराम फरमाते हैं और जब मरीज के परिजन उनसे मिलने जाता है तो उसे नर्स के पास भेज दिया जाता है. नर्स परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करती हैं. मरीज की हालत कितनी भी खराब हो जाए, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं रहता.दवा लिखवाने के लिए मरीज के परिजनों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है.

हालांकि मृत बच्चे की लाश को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिलने की बात को अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. इस मामले पर आइजीआइएमएस निदेशक ने कहा कि यह बेहद ही गंभीर मामला है. इसकी जांच की जायेगी और दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी.