संसद का मॉनसून सत्र:सरकार को घेरने के लिए बेताब विपक्ष,सरकार ने भी कसी कमर

पटना Live डेस्क. संसद का मॉनसून सत्र शुरु हो चुका है लेकिन ये सत्र भी और सत्रों की तरह सरकार की परीक्षा लेगा. विपक्ष ने अपनी तरफ से सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है. विपक्ष के पास मुद्दे भी हैं. मध्यप्रदेश में किसानों की हिंसा, लगातार किसानों द्वारा की जा रही खुदकुशी, कश्मीर में आतंकी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी,देश में गौरक्षा के नाम पर की जा रही गुंडागर्दी ये सारे ऐसे मुद्दे हैं जहां विपक्ष सरकार को घेरेगा और ठोस जवाब चाहेगा. हालांकि सत्र से एक दिन पहले पीएम ने आयोजित सर्वदलीय बैठक में इस बात जोर दिया कि गौरक्ष के नाम पर किसी को हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती,लेकिन विपक्ष पीएम की बात से संतुष्ट नहीं है और इसे महज बयानबाजी बताकर इसका विरोध कर रहा है. दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय फ्रंट पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने का पूरा प्लान तैयार किया है. भूटान सीमा पर चीन की तरफ से डोकलाम इलाके में कार्रवाई और चीनी धौंस को लेकर निश्चित ही सवाल उठेंगे. हालांकि भारतीय सेना ने चीनी धौंस को धता बताते हुए उसी जगह अपने भी टेंट गाड़ लिए हैं और पीछे हटने से इनकार कर दिया  है, लेकिन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच विपक्ष सरकार से तो सवाल पूछेगा ही.

संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष की तरकश में ढेरों ऐसे तीर हैं जिसके दम पर वो सरकार को कटघड़े में खड़ा करने की पूरी कोशिश करेगा. कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकियों का हमला सरकार की गले की हड्डी बना हुआ है.राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का कहना है कि कांग्रेस पार्टी सुरक्षा के मुद्दों को खासकर कश्मीर, किसानों, गोरक्षकों के हमले और चीनी घुसपैठ के मामले को पूरी जोर शोर से उठाएगी. विपक्ष के रुख से साफ है कि वो इस सत्र में सरकार पर हमलावर रहेगा और आंतरिक और बाहरी मोर्च पर घेरने की पूरी कोशिश करेगा.

उधर सरकार की इस सत्र में 16 बिल पास कराने की तैयारी है. मौजूदा सत्र में जीएसटी बिल,नागरिकता संशोधन जैसे बिल पास कराए जाने हैं. राष्ट्रपति चुनाव के मामले पर भी ये जानते हुए कि रामनाथ कोविंद के पास बहुमत है और वो चुनाव जीत जाएंगे विपक्ष ने सर्वसम्मति के बजाए अपना उम्मीदवार दिया. सोनिया गांधी ने साफ कहा कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष के पास बहुमत नहीं है,लेकिन ये लड़ाई सत्ता पक्ष को घेरने के लिए लड़ी जा रही है. एक तरह से कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने ये साफ कर दिया है कि वो समझौतावादी रवैया नहीं अपनाएगी और इसका असर संसद की मॉनसून सत्र में जरुर देखने को मिलेगा.