झगड़ा राजद और जेडीयू का,सदमे में कांग्रेस!

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पटना लाइव डेस्क. महागठबंधन सरकार में तेजस्वी के इस्तीफे को लेकर झगड़ा आरजेडी और जेडीयू के बीच है लेकिन प्रदेश के कांग्रेसी नेता इससे बेहद चिंतित हैं. उनका चिंतित होना भी जायज है,कारण है कि अगर सरकार गिर गयी तो विधायकों का मंत्री पद तो जाएगा ही एक उम्मीद भी टूट जाएगी. अब इस झगड़े को कैसे सुलझाया जाए और प्रदेश कांग्रेस का अस्तित्व कैसे बचाया जाए इसे लेकर राज्य से लेकर केंद्र तक कोशिशें शुरु हो चुकीं हैं. लेकिन ये इतना आसान भी नहीं है. दरअसल कांग्रेस के सामने उहापोह वाली स्थिति है. वो तय नहीं कर पा रहे कि आखिर वो जाएं तो किसके साथ जाएं. एक तरफ उसके सामने लालू के तौर पर पुराना साथी है, तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के तौर पर साफ छवि वाला नेता. लेकिन अभी तक कांग्रेस ने इस मसले पर लालू का ही खुलकर साथ दिया है. तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर जेडीयू और राजद के बीच जुबानी जंग तेज है. जेडीयू एक तरफ तेजस्वी के इस्तीफे से कम पर मानने को तैयार नहीं है, तो दूसरी तरफ राजद ने तेजस्वी के इस्तीफे से साफ इनकार कर दिया है. ऐसे में गठबंधन की तीसरी साझीदार कांग्रेस का चिंतित होना लाजिमी है. हकीकत को भांपते हुए प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं ने आलाकमान से इस मसले को सुलझाने की गुहार लगायी है. इसका असर भी हुआ है खुद राहुल गांधी औऱ सोनिया गांधी ने नीतीश कुमार को फोन कर मामले को सुलझाने का आग्रह किया. लेकिन नीतीश कुमार की तरफ से कोई ठोस भरोसा नहीं मिलने के चलते अभी ये बात बनती दिखाई नहीं दे रही है. नीतीश की तरफ से किसी ठोस भरोसा का उम्मीद लगाए कांग्रेस फिलहाल इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. जाहिर है वो भी जानती है कि भ्रष्टाचार के मसले पर नीतीश कुमार अपने कदम पीछे नहीं करेंगे. कांग्रेस इस कोशिश में है कि दोनों पार्टियों के दरकते रिश्तों के बीच लालू भी कोई ऐसा कदम ऐसा नहीं उठाए जिससे महागठबंधन के भविष्य पर कोई असर पड़े.

कांग्रेस के रणनीतिकार लगातार लालू के साथ संपर्क में हैं. वो लालू प्रसाद को धैर्य रखने की सलाह दे रहे हैं. कांग्रेस के बड़े नेताओं का कहना है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी लालू प्रसाद से बात कर सकती हैं. कांग्रेस मानती है कि अगर गठबंधन टूटा तो भविष्य की सारी योजनाएं धरी की धरी रह जाएंगी. आगे राष्ट्रपति फिर उपराष्ट्रपति का चुनाव है ऐसे में अगर नीतीश कुमार विपक्ष के कुनबे से दूर हुए तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे. विपक्षी एकता तो तार-तार होगी ही साथ ही साल 2019 के लोकसभा चुनाव की सारी रणनीति फेल हो जाएगी. कांग्रेस राजद और जेडीयू के बीच बढ़ती बयानबाजी को लेकर बेहद चिंतित है पार्टी सूत्रों का मानना है कि अगर दोनों दलों के नेताओं के बयानों पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे दोनों के बीच दूरी घटने के बजाए बढ़ेगी ही. इस ताजा विवाद में राजद की तरफ से कोई ठोस फैसला नहीं होता देख अब जेडीयू के भी सब्र का बांध टूट रहा है. पार्टी के बड़े नेता के सी त्यागी ने गुरुवार को कहा कि तेजस्वी खुद को बेदाग साबित करें. साथ ही एक तरह से गठबंधन नेताओं को चेतावनी भी दी कि अगर नीतीश कुमार की छवि पर भ्रष्टाचार को लेकर दाग लगता है तो ऐसे में फिर गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह पाएगा. के सी त्यागी के इस बयान को कांग्रेसी और विपक्ष के कई नेता गंभीर मान रहे हैं.

दरअसल कांग्रेस की दुविधा ये है कि नीतीश की तरफ से गठबंधन को लेकर कोई सकारात्मक बातें अभी तक सामने नहीं आयी हैं. ऐसे में नेताओं का मानना है कि वो आखिर किस तर्क के आधार पर लालू से बात करे. जाहिर है कांग्रेस ये सोच रही है कि नीतीश कुमार पहले ये साफ कर दें कि वो किसी भी परिस्थिति में गठबंधन से बाहर नहीं जाएंगे. कांग्रेस किसी भी हाल में बिहार के इन दोनों अहम साझीदारों को खोना नहीं चाहेगी. कारण है कि जब देश में मोदी लहर चल रही थी तभी बिहार में महागठबंधन ने ही मोदी के विजय रथ को रोका था. साथ ही ये गठबंधन का ही परिणाम था कि कांग्रेस बिहार में 27 सीटों पर जीत दर्ज कर पायी. कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस बात को बखूबी समझ रहा है. विपक्षी एकता का झंडा उठाए कांग्रेस को नीतीश और लालू में लोकसभा 2019 की जीत दिखाई दे रही है. हालांकि कई कांग्रेसी नेताओं का ये भी कहना है कि जिस भ्रष्टाचार की बात को लेकर नीतीश कुमार इतने नाराज हैं और गठबंधन तोड़ने की बात कर रहे हैं वो मसला तो बिहार में गठबंधन कायम करने के पहले भी था.