विधायकों की बातों को दरकिनार कर कांग्रेस बिहार में नहीं छोड़ेगी राजद का साथ,राहुल गांधी ने दिए संकेत

पटना Live डेस्क.   दिल्ली में राहुल गांधी से बिहार के कांग्रेस विधायकों से मिलने के बाद यह तय हो गया है कि कांग्रेस राजद से नाता तोड़ने नहीं जा रही है..जबकि कांग्रेसी विधायक अडिग हैं..शुक्रवार को ही भागलपुर से कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा ने जता दिया था कि राजद के चलते ही राज्य में कांग्रेस की यह दुर्दशा है..लेकिन केंद्रीय नेतृत्व विधायकों की बात को मानने को तैयार नहीं है..सूबे में कांग्रेस के टूट की कवायद भी इसी आधार पर जोर पकड़ रही है कि राजद के साथ मिलकर कांग्रेस राज्य में कुछ नहीं कर सकती…विधायकों का आरोप है कि राजद नेता लालू प्रसाद कभी कांग्रेसी नेताओं को तरजीह नहीं देते..इसलिए राज्य में कांग्रेस को राजद का साथ छोड़ देना चाहिए…प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह पर पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि दोनों मिलकर पार्टी को तोड़ना चाहते हैं…सो कांग्रेस ने दोनों नेताओं को साफ मैसेज दे दिया है…हो सकता है कि कुछ दिनों में अशोक चौधऱी के बदले किसी और को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाए..साथ ही सदानंद सिंह को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए..केंद्रीय नेतृत्व यह समझ रहा है कि शीर्ष नेतृत्व से विधायकों की मुलाकात के बाद कांग्रेस में टूट नहीं होगी…लेकिन विधायक राजद का साथ छोड़ने के लिए अड़े हैं…जानकारी के मुताबिक 27 में से 19 विधायकों ने दो दिनों की मुलाकात में राहुल गांधी को बताया कि बिहार में लालू यादव अब कांग्रेस के लिए बोझ बन गए हैं… इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को यह समझाने की कोशिश की कि बेनामी संपत्ति मामले में फंसे लालू परिवार अब कांग्रेस के लिए फलदायी नहीं हैं.. लिहाजा, उनसे दोस्ती तोड़ने में ही भलाई है, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने उनकी बातों को दरकिनार कर 19 साल पुरानी दोस्ती को बरकरार रखने का फैसला किया है..

दरअसल राजद और कांग्रेस की दोस्ती दशकों पुरानी है… खासकर सोनिया गांधी से लालू यादव की निकटता 19 साल पुरानी है, जब 1998 में मुलायम सिंह यादव समेत कई नेता सोनिया गांधी के पीएम बनने पर ऐतराज जता रहे थे तब लालू ने अकेले ना केवल सोनिया का विदेशी मूल के मसले पर बचाव किया था बल्कि उन्हें देश की बहू कहकर संबोधित किया था और पीएम पद संभालने को कहा था..