BiG News – पुलवामा के आत्मघाती आतंकी हमले में भागलपुर का लाल रतन कुमार ठाकुर शहीद, वीर सपूत की शहादत को सलाम

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पटना Live डेस्क। जम्मू कश्मीर में अबतक के सबसे बड़े आतंकी हमले मे 44 जवानों की शहादत ने देश को झकझोर कर रख दिया है। पूरा देश अपने वीर जवानों की शहादत से मर्माहत है। गुरुवार को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 2500 से अधिक कर्मी 78 वाहनों के काफिले में जा रहे थे। इनमें से अधिकतर अपनी छुट्टियां बिताने के बाद या फिर ट्रेनिंग पूरी कर अपने काम पर वापस लौट रहे थे। जम्मू कश्मीर राजमार्ग पर  पुलवामा के अवंतिपोरा इलाके में इस बड़े काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया।
इस हमले को  जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती दस्ते अफजल गुरु स्क्वाड के स्थानीय आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास कमांडो ने विस्फोटकों से लदी स्कार्पियो को सीआरपीएफ के काफिले में शामिल जवानों से भरी एक बस को उड़ा दिया।इस शक्तिशाली विस्फोट में 44 जवान शहीद हो गए और कई जवान जख्मी हो गए हैं। बस में सवार सभी जवान शहीद हो चुके हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है जो देश के विभिन्न राज्यो के रहने वाले थे। कर्तव्य की बलि वेदी पर प्राणों को न्योछवार करने वाले में बिहार के लाल भी शामिल है। मिली जानकारी के अनुसार बिहार के 2 सपूत भी शहीद हो गए है।                                    

शहीद रतन कुमार ठाकुर

आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवान रतन कुमार ठाकुर का गुरुवार को दिन में पत्नी के पास फोन आया था की श्रीनगर जा रहा हूँ। वहां पहुंचकर शाम को फोन करूंगा। लेकिन उनका फोन नहीं आया। पत्नी ने फोन किया तो स्वीच ऑफ मिला। उन्हें अबतक यह जानकारी नहीं है कि उनका पति और उनके बच्चो (एक गर्भ में पल रहा है) का पिता अब इस दुनिया में नहीं रहा।                 

पिता बनने वाले थे रतन कुमार ठाकुर

रतन का परिवार मूल रूप से कहलगांव के आमंडंडा थाना के रतनपुर गांव का रहने वाले हैं। लेकिन अभी भागलपुर शहर के लोदीपुर मोहल्ले में किराए के मकान में रहता है। घर पर जवान की पत्नी राजनंदिनी देवी और चार साल का बेटा कृष्णा है। राजनंदिनी फिर मां बनने वाली है। पिता निरंजन कुमार ठाकुर ने बताया कि शाम को बेटे के फोन का इंतजार हो रहा था। तबतक उधर से सात बजे शाम को कंपनी कमांडर का फोन आया। उन्होंने रतन का फोन नम्बर मांगा। पिता और पत्नी का नाम पूछा।

                       इधर से पूछा गया कि क्या बात है तो उन्होंने कहा कि कुछ पता लगाना है। इसके बाद पिता ने रतन के नम्बर पर फोन किया तो स्वीच ऑफ मिला। फिर उनलोगों ने टेलीविजन पर देखा कि आतंकवादी हमले में कई सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए हैं। उसके बाद वे लोग डर गए। उन्होंने सीआरपीएफ के कंपनी कमांडर से फोन पर बात की, लेकिन उहोंने कहा कि उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

2011 में CRPF में हुए थे बहाल

पिता ने बताया कि तीन दिन पहले रतन महाराष्ट्र से ट्रेनिंग लेकर जम्मू लौटे थे। बुधवार को श्रीनगर जा रहे थे। यहां वे दो साल से तैनात थे।  वर्ष 2011 में वे सीआरपीएफ में बहाल हुए थे। इसके पहले झारखंड के गढ़वा और छत्तीसगढ़ में रह चुके थे।

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