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BIG News-11अक्टूबर 2018 को पसराहा थानेदार Encounter में नही बल्कि साथी पुलिसवाले की गोली का हुए थे शिकार,FSL रिपोर्ट ने खोले कई राज

शहीद के पिता नेराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली को आशीष कुमार सिंह की साजिशन हत्या किए जाने के संबंध में भेजा था एक दुख भरा पत्र बिहार मानवाधिकार आयोग ने भी कथित पुलिस मुठभेड़ को जांच के दौरान पाया था संदिग्ध, क्लोज रेंज से लगी थी गोली, थानाध्यक्ष के पिस्टल से कोई फायरिंग नहीं

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पटना Live डेस्क। बिहार के खगड़िया जिला अंतर्गत पसराहा के तत्कालीन थानेदार आशीष कुमार सिंह 11 अक्टूबर 2018 को दिनेश को पकड़ने गए थे। पसराहा के तत्कालीन थानेदार कथित इनकाउंटर के दौरान शहीद हो गए थे। एक सिपाही को भी उस समय गोली लगी थी। अब इस मामले में अब उक्त मुठभेड़ की FSL(फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है।कोर्ट में एफएसएल द्वारा पेश की गई रिपोर्ट न इनकाउंटर पर ही न केवल सवाल खड़े कर दिए बल्कि पेश रिपोर्ट के अनुसार साफ साफ यह बात स्पष्ट हो जाती है कि कथित मुठभेड़ तो हुआ ही नही था बल्कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था।

             दरअसल, ग्यारह- बारह अक्टूबर 2018 की दरमियानी रात यह मुठभेड़ भागलपुर जिले के बिहपुर थाना क्षेत्र के दूधैला दियारा में हुई थी। मकतूल आशीष कुमार सिंह 2009 बैच के दारोगा थे और पसराहा के थानेदार थे। उनको कुख्यात दिनेश मुनि की मौजूदगी की सूचना मिली थी। पता चला था  की कुख्यात दिनेश मुनी अपने गिरोह के साथ किसी बड़ी घटना को अंजाम देने खातिर क्षेत्र के दुधेला दियारा स्थित अशोक मंडल के (बांस घर) में कर रहा हैं। मिली सूचना पर आशीष महज 4 सिपाहियों के साथ रात के अंधेरे में बियाबान दूधैला दियारा पहुंचे थे। इसी दौरान अपराधियों ने उन पर हमला बोल दिया। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, लेकिन इसी बीच एक गोली आशीष कुमार सिंह के पेट में लग गयी, लेकिन घायल होने के बाद भी उन्‍होंने एक अपराधी को मार गिराया था। यह वो कहानी है जो महकमे द्वारा पसराहा थानेदार की मौत और एक सिपाही के गोली लगने के बाद कही गई थी।

दर्ज FIR में पुलिस अपराधी मुठभेड़ की कहानी

साथ ही पुलिस द्वारा उक्त घटना को एनकाउन्टर बताते हुये पुलिस पदाधिकारी शम्भू शरण शर्मा के बयान पर बिहपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उक्त FIR में यह दर्ज कराया गया था कि पुलिस की घेराबंदी की भनक पाते ही अपराधियों ने पुलिस पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दिया था।अपना बचाव करते हुए तत्कालीन पसराहा  थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह व छापेमारी टीम में शामिल पुलिस कर्मियों ने भी जवाबी फ़ायरिंग की थी। उक्त मुठभेड़ में आशीष कुमार सिंह शहीद हुये थे, वही आरक्षी दुर्गेश कुमार यादव जख्मी हुये। वही थानेदार ने गोली लगने के बाकायदा अदम्य साहस दिखाते हुए अपराधी श्रवण यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। यह वारदात बिहपुर थाना में कांड संख्या-402/18 के तौर पर दर्ज है। इस कांड को 13 अक्टूबर 2018 को दर्ज किया गया था। मामले इस के काण्ड में इन कानूनी धारों 353/332/333/337/302/307/216(A)/120B समेत आईपीसी व आर्म्स एक्ट 25 (1 बी) /26/27/35 दर्ज किया गया था।

                     घटना में शहीद हुये सब इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह मूल रूप से सहरसा जिले के रहने वाले थे। वही गोलीबारी में जख्मी सिपाही दुर्गेश कुमार यादव मधुबनी जिले के रहने वाले है। मक़तूल दरोगा अपने पीछे दो मासूम बच्चे और पत्नी को छोड़ गए। इन अबोध को तो यह भी नही मालूम कि शहादत और साज़िश क्या होती है? पर जबाब और सवाल समय के साथ अपना सच तो ढूढेंगे ही ?

बिहार मानवाधिकार आयोग की जांच में सच 

दरअसल, इस इनकाउंटर में थानेदार की शहादत से घटना की गूंज पूरे सूबे में सुनाई दी। लेकिन इस बेहद संगीन घटना में बिहार मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया और पुलिस की पुरी कार्रवाई को संदिग्ध पाया। कई ऐसे बिंदु थे जो मामले को शुरुआत से ही संदिग्ध बना रहे थे। जांच शुरू तो मामला एकदम संदिग्ध जान पड़ा फिर क्या था। मुठभेड़ में पुलिस द्वारा इस्तेमाल हथियारों की जांच बिहार एफएसएल से कराया गया।

थानेदार की पिस्टल से नही हुई थी फायरिंग

एफएसएल की जांच में पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह के 9 एमएम की सर्विस पिस्टल की जांच हुई तो जीएसआर रिपोर्ट में पाया गया की पिस्टल से तो कोई फायरिंग नहीं हुई। वही मुठभेड़ में मारा गया श्रवण यादव को बेहद नज़दीक (क्लोज रेंज) से गोली लगने की पुष्टी हुई थी। जबकि एफआईआर में दूर से फायरिंग का जिक्र किया गया हैं।

वही, साथ ही जब मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों द्वारा इस्तेमाल इंसास राइफल -2,पॉइंट 303 राइफल-1 की जांच एफएसएल से कराई गई। मामला ही दूसरी तरफ मोड़ ले गया।

 पुलिसकर्मी की गोली से हुई आशीष की मौत

दरअसल, मकतूल दरोगा के पोस्टमार्टम में शरीर से निकली गोली से मामला पूरी तरह से फेक एनकाउंटर की ओर मुड़ गया। वही,अब यह पूरा मामला रेड में शामिल ख़ाकीवालो पर ही न केवल सवाल खड़े कर रहा है बल्कि यह जान पड़ता है कि पुलिसकर्मियों ने न केवल श्रवण यादव को गिरफ्तार करने की बजाय हत्या कर दी बल्कि हद ये की दुर्घटनावश या धोखे से अपने साथी तत्कालीन थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह को गोली मारकर हत्या कर दिया।

यही नही पुलिसवालों में सच को छुपाते हुए एक बनावटी एनकाउंटर की कहानी न केवल सुनाई बल्कि बदहवासी में अपने साथी सिपाही को भी गोली मार कर जख्मी कर दिया।

शराब माफिया के निशाने पर थे थानेदार

उल्लेखनीय है कि शहीद थानेदार आशीष कुमार सिंह बदमाशों से हुई एक मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। इसे बिहार के शराब माफियाओं की साजिश माना जा रहा था। इसी क्रम में 17 जनवरी, 2019 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली ने खगडि़या जिले के पसराहा थाने में तैनात युवा और तेजतर्रार थानेदार आशीष कुमार सिंह हत्याकांड का विस्तृत विवरण जानने के लिए भागलपुर जिलाधिकारी और नवगछिया एसपी से रिपोर्ट मांगी थी।

दरअसल, मकतूल दरोगा आशीष कुमार के पिता गोपाल सिंह ने इसी वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली को अपने बेटे आशीष कुमार सिंह की साजिशन हत्या किए जाने के संबंध में एक दुख भरा पत्र भेजा था।आयोग ने उन के पत्र को गंभीरता से लेते हुए यह कड़ा कदम उठाया था, उक्त पत्र के आलोक में दोनों अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी।

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