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बिहार में कोरोना की दूसरी डोज के लिए बनेंगे अलग काउंटर

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पटना Live डेस्क। बिहार में कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के लिए अलग काउंटर बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत संचालित करीब तीन हजार टीकाकरण केंद्रों में दूसरी डोज के लिए अलग-अलग काउंटर बनाने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि टीकाकरण अभियान के तहत टीका दिए जाने के क्रम में टीके की पहली और दूसरी डोज लेने वालों के बीच भारी अंतर को दूर करने को लेकर यह निर्णय लिया गया है। राज्य में 16 जनवरी, 2021 से कोरोना टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है।
राज्य में अबतक कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत शुक्रवार तक 2।69 करोड़ व्यक्तियों को कोरोना टीका की पहली डोज दी जा चुकी है जबकि कोरोना टीके की दूसरी डोज लेने वाले व्यक्तियों की संख्या मात्र 52।52 लाख है। करीब 20 फीसदी व्यक्तियों को ही कोरोना टीके की दूसरी डोज मिल सकी है।
राज्य के टीकाकरकण केंद्रों पर कोरोना टीका की पहली डोज लेने वालों की भीड़ होने और दूसरी डोज लेने वालों की संख्या कम होने के कारण वे नजरअंदाज कर दिए जाते हैं और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन भी पहले डोज लेने वालों की भीड़ को देखते हुए उन्हें प्राथमिकता देने को मजबूर होता है।
ऐसे में दूसरी डोज लेने वालों में अरुचि हो जाती है और वे कम संख्या में टीकाकरण केंद्रों में पहुंचते है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि टीकाकरण केंद्रों पर टीका की दूसरी डोज लेने वालों की परेशानी कम करने और उन्हें सुविधा प्रदान कर प्रोत्साहित करने में अलग से काउंटर काफी लाभकारी होगा।
नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ। अजय सिन्हा के अनुसार अगर संभव हो सके तो निर्धारित तारीख को ही टीकाकरण कराना चाहिए। लेकिन किसी समस्या के चलते अगर उस तारीख को वैक्सीन की दूसरी खुराक नहीं मिल पाती पाते तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। छह माह तक टीका की पहली डोज की मेमोरी शरीर में रहती है। हालांकि, कोशिश करें कि निर्धारित तिथि के नजदीक ही किसी दूसरी तारीख को चुनें। इससे संक्रमण की संभावना कम रहेगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में कोरोना टीकाकरण के दौरान करीब 120 दिनों का अंतर दूसरी डोज लेने में हो गया है। टीका की प्रारंभ में कमी, अनियमित आपूर्ति, टीकाकरण केंद्रों पर पहली डोज लेने वालों की भीड़, कोवैक्सीन टीका की आपूर्ति कम होने, पहला टीका लेने वालों में अरुचि इत्यादि विभिन्न कारणों से टीका की दूसरी डोज लेने में अंतर बढ़ गया है।
राज्य में प्रारंभ में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन का टीका भी दिया जा रहा था। कोविशील्ड की दूसरी डोज लेने के समय में कई बार बदलाव लाया गया। 28 दिन फिर 42 दिन फिर 83 दिन बाद दूसरी डोज दिए जाने की अनुशंसा की गयी। वहीं, कोवैक्सीन टीका की दूसरी डोज 28 दिनों बाद दी जाती है जबकि इसकी आपूर्ति अपेक्षाकृत कम हुई है।

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