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BiG News – पटना महावीर मंदिर के दानपत्र से मिला कुछ ऐसा की हतप्रभ रह गए सभी,आखिर क्या है वो जानिए

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पटना Live डेस्क। बिहार की राजधानी पटना के स्टेशन परिसर से सटे स्थित ख्यातिनाम महावीर मंदिर के दानपत्र में अमूमन रोजाना श्रद्धालुओं द्वारा यथाशक्ति दान के तौर पर रुपये और सिक्के डाले जाते है। एक निश्चित अवधि के बाद मंदिर प्रशासन द्वारा दानपत्रों को खोंल कर दान की गई राशि को गिनकर मंदिर ट्रस्ट के खाते में जमा करा दिया जाता है। यह सिलसिला निर्बाध रूप के जारी है। लेकिन शुक्रवार को दानपत्र से मंदिर प्रशासन को कुछ ऐसा मिला जिसको देखकर सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। आनन फानन में इसकी जानकारी पूर्व आईपीएस आचार्य किशोर कुणाल जो बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष होने के साथ साथ महावीर मन्दिर न्यास के सचिव भी है को दी गई।

मिली जानकारी से सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तथा संस्कृत अध्येता आचार्य किशोर कुणाल भी हैरत में रह गए तथा शीघ्र ही मंदिर में आने की बात कही।

दरअसल,महावीर मंदिर के दानपात्र से ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी (East India Company) के दौर के 30 सिक्के मिले है। मिले सिक्को पर एक आना (One ANNA) और साल 1818 अंकित है। यानी मिले सिक्को का मूल्य उस दौर का है जब रुपये का दशमलवीकरण नहीं हुआ थ। तब 11.66 ग्राम के वज़न वाले रुपये के सिक्के को 16 आने या 64 पैसे या फिर 192 पाई में बांटा जाता था। 1957 में रुपये का दशमलवीकरण हो गया और एक रुपया 100 पैसे का हो गया। साथ ही दानपत्र से मिले सभी सिक्को पर है राम ,जानकी और लक्ष्मण के चित्र है।

लेकिन सबसे सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के इतने पुरातन महत्व के 30 सिक्के आखिर में महावीर मंदिर के दानपत्र में कब, क्यो और किस उद्देश्य के कारण डाले है ? यह जानकारी किसी के पास नही है। इसको लेकर मंदिर से जुड़े व्यक्तियों में इसको लेकर तमाम तरह के कयासों और चर्चे जारी है।

क्या कहना है आचार्य किशोर कुणाल का

वही, मंदिर दानपत्र से मिलें राम-जानकी और लक्षण के चित्र उकेरे 30 सिक्को के बाबत महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का कहना रहा कि दानपत्र से मिले सिक्को को देखकर वो भी अचम्भित हुए पर श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के मंदिर में यह सिक्का मिलना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। वही, सिक्को के बाबत आचार्य बताते हैं सिक्के मिलने के बाद हमने सबसे पहले इसका इतिहास और भूगोल के बाबत जानकारी ली तो पता चला कि ब्रिटिश हुकूमत के दौर में वर्ष 1784 से 1835 तक के पीरियड में देश के मेट्रोपोलिटन टाउन के तौर पर चिन्हित कलकत्ता (अब कोलकाता)बॉम्बे (अब मुंबई) और मद्रास (अब चेन्नई) में इन सिक्कों को लेनदेन में प्रयोग किये जाने का अधिकार दिया गया था। वही, 1835 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने पूरे देश की सत्ता हासिल कर ली तो मुल्क भर में इसे एक आना के मुल्य पर चलाया गया। वही, सिक्के किस धातु से ढाले गए है इस बाबत जानकारी इकट्ठा की जारही है।

वही, बेहद पुरानतन महत्व और धार्मिक महत्व के अमूल्य धरोहर के तौर पर महावीर मन्दिरन्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने सिक्को को मंदिर प्रांगण में ही रखने का निर्णय लिया गया है क्योकि सिक्को पर भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण जी अलंकृत है।

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