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Bihar Election 2020 – पालीगंज विधान सभा सीट पर भाजपा के भीतर ही उम्मीदवारी खातिर स्थानीय बनाम बाहरी का मुकाबला

एनडीए (NDA) गठबंधन में उम्मीदवारी पाने खातिर पालीगंज विधानसभा सीट को लेकर चल रही अंदरखाने खींचतान

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पटना Live डेस्क। बिहार की राजधानी पटना से सटे पालीगंज (Paliganj) विधानसभा सीट एक दशक पहले तक नक्सलियों का गढ़ के तौर विख्यात रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhansabha Chunav 2020) का ऐलान होते ही सूबे में चुनावी बयार बहने लगी है। पालीगंज भी इससे अछूता नही रहा है। पालीगंज विधान सभा क्षेत्र अनुमंडल मुख्यालय सहित दुल्हीनबाजार प्रखंड क्षेत्र को अपने में समेटे पालीगंज विधानसभा सीट (Paliganj Constituency) इस बार बेहद हॉट सीट में तब्दील हो गई है।

दरअसल पिछले चुनाव में इस सीट पर राजद (RJD) के उम्मीदवार जयवर्द्धन यादव उर्फ बच्चा बाबू ने भाजपा (BJP) के उम्मीदवार रामजन्म शर्मा को हराकर जीत शानदार जीत दर्ज की थी। लेकिन 2020 में विधानसभा(Bihar Assembly) की फिजा बदली बदली सी नजर आ रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ दिन पूर्व राजद विधायक जयवर्द्धन यादव,जदयू (JDU) में शामिल हो गए हैं। ऐसे में इस सीट के लिए NDA में तकरार होना लाजमी है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 पालीगंज सीट के लिए इसबार जदयू व भाजपा के बीच ही द्वंद की स्थिति बन गई है। भाजपा इस सीट पर अपना एकाधिकार मानते हुए सीट को छोड़ना नहीं चाहती, वहीं राजद से जदयू में गए जयवर्द्धन यादव पर पार्टी वर्तमान विधायक होने का हवाला देते हुए मजबूत दावेदारी पेश कर रही है।

भाजपा और जदयू के बीच सीटों का मामला भले ही सुलझ गया हो लेकिन यह अभी तय नही हुआ है कि अगर भाजपा के खाते में यह सीट जाती है तो उम्मीदवार पालीगंज का स्थानीय होगा या एक बार पुनः पूर्व की तरह फिर बाहरी। उल्लेखनीय है कि पिछले 8 विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओर से बारम्बार बाहरी उमीदवारों को मौका दिया गया है परंतु सफलता महज 2 बार ही मिली है।

कब कौन जीता – पालीगंज से
1952- राम लखन सिंह यादव, कांग्रेस।
1957 -प्रसाद वर्मा, सोशलिस्ट पार्टी।
1962-राम लखन सिंह यादव, कांग्रेस।
1967- चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, सोशलिस्ट पार्टी।
1969 -चंद्र प्रसाद वर्मा, सोशलिस्ट पार्टी।
1972- कन्हाई सिन्ह संगठन, कांग्रेस।
1977 कन्हाई सिन्ह निर्दलीय।
1980- राम लखन सिंह यादव, कांग्रेस।
1985- राम लखन सिंह यादव, कांग्रेस।
1990- राम लखन सिंह यादव, कांग्रेस।
1991- चंदू प्रसाद वर्मा, जनता दल।
1995 – चना देव प्रसाद वर्मा, जनता दल।
1996 – जनार्दन शर्मा, भाजपा।
2000 – वीराना सिंह यादव, राजद।
2005 – नंद कुमार नंदा, भाकपा माले।
2010 – डॉ उषा विद्यार्थी, भाजपा।
2015- जयवर्धन यादव राजद।(अब जदयू)

जिसमें एक पूर्ण विधानसभा व एक बार उप चुनाव में भाजपा के पक्ष में परिणाम आया। बाकी 6 मौको पर बीजेपी के बाहरी प्रत्याशियों के मुकाबले विपक्षी उम्मीदवार की जीत हुई। लंबे अर्से से भाजपा के भीतरखाने पालीगंज से स्थानीय उम्मीदवार की मांग रही है। भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी होने पूर्व भीतर खाने एक बार फिर स्थानीय बनाम बाहरी का मुकाबला हो गया है।

लालटेन Vs कमल 

पालीगंज विधानसभा का गठन 1952 में हुआ था। यहां के पहले विधायक चुने गए थे कांग्रेस के राम लखन सिंह यादव। पालीगंज विधानसभा में पिछले तीन दशक के चुनावों में राजद बनाम भाजपा रहा है जबकि इस दौरान एक मौके पर भाकपा (माले) भी कामयाब रही है। पालीगंज में चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1996 कमल को जनार्दन शर्मा ने खिलाया और 2010 में इस सीट पर भाजपा की उषा विद्यार्थी ने कब्जा जमाया। लेकिन 2015 में यह सीट राजद के खाते में गई। जातीय गणित के बरक्स मुकाबला यादव बनाम भूमिहार का है। वही भाजपा की ओर से पिछले आठ मुकाबलों में भूमिहार उमीदवारों पर ही दांव लगाया गया, लेकिन महज दो बार ही बाजी अपने पक्ष में करने में कामयाब रहे है।

राजीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पालीगंज में जीत का प्रतिशत कम होने की वजह भाजपा द्वारा भूमिहारों को टिकट तो दिया मगर वे स्थानीय नही होने का दंश झेल चुके है। इन्ही कारणों से पालीगंज कभी भी भाजपा के लिये सुरक्षित किला नही बन सका है।

ये कर रहे हैं दावेदारी

पालीगंज विधानसभा सीट पर पार्टी के उम्मीदवार बनने खातिर अंदरखाने में ही उमीदवारों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। यह त्रिकोणीय मुकाबला रवींद्र रंजन, उषा विद्यार्थी और रामजन्म शर्मा के बीच है। बिक्रम से पूर्व विधायक रामजन्म शर्मा पिछली बार पालीगंज से भाजपा प्रत्याशी थे जिन्हें राजद के उम्मीदवार जयवर्द्धन यादव से हार मिली। वहीं उषा विद्यायर्थी तीन बार भाजपा के टिकट पर पालीगंज से भाग्य आजमाने के बाद महज एक बार ही विधानसभा पहुँचने में कामयाब हो पाई। खास बात यह की ये दोनों ही बिक्रम से आते हैं और पालीगंज के लिए बाहरी उम्मीदवार हैं।

वहीं दोनों नामो के बीच एक स्थानीय नाम वरीय भाजपाई रविन्द्र रंजन का है जिससे पालीगंज विधानसभा से कमल खातिर दावेदारों की होड़ दिलचस्प हो गई है। रवींद्र रंजन लंबे अर्से से पार्टी के बेहद समर्पित निष्ठावान और सक्रिय चेहरे के तौर पर अपनी भूमिका का निर्वहन करते आ रहे है। फ़िलवक्त भाजपा किसान मोर्चा के बंगाल में प्रभारी हैं। स्वामी सहजानन्द सरस्वती किसान मोर्चा के माध्यम से प्रदेश भर के किसानों के बीच इनकी सक्रियता उल्लेखनीय व प्रभावशाली है। लम्बे समय से यह पालीगंज के स्थानीय उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में रहे है।

इन नामों के अलावा कुछ और भी नाम हैं जो भाजपा के भीतर पीलीगंज से उम्मीदवारी की होड़ को कांटे का बनाये हुये है। वही पालीगंज के सिटिंग MLA जो राजद की टिकट पर विधानसभा पहुचे थे वो अब जदयू में है।

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