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बिहार में अब घोटालों को छिपाना होगा मुश्किल, नीतीश सरकार लागू करेगी ऑडिट कोड

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पटना Live डेस्क। बिहार में अब घोटाले को छुपाना य बचाना अब संभव नहीं होगा। नीतीश सरकार इसके लिए कमर कसने जा रही है। देश की आजादी के 75 साल बाद प्रदेश में अंकेक्षण संहिता और अंकेक्षण मैनुअल लागू किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने इनका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, जिससे 11 तरह के ऑडिट का नियम किया गया है। इसे जल्द से जल्द प्रदेश कैबिनेट मंत्रिपरिषद के पास विचार विमर्श के लिए भेजने की तैयारी है।
दरअसल, इस प्रस्तावित अंकेक्षण संहिता और अंकेक्षण मैनुअल में घोटाला, अनियमितता और धन को गबन करने जैसे फाइनेंशियल अपराधों को तरीके से परिभाषित किया गया है। वहीं, अब से ऑडिट रिपोर्ट में सही ढंग से वित्तीय दोषों को दिखाना होगा। इसका मकसद प्रदेश सरकार की व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने के लिए आसान रास्ता तैयार करना है। इस दौरान किसी भी सरकारी विभाग या ऑफिस का ऑडिट के लिए चयन करते समय फाइनेंशियल विभाग का अंकेक्षण निदेशालय 2 दर्जन से ज्यादा प्वाइंट के चेकलिस्ट के जरिए ऑडिट करेगा। ऐसे में अंकेक्षण संहिता और अंकेक्षण मैनुअल के बन जाने से प्रशासनिक अमले में इस तरह के गोरखधंधे पर लगाम कसेगी।
बता दें कि फाइनेंसियल डिपार्टमेंट की ओर से अभी तक केवल ट्रांजेक्शन ऑडिट और सिस्टम ऑडिट किया जाता है। हालांकि प्रस्तावित अंकेक्षण संहिता में फोरेंसिक ऑडिट समेत कुल 11 तरह की ऑडिट का नियम है, जिसमें ट्रांजेक्शन ऑडिट, सिस्टम ऑडिट, जोखिम आधारित ऑडिट, प्री ऑडिट, कंप्लायंस ऑडिट, परफॉर्मेंस ऑडिट, आईटी ऑडिट, रिसोर्स ऑडिट, आउटकम ऑडिट ऑर कॉमर्शियल ऑडिट। इन सभी फाइनेंसियल प्रक्रिया को गड़बड़ी से फुल प्रूफ करने के लिए प्रदेश सरकार अंकेक्षण निदेशालय को नई तकनीक से लैस करने जा रही है। जिससे प्रदेश सरकार के खजाने में सेंध लगाने की किसी भी आशंका को कम किया जा सके।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार में ऑडिट विंग की स्थापना 1953 में तत्कालीन वित्त मंत्री अनुग्रह नारायण सिंह की पहल पर की गई थी। यह वित्त विभाग की शाखा 36 के तौर पर काम करता था। वहीं, साल 2017-2018 में प्रदेश सरकार की ओर से अंकेक्षण निदेशालय की स्थापना की गई। ऐसे में कई बार सीएजी रिपोर्ट में किसी खास विभाग या योजना में बड़ी गड़बडी की ओर इंगित करने पर उस विभाग या योजना में गड़बड़ी के दोषियों की पहचान करने में प्रदेश सरकार अंकेक्षण निदेशालय से स्पेशल ऑडिट कराती है।
इस दौरान प्रदेश में घोटाला करने वाले आसानी से कानून की नजर में आ जाएंगे, इससे उनमें डर पैदा होगा। वहीं, प्रदेश के आंतरिक अंकेक्षण की प्रक्रिया दुरुस्त होने से सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी। साथ ही अनावश्यक खर्च पर लगाम लगाकर जनता की बेहतरी को संसाधन लगाया जा सकेगा। जहां प्रदेश में राजस्व संग्रह में कमी के ठिकानों को समय रहते पहचाना जा सकेगा।

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