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Bihar Chunav-जानिए Nitish Kumar ने किस को कहा-‘राजगीर में रह पाओगे? अंत में वहीं जाओगे जहां पैदा हुए हो’

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पटना Live डेस्क।बिहार में जारी सियासी घमासान यानी सत्ता संघर्ष को लेकर तमाम सियासी दलों में दल-बदल और साथी का विरोधी बन जाने का सिलसिला अब थम चुका है। लेकिन उस कहावत को चरितार्थ कर गया है कि सियासत में न कोई दोस्त होता है न रक़ीब होता है सिर्फ सत्ता पाने को लेकर रिश्ते बनते और फिर अपने अपने रस्ते चल देते है। ठीक ऐसे ही हालात बन गए है राजगीर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र की सियासत में।

दरअसल, राजगीर के वर्त्तमान विधायक रवि ज्योति एक पुलिस अधिकारी हुआ करते थे। सियासत में भी दिलचस्पी थी। जनसरोकार के मुद्दे से विशेष लगाव था। स्थानिए युवा वर्ग में ठीकठाक पैठ थी। लंबे दौर से नालन्दा जिले के विभिन्न थानों में तैनात रहे। विगत विधानसभा चुनाव वर्ष 2015 में खाकी उतारकर खादी पहल लिया। नीतीश कुमार के दल ने तीर थमाकर राजगीर से मैदान में उतार दिया। राजद जदयू के गठबंध की लहर में तीर निशाने पर जा लगा। राजगीर से 40 साल से जीतते आ रहे सत्यदेव नारायण आर्य को पटखनी दे दी।खाकी वाला खादी पहन कर सीधे विधानसभा पहुच गया।

सब दिन होत न एक सामना ….

वक़्त की अपनी रवानी होती है, इंसान वही रह जाता है समय बदल जाता है। क्योंकि अक्सर इंसान वक्त की नज़ाकत को अपनी जीत समझ कर अहंकारी हो जाता है। रवि ज्योति खाकी और खादी का अंतर न समझ पाए। थानेदारी और नेतागिरी का मर्म एक समान समझ बैठे फिर क्या था, दूध की मक्खी की तरह जदयू ने गठबन्धन की मजबूरियों के तहत टिकट से मरहूम कर दिया।

हाथ का साथ अब तीर के निशाने है हज़रात

जदयू से टिकट कटा तो फर्स्ट टर्म वाले विधायक रवि ज्योति राजद और जदयू की प्रमुखता वाली उक्त जीत को अपनी जीत समझ ज़नाब सीधे सीधे बगावती हो गए। फौरन कॉंग्रेस जो गठबन्धन का प्रमुख घटक दल है के दरवाजे पर दस्तक दी और राजगीर में हाथ के साथ मिलते ही चुनावी समर में कूद गए।

विधायकी के एक टर्म में ही – लाखपति से करोड़पति बन गए

राजगीर के वर्त्तमान विधायक रवि ज्योति  मुखर नेता रहे हैं। उन्होंने फेसबुक पर एक बार लिखा कि राजनीति से अच्छी सेवा पुलिस सेवा ही थी। उनका वह पोस्ट खूब चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने पार्टी पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया था। नालंदा जिला के राजगीर विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर विधायक रवि ज्योति कुमार ने 16 Oct (शुक्रवार) को अपना नामांकन दाखिल किया। अपने नामांकन पर्चे में जानकारी देते हुए कॉंग्रेस उम्मीदवार रवि ज्योति ने एक करोड़ नौ लाख (1.09 करोड़) की संपत्ति घोषित की है। वही, वर्ष 2015 में अपनी संपत्ति 70 लाख 45 हज़ार बताई थी। यानी महज 5 साल में रवि ज्योति लाखपति से करोड़पति तक का सफर तय कर गए है।

रवि का राजनीति से है पुराना रिश्ता

सनद रहे कि राजगीर के वर्त्तमान विधायक रवि ज्योति मूल रूप से दरभंगा जिले के लहेरियासराय के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत 5 सितंबर 1994 में की थी। वे राजगीर थाने के थानेदार के तौर पर काम कर रहे थे। रवि की इस इलाके की कई पुलिस स्टेशनों पर पोस्टिंग रही है। रवि ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से पढ़ाई की है।

रवि ज्योति कुमार का रिश्ता राजनीति से काफी पुराना है। इनकी बुआ श्यामा कुमारी वारिसनगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं। जिससे प्रभावित होकर रवि ज्योति ने लगभग 21 साल तक बिहार पुलिस में नौकरी करने के बाद सियासत में जदयू के टिकट पर वर्ष 2015 में कूदे और कामयाब भी रहे।अब जदयू नीत NDA गठबन्धन के ख़िलाफ़ राजगीर से ताल ठोक रहे है।

राजगीर में रह पाओगे?

वही, NDA की जीत ख़ातिर लगातार चुनावी सभाओं को सबोधित करते हुए सूबे के मुखिया नीतीश कुमार राजगीर पहुंचे ।जदयू ने इस सीट से  सत्यदेव नारायण आर्य के बेटे कौशल किशोर उर्फ मणिकांत को टिकट दिया है।उम्मीदवार कौशल किशोर ख़ातिर राजगीर (Rajgir) के नानंद गांव में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे,मगर यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का तेवर तल्ख दिखा।उन्होंने खुले मंच से वर्तमान विधायक रवि ज्योति (Ravi Jyoti) को चुनौती देते हुए कहा कि राजगीर में रह पाओगे? अंत में वहीं जाओगे जहां पैदा हुए हो’। सुनिए

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