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BiG News-गृह मंत्रालय ने UP में मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बनारस करने को दी मंजूरी

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पटना Live (नेशनल) डेस्क। देश भर में सडको, शहरों व रेलवे स्टेशनों के नाम बदले जाने की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है।अब वाराणसी जिले के मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलने के फैसले पर मुहर लग गई है। मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलकर अब बनारस जंक्शन रखा जाएगा।इससे संबंधित प्रस्ताव को गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। गृह मंत्रालय ने सोमवार की देर शाम मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने की मंजूरी दे दी है। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी जिले में स्थित इस रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार से निवेदन किया था।बताया जा रहा है कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक बनारस का पुराना गौरव सहेजने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। यूपी सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए गृह मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। इसके साथ ही मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस जंक्शन किए जाने का रास्ता अब साफ हो गया है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोग मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलने की मांग काफी समय से कर रहे थे। बनारस की पहचान को संरक्षित करने के लिए मंडुआडीह स्टेशन का नाम बनारस करने को लेकर कई दफे लोगों ने रेलवे के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिए, राज्य और केंद्र की सरकार को भी पत्र लिखे।

 

बता दें कि मंडुआडीह से पहले भी उत्तर प्रदेश के मुगलसराय और इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशनों के नाम भी बदले गए थे। मुगलसराय जंक्शन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और इलाहाबाद जंक्शन का नाम प्रयागराज जंक्शन कर दिया गया था।नाम बदले जाने को लेकर खूब सियासत भी हुई थी।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NOC (No Objection Certificate) जारी कर दिया है। गृह मंत्रालय नाम बदलने के लिए वर्तमान दिशा-निर्देशों के मुताबिक संबंधित एजेंसियों से विचार-विमर्श करता है।

कैसे बदला जाता है नाम?

भारत मे रेलवे स्टेशन या शहर इत्यादि के नाम परिवर्तन की एक प्रक्रिया है। इस बाबत एक अधिकारी ने बताया कि वह किसी भी स्थान का नाम बदलने के प्रस्ताव को रेल मंत्रालय, डाक विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया से NOC लेने के बाद ही मंजूरी देता है।

अधिकारी का कहना है कि किसी भी गांव या शहर या नगर का नाम बदलने के लिए शासकीय आदेश की जरूरत होती है। वहीं किसी राज्य के नाम में बदलाव के लिए संसद में साधारण बहुमत से संविधान में संशोधन की जरूरत होती है।

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