बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

Super Exclusive-(सीरीज) बियाडा “सुशासन की दुधारू गाय” लूट की हरी कथा हरि कथा अनंता- पहली किस्त- ईमादार को मिली सज़ा फर्ज़ी को दी गई नौकरी ताकि चलता रहे लूट तंत्र

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पटना Live डेस्क।सूबे में वर्ष 2003 में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) की स्थापना की गई। उद्देश्य सूबे में औद्योगिक विकास को गति देना ताकि सूबे में कल-कारखानों को विशेष सहूलियत के साथ भूमि आवंटित किया जा सके। लेकिन अब हालात ये है कि बियाडा पूर्णतया सुशासन की दुधारू गाय में तब्दील हो चुका है। उद्देश्य से उलट अब इस संस्थान में एक ऐसा तंत्र काबिज़ है जो लूटतंत्र को बेहद सुचारू ढंग से अंजाम देता हुआ बिल्कुल दीमक की तरह बियाडा को न केवल खोखला कर रहा है बल्कि हर उस कोशिश और प्रयास को पलिता लगा देता है जो बियाडा के मूल उद्देश्य ख़ातिर ईमानदार क़वायद करता है। चुकी ईमानदार की सार्थकता की वजह से महालूट में व्यवधान पड़ने की नौबत आजाती है तो अपने आर्थिकतंत्र की वजह से सत्ता का आशीर्वाद पाए बियाडा पर काबिज़ तंत्र उसे ही निपटा देता है।बियाडा मुख्यालय में जारी लूट की हरी कथा हरि कथा अनंता के हर फर्ज़ीवाड़े, धांधली और लूटतंत्र की हर साज़िश को बेनकाब और पर्दाफाश करने ख़ातिर पटना Live ने ऑपरेशन “सुशासन की दुधारू गाय” के तहत अपनी इंवेस्टिगेटिंग पड़ताल के द्वारा वो तमाम डॉक्युमेंट्स जो वर्षो से बियाडा में जारी महालूट के हर खेल का सुबूत बनेगा न केवल ढूढ़ निकाला है बल्कि ख़ुलासे की पहली किस्त के तौर पर आपके सामने लेकर आया है।

पहली किस्त

ईमादार को सज़ा फर्ज़ी नियुक्ती ताकि जारी रहे खेल

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार जिसे संक्षिप्त में बियाडा कहते है कि स्थापना वर्ष 2003 में हुई।उद्देश्य सूबे में औद्योगिक विकास को गति देना था और है भी ये दावा अब भी किया जाता है।सूबे में कल-कारखानों ख़ातिर ज़मीन अधिग्रहण, मुआवजा और उद्योगपतियों को ज़मीन लीज पर मुहैया कराने की जिम्मेदारी प्राधिकार केे पास हैै। चुकी पूरी कवायद उद्योगपतियों और कारोबारियों से जुड़ा है। रुतबा-रुआब और पहुच-पैरवी के साथ ही अकूत धन बरसने के कई रास्ते इस कवायद में सुगमता से मौजूद है। वही, दूसरी तरफ शुरुआती दौर से ही सरकारी तंत्र में व्याप्त तमाम छिद्रों से अवगत शातिरों की गिद्ध दृष्टि बियाडा पर जम गई। वक्त अपनी रवानी पर बढ़ता चला गया पर बिहार के औद्योगिक विकास का सपना पता नही कहा दम तोड़ने की कगार पर लटका है पर प्राधिकार के अधिकारियों और सत्ता के नायको और चहेतों का खूब विकास हुया और अब भी हो रहा है। इसी दौरान अपनी बेहद ऊची पहुच और एक बेहद प्रभावशाली रसुखदार आईएएस जो प्रिंसिपल सेक्रेटरी रैंक पर वर्त्तमान में भी सुशासन सरकार के चहेतों में शुमार करते है से रिश्तेदारी की बदौलत वर्ष 2007 से प्राधिकार मुख्यालय पटना में बतौर कार्यकारी निदेशक भोगेन्द्र लाल काबिज हुए और फिर अपनी तिकड़मबाजी की बदौलत ज़नाब वर्त्तमान में भी इसी पद पर पूरी आनबान और सियासी गुमान के साथ  कुर्सी से चिपके हुए है। न केवल काबिज है बल्कि ये कहना सही रहेगा कि बियाडा का पूरा प्रशासनिक अमला इनकी मजबूत गिरफ़्त में है। साथ ही पूरा अर्थतन्त्र इन्ही के बहुपाश के जबर कब्जे में है। हालात ये है कि अब तो बियाडा के प्रबंध निदेशक जो अमूमन आईएएस बनाये जाते है, तक को अपनी मर्जी से नियुक्त कराना भी इनके लिए बाए हाथ का खेल बन चुका है।

भोगेन्द्र लाल बियाडा में अनुबंधित होने से पहले सूबे के बेहद विवादास्पद और चर्चित अशोक पेपर मिल के मैनेजर थे। खैर, बतौर मैनेजर वहां के कारनामो और करतूतों को भी अगली क़िस्त में आप से साझा करेंगे।                                                   साथ ही उस सच से भी आपको रूबरू करायेगे की कैसे 3 जून 2011 को अररिया जिले के फारबिसगंज पुलिस गोली कांड के पीछे के सच और जांच रिपोर्ट को विधानसभा के फ्लोर पर रखने के बाद भी सब कुछ बेहद रहस्यमय ढंग से शाति के आग़ोश में समाया हुआ है।

लेकिन पटना Live की मुहिम नकाब के पीछे के सच को बेनकाब कर बताएंगे हर वो सच – कैसे दोषी कुर्सी पर  विराजमान है?

खैर, बात बियाडा में आईटी अफसर की अवैध नियुक्ति प्रकरण की करते है।

आईएएस श्रीमती अंशुलि आर्या ने लगातार 5 बार बियाडा की कमान बतौर प्रबन्ध निदेशक संभाली है। इसी दौरान सूबे की सुशासन सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए वेब कम्युनिकेशन की महत्ता को समझते हुए अनुबंधन पर सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की। यहा भी बियाडा पर काबिज हो चूके कार्यकारी निदेशक ने अपने खासमखास व्यक्ति को बियाडा मुख्यालय में अनुबंध पर रखवाने की कुटिल चाल चली पर तात्कालिक प्रबंध निदेशक अंशुलि आर्या ने टैलेंट को तरजीह व महत्व दिया और बतौर आईटी ऑफिसर राजेश कुमार को अनुबंध पर बहाल कर लिया गया। चुकी अनुबंधित व्यक्ति अपने कार्य मे बेहद दक्ष और सक्षम रहा है। उसने लागतार बियाडा की तमाम जानकारिया और औद्योगिक क्षेत्रों में प्राधिकरण के प्लॉट्स का लेखा-जोखा बियाडा की वेबसाइट बनाकर न केवल अपलोड कर दिया बल्कि तमाम जानकारियां जो औद्योगिक विकास खातिर जरूरी थी ऑनलाइन कर दिया, ताकि सूबे में औद्योगिक इकाई या कल कारखाना या फैक्ट्री लगाने के उत्सुक कारोबारी महज एक क्लिक से तमाम जानकारियां प्राप्त कर सके। अनुबंध पर नियुक्त राजेश कुमार द्वारा नो नॉनसेंस और ज़ीरो टॉलरेन्स की नीति के तहत पूर्ण ईमानदारी से अपने काम को अंजाम देना जारी रखा जाता रहा तो बियाडा की लुट मण्डली को यह नागवार गुजरने लगा। वही दूसरी तरफ आईटी अफसर ने बेहद ईमानदारी पूर्वक अपने दायीत्व का निर्वहन जारी रखा।साथ ही किसी भी प्रकार से न तो गड़बड़ झाले में सहयोग किया और न ही अपने जानते भर में अर्थवसुली के कुटिल साज़िशों को परवान चढ़ने दिया। अब तक तिकड़म बाज मंडली जो बियाडा को दुधारू गाय बनाकर कर अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रही थी,आईटी अफसर शातिर मण्डली को चुभने लगा यानि लूट में रुकावट बन कर खडा होने लगा। चुकी अवैध मोटी कमाई पर असर पड़ने लगा तब साज़िशन अनुबंधित आईटी ऑफिसर को जबरिया तमाम गलत आरोपो के तहत बियाडा से चलता करने की कुटिल चाल चली जाने लगी। उल्लेखनीय है कि अपने नियोजन के दौरान निदेशक श्रीमती अंशुलि आर्या द्वारा कई बार मुक्त कंठ से तारीफ किये जाने के बाद भी साज़िशन राजेश कुमार को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हद तो ये की राजेश कुमार सिंह केे जेआईटी अफसर रहते हुए ही दिसंबर 2015 में उनके पद की विज्ञप्ति निकाल दी गई और जून 2016 में उन्हें हटा कर संजीत कुमार को तमाम अन्य प्रतिभावान और बेहद योग्य उम्मीदवारों को साजिशन नकारते हुए अपने शागिर्द को फर्जी डिग्री के आधार पर बियाडा मुख्यालय में बहाल कर लिया गया।

आईटी अफसर के लिए विज्ञापन निकाला गया
जिसका प्रारूप इस प्रकार रखा गया। लेकिन –

चुकी बियाडा पर काबिज कार्यकारी निदेशक महोदय ने अबतक अपनी तिकडमी चालो से अपनी पहुच और आर्थिक हनक से सत्ता के सशक्त अन्तःपुरम तक अपनी मजबूत पैठ बना ली थी। अपनी मनमर्जी से अपने हिसाब से बियाडा को हांकने लगा था। अबतक  यह पहुच,पैरवी और पैसे का खेल इतना बड़ा हो चुका था कि वर्ष 2013 की CAG की आपत्तियां जिसमे बियाडा के भ्रष्टाचार और लूटखसोट की इस संवैधानिक संस्था ने कलई खोली है को भी बियाडा के इस घाघ सरदार ने अपनी पहुच के बल पर दफन कर रखा है। (कैग की रिपोर्ट के सच का भी होगा खुलासा)

खैर,अबतक के अपने शातिराना खेल से करोड़ो करोड़ समेट कर अपने आकाओं तक को भी उनका कट उनतक बेहिचक पूरी ईमानदारी से लगातार पहुचाया जाता रहा। चुकी समय के साथ लूटतंत्र के बियाडा सिंडिकेट को जरूरत महसूस हुआ कि अपने कालेकर्मो को छुपाए रखने की। इसके के लिए जरूरी था कि बियाडा से चुन चुन कर अपने विरोधी या ईमानदार कर्मियों को येन केन प्रकारेण हटाया जाए और विश्वत शागिर्दों को पैसा या पैरवी के बल पर प्राधिक़ार में नियुक्त किया जाय। ताकि खेल आगे भी बिना किसी रुकावट के चलता रहे और पूर्व के लूट खसोट को दफन रखा जा सके। इसकी शुरुआत हुई आईटी अफसर के तौर पर अपने शागिर्द संजीत कुमार को फर्जी डिग्री के आधार पर आईटी ऑफिसर के तौर पर बहाल करने से। आईटी ऑफिसर की बहाली में स्क्रुइटिनी कमेटी को भी अपनी सियासी पहुच और सत्ता केंद्र के करीब होने की हनक से प्रभावित कर अपने चेले को बहाल करा लिया गया।

देखिए कम्पेरेटिव शीट

संजीत कुमार के नाम के सामने उनके बियाडा में पूर्व से हीं वर्ष 2007 से अन्य पद पर कार्य करने का अनुभव अंकित किया गया है। तब 2010 में उन्होंने बीटेक कैसे कर लिया ? यह बड़ा सवाल हैं। जबकि वो इस 4 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए उस अवधि में कभी अनुपस्थित अथवा सेवा से असम्बद्ध नहीं रहे ?

ये तो महज एक शुरुआत है। बियाडा को सुशासन की दुधारू गाय हमने सभी तथ्यों और तमाम दस्तावेजो के बेहद बारिकी से अध्ययन के बाद नाम दिया है।कल यानी गुरुवार की रात पटना Live CAG की रिपोर्ट के माध्यम से बियाडा में जारी महालूट और कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति में हुुुए खेल के सच को उज़ागर करेेेगा मय सुबूत।

(दूसरी क़िस्त – CAG रिपोर्ट के साथ पटना Live  सभी डॉक्युमेंट्स को गुरुवार रात 9 बजे सर्वजनिक करेगा)

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