Super Exclusive – गुंजन खेमका की हत्या का सच – फोरलेन पर 14 बीघे ज़मीन का विवाद बना मौत का कारण,स्थानीय दबंगो के मार्फत सुलझा रहे थे विवाद,पुलिस से नही करते थे सहयोग

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#गुंजन खेमका पर नही उनके छोटे भाई डॉ गौरव खेमका पर हुई थी फायरिंग, यह घटना रात के समय
Dr उत्पल कांत के क्लिनिक के पास हुई थी।
#पिछले 9 महीने से जारी था उक्त ज़मीन को लेकर गतिरोध
# राजधानी समेत अन्य जिलों में ज़मीन कारोबार से गहरे जुड़े थे गुंजन खेमका

पटना Live डेस्क। बिहार के चर्चित बिज़नेसमैन गोपाल खेमका के बड़े बेटे गुंजन खेमका की हत्या से कोहराम मच गया है। दवा और ज़मीन कारोबारी गुंजन खेमका की हत्या की खबर फैलते ही पटना के व्यापार जगत में शोक की लहर फैल गई। हत्या की खबर मिलते ही बिहार के सबसे बड़ी दवा मण्डी गोविंद मित्रा रोड की दुकाने पूरी तरह से बंद हो गई। बड़े से लेकर छोटे कारोबारी तक खेमका परिवार से मिलने उनके घर पहुंचने लगे। घटना को लेकर तरह तरह की बातें भी खुलकर सामने आ रही है। लेकिन हत्या के कारणों का सच तलाशने के दौरान यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि 1997 बैच के सेंट माइकल के पास आउट गुंजन ने पिता के व्यवसाय को संभालने के बाद अपनी पहचान एक बड़े ज़मीन कारोबारी के तौर पर बना ली थी।बात अगर राजधानी पटना की करे तो बोरिंग रोड समेत अन्य इलाकों में खेमका द्वारा कई बेशकीमती ज़मीने खरीदी गई थी। गुंजन ने विगत एक साल में राजधानी समेत अन्य जिलों में ज़मीन कारोबार से गहरे जुड़े गए थे।

                  हत्या के बाद गुंजन खेमका के बाद परिजनों और उनके करीबी मित्रों ने दावा किया है कि खेमका को जान से मारने की धमकी पिछले 6 महीनों से मिल रही थी। इस बाबत उन्होंने पटना के गांधी मैदान थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन हकीकत ये है कि ज़मीन कारोबार से जुड़े गुंजन खेमका ने विगत दिनों सोनपुर छपरा फोरलेन पर 14 बीघे ज़मीन खरीदने की कवायद के तहत एक बड़ी राशि इन्वेस्ट की थी। लेकिन उक्त बेशकीमती जमीन पर पूर्व से स्थनीय ज़मीन माफिया की नज़र गड़ी थी। इसको लेकर गुंजन और उक्त माफिया के गुर्गों के बीच कई बार विवाद भी हुआ था। एक दूसरे को देख लेने तक का माहौल बन गया था। जिस धमकी की बात परिजन कह रहे है वो इसी विवाद का हिस्सा बताया जा रहा है।

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