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BiG News -बिहार STF के सुराग से रायपुर पुलिस ने प्रवीण सोमानी को फैजाबाद और सुलतानपुर जिले के बीच में एक झोपड़ी से किया बरामद

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पटना Live डेस्क। 8 जनवरी को रायपुर के सिलतरा इलाके से अपहृत हुए उद्योगपति प्रवीण सोमानी को 15 दिन बाद रायपुर पुलिस ने बिहार स्पेशल टास्क फोर्स के इनपुट पर अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ा लिया है। 40 से ज्यादा अपहरण को अंजाम दे चुके चंदन सोनार गिरोह के टॉप कारकून पप्पू चौधरी के दो प्रमुख साथियों को भी पुलिस ने पकडऩे में सफलता हासिल की है। उद्योगपति सोमानी को उत्तरप्रदेश के फैजाबाद और सुलतानपुर जिले के बीच में एक झोपड़ी से बरामद किया गया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के DGP  डीएम अवस्थी ने  बहुचर्चित मामले का रात 12 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में खुलासा करते हुए बताया कि सोमानी का अपहरण 8 जनवरी को सिलतरा और परसुलीडीह के बीच हो गया था। वे अपने ऑफिस से घर जाने के लिए शाम 6 बजे निकले थे। रात 9.30 बजे तक वे घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी।

पुलिस बुधवार को देर रात उत्तरप्रदेश से वाया दिल्ली हवाई जहाज से सोमानी और दोनों अपहरणकर्ताओं को लेकर रायपुर पहुंची। उद्योगपति को अपहर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए रायपुर पुलिस चंदन सोनार गिरोह की तलाश में बिहार के कई जिलों में कैंप किए हुए थी।

ईडी अधिकारी बनकर अपहरण किया था

डीजीपी अवस्थी ने बताया कि 8 जनवरी को प्रवीण सोमानी को उठाने पप्पू समेत 8 लोग ईडी अधिकारी बनकर रायपुर आये थे। सरडा एनर्जी से करीब 200 मीटर पहले सोमानी की कार को रोका और सोमानी को अपने कब्जे में कर लिया। इसके बाद सोमानी को लगातार बेहोशी के इंजेक्शन लगाते रहे।

अपहरणकर्ताओं ने अपनी कार में फर्जी नम्बर लगा रखा था। जांच में यह नंबर एक ट्रैवल एजेंसी का पाया गया। अपहरणकर्ता प्रवीण को सिमगा, चिल्फी होते हुए कटनी और फिर इलाहाबाद ले गए। उसके बाद यूपी के अंबेडकर नगर में ही एक घर में बंद कर दिया और गैंग का सरगना पुलिस को छकाने के लिए खुद बिहार के वैशाली पहुंच गया।

सूरत में बनाई थी अपहरण की योजना

डीजीपी अवस्थी ने बताया कि प्रवीण सोमानी के अपहरण की पूरी योजना सूरत जेल में बनाई गई थी। पप्पू चौधरी गिरोह के सदस्यों ने आपस मे टारगेट तय करने के लिए बाकायदे गूगल सर्च इंजन का सहारा लिया।

हाईटेक अपहरणकर्ताओं की गहरी साजिश

पुलिस का कहना था कि अपहरणकर्ता इस कदर शातिर थे कि उन्होंने किडनैपिंग की इस पूरी वारदात में हर एक्शन के बाद अपने सिम कार्ड को बदल दिया। यह पूरा गैंग अलग-अलग लेवल पर बंटा हुआ था। गाडिय़ों का बंदोबस्त करने की जिम्मेदारी, प्रवीण सोमानी को छुपाने की जिम्मेदारी और फिरौती के लिए फोन करने की जिम्मेदारी गैंग के अलग-अलग लोगो को दी गई थी। इन ग्रुप्स का आपस में कोई संपर्क नहीं था। यहां तक कि जब प्रवीण सोमानी को एसएसपी ने छुड़ा लिया उसके बाद भी लगातार फिरौती के लिए फोन आते रहे।

5लाख कॉल्स 2 हजार किमी के फुटेज खंगाले

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना था कि इस मामले में जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए हम लोगों ने तकरीबन 5 लाख मोबाइल कॉल्स और 2 हजार किलोमीटर का सीसीटीवी फुटेज खंगाला है। इस पूरे काम में ही 4 दिन लग गए छत्तीसगढ़ पुलिस ने यह भी बताया कि यह गैंग इतना ज्यादा हाईटेक था कि वह प्रवीण सोमानी के अपहरण के बाद किये गए हर एक्शन में अपने मोबाइल सिम कार्ड बदल दे रहे थे। पुलिस का कहना था कि न तो उनकी कॉल ट्रेस की जा पा रही थी न तो उनका लोकेशन मिल रहा था। छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना था कि इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा श्रेय साइबर सेल को जाता है।

प्रवीण के साथ नहीं हुई मारपीट

एसएसपी रायपुर का कहना था कि अपहरणकर्ताओं ने प्रवीण के साथ कोई मारपीट नहीं की है। लेकिन उन्हें मानसिक तौर पर जरूर प्रताडऩा दी गई है। उद्योगपति सोमानी के सकुशल वापस रायपुर एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उनके परिवार के लोगों ने उन्हें गोद में उठा लिया।

IG, SSP समेत 60 से अधिक लगे थे ऑपरेशन में

उद्योगपति सोमानी की तलाश में रायपुर एसएसपी आरिफ शेख सहित 60 से अधिक पुलिस ऑफिसर लगे थे। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस को बिहार के किडनैपरों की संलिप्तता का पता चला। इसके बाद पुलिस हाजीपुर, पटना, वैशाली और उससे लगे हुए इलाकों में लगातार सर्चिंग करते रहे। पुलिस को किडनैपिंग के लिए कुख्यात पप्पू चौधरी के बारे में पुख्ता सबूत मिला। टीम में एएसपी क्राइम पंकज चंद्रा, एएसपी ग्रामीण तारकेश्वर पटेल, सीएसपी अभिषेक माहेश्वरी, सीएसपी नसर सिद्दीकी, डीएसपी लोकेश देवांगन आदि शामिल रहे।

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