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Justice 4 Anurag Poddar-हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: कोर्ट की निगरानी में होगी CID जांच, SP से लेकर थानेदार तक के ट्रांसफर का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने दिया आदेश- मुंगेर में दुर्गा मूर्ति विसर्जन में पुलिस फायरिंग से मारे गए अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी जबकि 8 अन्य लोग गंभीर रूप से हो गए थे घायल,पिता को 10 लाख का मुआवजा

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पटना Live डेस्क।बिहार के मुंगेर में पिछले साल 26अक्टूबर की दरमियानी रात दुर्गा पूजा के प्रतिमा विसर्जन के दौरान मुंगेर पुलिस फायरिंग में अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी जबकि 8अन्य लोग गंभीर रूप से हो गए थे। उक्त मामले में CISF की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ था कि -26 अक्तूबर फ़ायरिग में तात्कालिक मुंगेर एसपी लिपि सिंह ने झूठ बोला था। दरअसल लिपि सिंह ने आरोप लगाया था कि भीड़ ने फायरिंग की थी जिससे अनुराग पोद्दार मारे गए थे लेकिन सीआईएसएफ की रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ था कि भीड़ ने नहीं पुलिस ने की थी फायरिंग।

मामले में पिता के बयान पर पुलिसवालों के खिलाफ कोतवाली में केस तो दर्ज किया गया था लेकिन वे जांच से संतुष्ट नहीं थे और पटना हाइकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। मृतक के पिता अनुराग पोद्दार की दायर याचिका पर न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद ने पुलिस फायरिंग की जांच में बिहार सरकार की लापरवाही से नाराज पटना ने बडा फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि इस केस की जांच CID करेगी औऱ उसकी मॉनिटरिंग हाईकोर्ट खुद करेगी। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है।साथ ही मुंगेर के मौजूदा एसपी, कोतवाली थानेदार के साथ साथ गोलीकांड से जुड़े तमाम पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर तत्काल करने का निर्देश दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने मुंगेर में दुर्गा पूजा के बाद विसर्जन जुलूस में गोलीकांड के मामले को यद्यपि सीबीआई को नहीं सौंपा लेकिन जांच को सख्त कर दिया l कोर्ट ने जैसा आदेश पारित किया है वैसे ही राज्य सरकार के वरीय पुलिस पदाधिकारी को चलना होगा l कोर्ट ने गोलीकांड में मृत युवक को 10 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह आदेश मृतक के पिता अनुराग पोद्दार की दायर याचिका पर न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद ने दिया हैlलेकिन इस मुकदमे की खास बात यह रही कि सुनवाई में शामिल होने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही l वे सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता से किसी भी प्रकार का फीस नहीं लेते थे l वे एयर टिकट और रहने की व्यवस्था भी स्वयं करते थे l सुप्रीम कोर्ट ने ही उन्हें सारे तथ्यों को पटना हाईकोर्ट में रखने को कहा था जिस पर हाईकोर्ट को फैसला भी सुनाना था।

ये था घटनाक्रम 

मूर्ति विसर्जन के दौरान हुए उपद्रव में अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी जबकि आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे l पिता के बयान पर पुलिस वालों के खिलाफ कोतवाली में केस तो दर्ज किया गया था, लेकिन वे जांच की कार्यवाई से संतुष्ट नहीं थे l कोतवाली थाने में मूर्ति विसर्जन के दौरान लाठी चलाने के आरोप में 20 से 25 पुलिसकर्मियों पर थानाध्यक्ष. के बयान पर मामला दर्ज किया गया था।

मूर्ति विसर्जन की घटना को लेकर एक बड़ा बवाल हुआ था। गुस्साए लोगों ने सराय थाने में आग लगा दी थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने मुंगेर के हालात को देखते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटाने की भी सिफारिश कर दी थी।

गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को देर रात मूर्ति विसर्जन के दौरान गोली चली थी जिसमें अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी। इसके साथ ही 8 अन्य लोग घायल भी हो गए थे। इसके बाद 29 अक्टूबर को इस घटना के विरोध में फिर बवाल हो गया।

उच्च न्यायालय के आदेश इस प्रकार है

■पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी (CID) और एसआईटी (SIT) ही करेगी लेकिन हाईकोर्ट करेगा मॉनिटर

■सीआईडी को 1 महीने के भीतर रिपोर्ट पेश कर बताना होगा जांच की अद्यतन स्थिति

■3 दिनों के अंदर उन सभी पुलिस को हटाना होगा जो पिछले साल से आज तक बने हुए हैं

■मुंगेर के एसपी और 8 पुलिस अधिकारी जो पहले एसआईटी में थे उन्हें भी मुंगेर से हटाना होगा

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