बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

हे भगवान!अगर ये सुशासन है..एक माँ को कलेजे के टुकड़े की लाश खातिर सड़क पर करना पड़ा संग्राम फिर भी …

पटना पुलिस में कॉर्डिनेशन का हाल देखिए ,11 मार्च को हुआ एक्सीडेंट,15 मार्च को पुलिस ने लावारिश मान कर दिया दाह संस्कार जबकि बगल के थाने में उक्त बच्चे की गुमशुदगी का मामला दर्ज था।

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पटना Live डेस्क।बिहार में सुशासन है। यह दावा सूबे के मुखिया यानी नीतीश कुमार करते नही अघाते है। लेकिन हकीकत ये है कि उनके नाक के नीचे एक माँ को अपने गुमशुदा बच्चे की लाश खातिर सड़क पर संघर्ष करना पड़ रहा है। फिर भी उस दुखियारी मॉ को उसके कलेजे के टुकड़े का अंतिम समय मे मुँह देखना भी नसीब नही हो पाता है क्योंकि पटना में सड़क हादसे में मारे गए उस लड़के की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने उसका दाह संस्कार करवा दिया था। ये है आपकी सुशासन की पुलिस जो पीपुल्स फ्रेंडली होने का दम्भ करती है, पर पास के थाने में भी पता नही करती है और परिजनों को उनके बेटे के शव से भी मरहूम कर देती है।

                दरअसल, पटनासिटी के चौक थाना से 8 वर्षीय राहुल नामक बच्चा शिवरात्रि के दिन से रहस्यमय ढंग से लापता हो गया। वही पीड़ित परिजनों ने बच्चे की काफी खोजबीन के बाद जब बच्चा नही मिला तो चौक थाना में मामला दर्ज कर दिया गया। वही 7 दिन बीतने के बाद भी पुलिस बच्चे को खोजने में नाकाम रहती है। इसी बीच अचानक चौक थाना पुलिस ने बुधवार की रात पीड़ित दम्पति को बताया कि उनके गुमशुदा बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई हैं। मासूम का शव जीरो माइल थाना में है। इसकी सूचना पर पीड़ित परिजन रोते बिलखते जीरो माइल थाना पहुँचे तो पता चला कि बच्चे के शव को तो प्रवाह कर दिया गया है।

दरअसल, कौआखोह निवासी 8 वर्षीय राहुल कुमार की 11 मार्च को बायपास पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पुलिस ने उसकी पहचान के लिए आसपास के इलाके के लोगों से मृतक की शिनाख्त करने का प्रयास किया,लेकिन असफल रही। घटना के चार दिन बाद 15 मार्च को मृतक का दाह संस्कार करवा दिया गया। यह बात राहुल के घर वालों को गुरुवार को पता चली तो वे हंगामा करने सड़क पर उतर आए। परिजनों का कहना रहा कि उन्हें राहुल की लाश चाहिए। उनका सवाल था कि पुलिस ने परिजनों से बिना पूछे ही उसका दाह संस्कार कैसे करवा दिया।

                      इधर, इस मामले में पुलिस का कहना है कि जिस वक्त युवक की मौत हुई थी,उस समय उसकी पहचान नहीं हुई थी। नियम के अनुसार 72 घंटे तक लाश को पहचान के लिए रखा गया था।इसके बाद भी जब पहचान नहीं हुई तो जीरो माइल ट्रैफिक थाना की पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार करवा दिया।

                     लेकिन सवाल उठता है क्या पटना पुलिस में कॉर्डिनेशन नाम की कोई चीज है? आप सोचिए जब पटना के चौक थाने में राहुल के गुमशुदगी की तहरीर दर्ज थी फिर भी कथित तौर पर ज़ीरो माइल थाना 72 घंटे में भी पता नही के पाई? क्या PCR और थानों के बीच कोई तालमेल नही है? दूसरे जिलों की बात छोड़िए राजधानी के थानों के बीच भी आपसी समन्यवय नही है?

एक मॉ को क्या जवाब दिजिएगा एसएसपी साहब उसके कलेजे के टुकड़े को आपकी पुलिस ने आखरी बार चेहरा भी नही देखने दिया आख़िर क्यो? जवाब देंगे या ….

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