BiG News (वीडियो) पटना के निजी स्कूल की मनमानी का चरम – स्कूल द्वारा 400 रुपये में बेचे जा रहे मोज़ा नही खरीदने पर छात्रों के उतरवाए मोजे और भेजा घर

पटना Live डेस्क। राजधानी पटना के निजी स्कूलों की दबंगई और मनमानी के किस्से अनगिनत है। अपने बच्चों को अच्छी तालीम दिलाने की चाहत में अमूमन स्टूडेंट्स के परिजन तमाम निजी स्कूलों के उलूल जुलूल शर्तों को सिर झुका कर मान लेते है। इसका फलाफल ये हुआ है कि दिन ब दिन निजी स्कूलों की मनमानी बढ़ती जा रही है। अब तो हद ये की निजी स्कूल माफिया इस कदर ताकतवर हो चुका है कि कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना करने से बाज नही आता है। बीतते समय के साथ निजी स्कूलो की मनमानियों के किस्से दबंगाइयों और गुंडई की शक्ल अख्तियार करने लगे है। अब तो बकायदा सुरक्षा के नाम पर बाउंसरों को सुरक्षा गार्ड्स के नाम पर तैनात कर स्कूल कैंपस को निजी जागीर में तब्दील किया जा रहा है। तभी तो ये सुरक्षा गार्ड्स रूपी गुंडे स्कूल कैंपस में परिजनों से गुंडागर्दी तक करने से बाज़ नही आते है।

                  पटना में फिर एक बार निजी स्कूल की दंबगई और मनमानी देखने को मिली है। शनिवार को राजधानी पटना के एक नामचीन प्राइवेट इंटरनेशनल स्कूल जो पाटलिपुत्रा अल्पना मार्केट के समीप स्थित है, ने मनमानी के चरम को पार कर दिया। ठंड के इस मौसम में स्कूल प्रबंधन ने जबरिया 65 गर्ल्स स्टूडेंट का मोज़ा (स्टॉकिंग्स) खुलवा कर उन्हें जबरिया स्कूल से बाहर निकालते हुए घर लौट जाने का फरमान सुना दिया। पीड़ित सभी छात्राएं 10वीं क्लास की हैं। जो वर्ष 2019 होने वाले सीबीएसई की 10वी की बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगी। इन छात्राओं का दोष महज इतना है कि स्कूल द्वारा पूर्व में बेचे गए मोजे ही पहनकर वो दो दिन के लिए परीक्षा देने पहुंची थी। जबकि स्कूल प्रबंधन उन्हें जबरन 400 रुपये कीमत का नया मोज़ा खरीदने के लिए बाध्य कर रहा हैं।                               राजधानी के इस नामचीन निजी इंटरनेशनल स्कूल की  हिटलरशाही और दबंगई के बबात छात्राओं और उनके परिजनों की माने तो स्कूल हर साल अपने स्कूल ड्रेस में मामूली बदलाव कर स्टूडेंट्स को उक्त ड्रेस पहनकर ही स्कूल आने को मजबूर करता है। इसी क्रम में दसवीं की छात्राओं को भी स्कूल प्रबंधन ने नए स्टॉकिंग्स खरीदने का तुगलकी फरमान जारी किया था। जबकि पीड़ित छात्राओं को  महज अब दो दिन के लिए ही स्कूल आकर परीक्षा देना है। बकौल पीड़ित स्टूडेंट्स के स्कूल के मेल स्टाफ के सामने एक कमरे में छात्रों का स्टॉकिंग्स (जो एक प्रकार का मोज़ा) जबरिया उतरवा लिए गए। फिर उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया गया। जब छात्राओं ने इसका विरोध किया तो उन्हें स्कूल की दूसरी बिल्डिंग में जाकर मैनेजमेंट से बात करने को कहा गया। इससे दुखी छात्रों ने इसकी जानकारी जब अपने परिजनों को दी तो वो भी स्कूल पहुचे। इस मनमानी के बबात जब परिजन स्कूल के अंदर जाकर इस बबात पूछताछ करने लगे तो उन्हने देखा कि तमाम जबरिया खुलवाए गये मोजे एक डस्टबिन में पड़े है।

 तब एक परिजन ने मोबाइल से डस्टबिन में पड़े मोजों का वीडियों बनाने लगे तो स्कूल स्टाफ उनसे उलझ गया और जबरिया कैमरा बन्द कराने लगे। लेकिन अब जब पूरी घटना का वीडियो  सामने आ गया है कि कैसे सर्दियों में स्कूल प्रबंधन ने जबरिया 400 रुपये के मोजे नही खरीदने पर गुंडागर्दी करते हुए छात्राओं को स्कूल के बाहर कर दिया है। यह स्कूल प्रबंधन के काले करतूतों का महज एक उदाहरण मात्र है। उल्लेखनीय है कि इस निजी स्कूल पर पूर्व में भी बेहद गम्भीर मनमानी के आरोप लग चुके है।                                                  वही,जब इस बबात पटना Live संवादाता ने स्कूल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश के तहत कई बार फ़ोन किया तो स्कूल द्वारा कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया गया। तब रिपोर्टर ने स्कूल पहुचकर मामले का सच जानना चाहा तो स्कूल स्टाफ का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार उनकी मनमानी पर मुहर लगाता प्रतीत हुआ। उल्लेखनीय है कि इस स्कूल के प्रबन्धन कि न तो ये पहली मनमानी है न ही आखरी है।पूर्व में भी डिसिप्लि के नाम पर मनमानी और छात्रों को प्रताड़ित की खबरें सामने आती रहीं है। वही, बकौल एक परिजन के स्कूल प्रबंधन लगातार अपने ऊँचे सियासी संपर्कों के बदौलत अबतक तमाम मामले को दबाता रहा है। अब देखना की इस बार शिक्षा विभाग इंटरनेशनल स्कूल की मनमानी पर क्या कार्रवाई करता है या फिर पूर्व की तरह की मामले को रफा दफा कर स्कूल को उसकी कारगुजारियां को जारी रखने में मदद बना रहता है?