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FACT FINDING-महमदपुर में खून की होली का असली सच- क्यो रो रहे हो जो बोया वही तो रहे हो काट

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पटना Live डेस्क। अध्यात्म तथा लोकाचार में भी यह बात कही गई हैं कि “जैसा बीज बोवोगे, वैसा ही फल काटोगे।“ गोस्वामी तुलसी दास ने भी यही कहा है “जो जस करहिं तो तस फल चाखा।“यही नियति और काल चक्र का प्रारब्ध भी।

29 मार्च 2021 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना अंतर्गत पड़ने वाले महमदपुर गांव में होली के दिन रंगों की जगह “खून की होली” खेलकर सूबे की कथित सुशासन सरकार की चूले हिला कर रख दी गई। एक ही परिवार के 5 लोगो जिनमे पूर्व बीएसफ जवान सुरेंद्र सिंह के 3 बेटे रणविजय सिंह,वीरेंद्र सिंह,अमरेंद्र सिंह तथा वही दिवंगत भाई तेज नारायण सिंह के बेटे और बीएसएफ के एसआई राणा प्रताप सिंह, होली खातिर छुट्टी में घर आए हुए थे और पड़ोसी रुद्र नारायण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस नरंसहार को अपराधियों के समूह ने कुल 6 लोगो को अपना निशाना बनाया था। 5 की मौत हो चुकी है। वही,सुरेंद्र सिंह के भाई राम नारायण सिंह जो सेना से रिटायर्ड के गंभीर रूप से जख्मी बेटे मनोज सिंह पटना के एक बड़े निजी अस्पताल के ICU में अब भी जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। इस विभत्स काण्ड को अंजाम देने का आरोप लगा खुद को रावण कहने वाले प्रवीण झा “त्योथ” उर्फ रावण पर और उसकी रावण सेना पर।

महमदपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया गया। 11 बच्चों के सिर से पिता का साया छीन गया है। 5 महिलाओं की मांग उजड़ गई है। ये पूरा वाकया दिनदहाड़े हुआ। सुरेंद्र सिंह के भाई राम नारायण सिंह जो सेना से रिटायर्ड हैं। उनके बेटे मनोज कुमार सिंह जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं। वो कहते हैं, “हमारे पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया गया। एक वर्दीधारी परिवार की ये दशा हो जाएगी, सपने में भी नहीं सोचा था। जानवरों की तरह हमारे बेटे और भतीजे को मौत के घाट उतार दिया गया।” राम नारायण सिंह आरोप लगाते हैं, “इसमें बेनीपट्टी विधायक विनोद नारायण झा और स्थानीय बेनीपट्टी थाना प्रभारी महेंद्र सिंह की मिलीभगत है। अपराधी प्रवीण झा को विधायक का संरक्षण प्राप्त है।”

35 नामजद 12 अज्ञात अबतक 18 गिरफ्तार

घटना के बाद 3 बेटे खोने वाले सुरेंद्र सिंह के रिटायर्ड फौजी भाई राम नारायण सिंह की तहरीर पर 35 नामजद और दर्जनभर अज्ञात के खिलाफ बेनीपट्टी थाने में FIR संख्या-69/21 दर्ज कर ली गई। एक परिवार के पांच लोगों की नृशसतापूर्वक पूर्व हत्या की खबर जैसे ही गाँव से जिला मुख्यालय होते हुए राजधानी के अंतः पुर तक पहुची सियासी कोहराम मच गया। दरअसल विपक्ष की सियासी जमात ने इसे जातीय संघर्ष का स्वरूप देने की कवायद शुरू कर दी। सोशल मीडिया द्वारा इसे 2 जातियों के बीच के नैरेटिव का चश्मा पहनाया जाने लगा। लेकिन FIR में दर्ज 35 लोगो मे मक़तूल के स्वजातीय बड़ी तादाद में है। तो अन्य जातियों के भी लोग शामिल है। ख़ैर

 3 बेटों खोया चौथा जेल से रिहा

पूर्व फौजी सुरेंद्र सिंह का चौथा बेटा संजय सिंह वर्त्तमान में जेल से बेल पर है। दरअसल, मामला नवंबर 2020 का है। संजय पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए बेनीपट्टी थाना द्वारा जेल भेजा गया था। होली के दिन हुए नरसंहार में इनके तीन सहोदर भाइयों को कत्ल कर दिया गया।मचा हाहाकार तो जेल से बेल मिल गई और घर पहुचकर इन्होंने मधुबनी पुलिस पर आरोपो की बौछार कर दी सुनी लीजिए।

उस समय फसाद तालाब को लेकर हुआ था। जिस तलाब को लेकर विवाद हुआ वह काफी बड़ा है। दो गांवों को जोड़ता है। आधे-आधे हिस्से पर दावेदारी है। यह तलाब संजय सिंह के परिवार का नहीं है। बल्कि लीज और एक स्थानीय शातिर राजनीति शख्स की मेहरबानी का नतीजा है। दरअसल, संजय और उनके एक मक़तूल भाई की उक्त निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ चुके व्यक्ति से गहरी छनती रही है।

2 एकड़ का तालाब कही पर निगाहे कही निशाना

उल्लेखनीय है कि बेनीपट्टी थाना के महमदपुर गांव में जिस तालाब को लेकर कथित तौर पर हिंसक झड़प हुई वह दो गांवों के दो समुदायों के लोगों का बताया जा रहा है। गांव के लोगों के द्वारा बताया जा रहा है कि करीब दो एकड़ में फैला तालाब गांव वाला पोखर के नाम से जाना जाता है। त्योथ पंचायत के पौआम और गैबीपुर गांव के लोगों के आधे- आधे दो हिस्से में बंटा है।तालाब के आधे हिस्से पर पौआम गांव के यादव समाज और आधे पर गैबीपुर के ब्राह्मण समाज का स्वामित्व बताया जा रहा है।

यादव समाज के लोगों ने अपने हिस्से का भाग महमदपुर गांव के सुरेंद्र सिंह के पुत्र संजय सिंह के हाथों मछली पालन के लिये मछुआ सोसाइटी के माध्यम से बेच दी है। जबकि शेष बचे आधे भाग को भी ब्राह्मण समाज के लोग भी तीन वर्षों के लीज पर संजय सिंह के हाथों ही बेच रखे हैं।लीज की दो वर्ष की अवधि भी पूरी हो चुकी है। वही दूसरा पक्ष यानी आरोपित पक्षो के द्वारा जबरन मछली मारने को लेकर दोनों पक्षों के बीच आये दिन विवाद होता रहा है।वही,संजय सिंह और इनके भाइयों के भी दंबगई कर किस्से कम नही है। स्थानिए राजनीति में प्रधानपति के साथ इनकी जुगलबंदी काफ़ी चर्चित है।

Sanjay singh (file pic)
वर्ष 93 में एक बदले 3 की हत्या-आरोपी सुरेंद्र

मधुबनी के मोहम्मदपुर गांव निकुम्भ क्षत्रियों का गांव हैं, जिसमें क्षत्रियों ने ब्राह्मणो को जमीन देकर बसाया था।इस गांव में क्षत्रियों का एक मंदिर है जिस पर कथित तौर पर ब्राह्मण समाज के लोग कब्ज़ा करना चाहते हैं। इस गांव में साल 1993 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी तब अभी के हत्याकांड में जान गंवाने वाले महंत रूद्र नारायण दास के पिता की हत्या हुई थी।जिस महंत की हत्या हुई थी, वो होली की नरसंहार में मारे गये व्यक्तियों के परिवार से ही थे।दावा है कि इसके बदले में अभी के हत्याकांड में अपने तीन बेटों को खोने वाले तब BSF में कार्यरत रहे सुरेंद्र सिंह पर आरोप है कि गांव के एक ही परिवार के 3 लोगो की घर मे घुसकर बेहद क्रूरता से तीनो को ऑगन में मौत के घाट उतार दिया गया था। वो मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है।

इस आरोप पर हालांकि सुरेंद्र सिंह ने किसी भी पुरानी रंजिश से इंकार किया और दावा किया कि 28 साल पहले हुए हत्याकांड का अभी हुए निर्मम हत्याकांड से कोई कनेक्शन नहीं है।सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस और राजनेताओं की मिलीभगत से ये घटना हुई है। क्या सच मे ? ख़ैर बात निकली है तो फिर तलक जायेगी.. क्रमशः

लड़ाई वर्चस्व की नही सर्वस्व की है 

 

 

 

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