बेधड़क ...बेलाग....बेबाक

Fact Findings सीरीज|Amit Singh Murder Case|अपनो की गद्दारी व करीने से सजाई गई खूनी बिसात और इन्तकाम की आग ख़ातिर पीछे से खर्च हुए लाखों लाख,तीसरे प्रयास में हुआ अमित सिंह का अंत! जानिए पूरा सच

एक क़त्ल से हील गया नौबतपुर और बिहटा, फिर बने नए समीकरण, काण्डों से कमाई में हिस्सेदारी में धोखा फ़रेब व मुखबिरी का अंतहीन सिलसिला,इलाके के सबसे लम्बे समय से एक्टिव बाप-बेटा गिरोह की ढ़ीली होती पकड़, लड़ाई वर्चस्व की नही सर्वस्व ख़ातिर,दो गुटों में बट गए पटना पश्चिमी के तमाम आपराधिक गिरोह,सबके अपने अपने है स्वार्थ, इंतकाम की धधकती आग,सफ़ेदपोशों द्वारा बिछाई गई खूनी बिसात, टारगेट अमित सिंह का विकेट गिरवाकार कई निशाने एक साथ लिए गए साध

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पटना Live डेस्क। महाकाल सरगना सज़ायाफ़्ता अमित कुमार सिंह की 18 जून को ग्यारह बजकर चार मिनट पर देवघर कोर्ट के बाहर एक अधिवक्ता के चेंबर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पड़ोसी राज्य झारखंड के कोर्ट परिसरों में हत्या की यह कोई पहली वारदात नही है। पूर्व में हजारीबाग कोर्ट कैंपस में 2 जून 2015 को तब के बेहद चर्चित गैंगेस्टर सुशील श्रीवास्तव को पुलिस कस्टडी में मार गिराया गया था। इस घटना के महज डेढ़ साल से भी कम वक्त के अंदर 30 नवंबर 2016 को जमशेदपुर कोर्ट में बेहद दबंग व रसूखदार ट्रांसपोर्टर उपेंद्र सिंह को मौत के घाट उतार दिया गया था। दोनों बड़ी घटनाओं के बाद भी झारखंड पुलिस ने लगता है अब तक कोई सबक नहीं लिया नतीजतन 18 जून 2022 को देवघर सिविल कोर्ट में दिनदहाड़े पेशी के लिए बेउर जेल पटना से पुलिस अभिरक्षा में पहुचे कैदी अमित कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से कोहराम मच गया, देवघर पुलिस हक्की बक्की रह गई। राजधानी राँची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय ने इस कांड का स्वतः संज्ञान ले लिया हैं। इस घटना के बाद देवघर पुलिस समेत झारखण्ड पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ताकि कोर्ट परिसर में कुख्यात अमित सिंह हत्याकाण्ड का पर्दाफाश कर शूटर समेत गुनाह में शामिल सभी को धर दबोचा जाए। इसके लिए देवघर एसपी सुभाष चंद्र जाट ने दो जांच टीम का गठन किया है ताकि हो रही फ़ज़ीहत से जल्द निजात मिले।

बिहार पुलिस के सुरक्षा गार्ड ही बन गए काल

                    देवघर कोर्ट परिसर अमित सिंह की हत्या की तफ्तीश शुरू होते ही उसको पेशी पर लेकर पहुचे बिहार पुलिस के चार एक यानी एक पदाधिकारी और 4 सिपाही वाली टीम ही शक के दायरे में आ गई। दरअसल, पटना पुलिस ने बताया था कि वे 17 जून की रात ट्रेन से अमित को लेकर जसीडीह स्टेशन पहुंचे। पूरी रात स्टेशन पर ही बिताई और सुबह पेशी के लिए सीधे देवघर जिला कोर्ट में लेकर आए थे।

                  हालांकि, उनका झूठ पकड़ा गया। तफ्तीश में मालूम हुआ कि वे अमित को कार से देवघर लेकर आए थे। पुलिस ने तीन कार भी जब्त की है।

             दरअसल जाँच टीम को हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस वक्त हमलावर ने वकील के अस्थाई चेंबर में अमित पर गोलियां दागी, उस वक्त पटना से अमित सिंह की सुरक्षा में साथ आये पुलिसकर्मी भी साथ थे।लेकिन बेहद करीब से हुए हमले के बीच वो हमलावर को दबोचने या अमित सिंह की सुरक्षा करने के बजाए खुद को ही बचाते दिखे। हद तो ये कि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि युवक को जैसे ही गोलियां मारी गई बिहार पुलिस के जवानों ने उसे फौरन हथकड़ी पहना दी। इस बीच हमलावर ने अपने चेहरे को गमछे से छिपाकर मौके से फरार हो गया और बाइक स्टार्ट कर खड़े साथी संग शहर की भीड़ में खो गया।

देवघर पुलिस की दोनो जाँच टीमो ने अनुसंधना शुरू किया तो कड़िया जुड़ने लगी, साज़िश के इनपुट मिलने लगे। वही घटना स्थल से बरामद एक राउटर के तकनीकी विश्लेषण ने बिहार पुलिस के आरक्षी संख्या 4050 यानी मो.ताबिश खाँ की पोल पट्टी खोल डाली। फिर क्या था लंबी पूछताछ, कॉल रिकॉर्ड और वारदात वाले रोज की तमाम हरकतों को बारीकी से खंगालने के बाद देवघर पुलिस ने बेऊर जेल से कैदी अमित सिंह को साथ लेकर आए ASI राम अवतार राम और सिपाही मो. ताबिश खाँ के हत्याकांड में मुखबिरी करने और साजिश को अंजाम तक पहुचाने के पुख्ता सबूत इकट्ठा किए और फिर दोनो ख़ाकीवालों को बाकायदा गिरफ्तार कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है।

सोनू से राब्ते में था सिपाही ताबिश

पुलिस को घटनास्थल से हत्या में प्रयुक्त किए गए देशी पिस्टल के साथ दो खोखा,एक पैलेट व एक राउटर मिला था।मिले राउटर की तकनीकी जांच के दौरान यह भी साफ हो गया कि राउटर बेउर जेल में कैद बिहटा के कुख्यात के गिरोह के गुर्गों का है। बताया जा रहा है कि राउटर की जांच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि सिपाही ताबिश ने अमित की हत्या से ठीक पहले 18 तरीख की सुबह 7:45 बजे मोबाइल से पटना के सोनू कुमार से व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात की थी। मतलब सब कुछ पहले से तय था। घटना को बेहद बारीकी से प्लानिंग कर अंज़ाम दिलाया गया। वही जेल भेजे जाने से पहले देवघर एसपी ने सिपाही ताबिश से वो तमाम जानकारियां निकलवाई उससे स्पष्ट हुआ कि अमित की हत्या बिहार की राजधानी पटना स्थित बेउर केंद्रीय कारावास में हुई साज़िश का परिणाम है। बेहद शातिराना ढंग से जेल से पूरा खेल किया गया है। हत्या को अंजाम दिलाने वाला शख्स 17 जून की दोपहर तक देवघर में मौजूद था।

कौन है सोनू?

जेल भेजे गए सिपाही के राब्ते में रहे शख्स के बाबत ताबिश खाँ ने ही बताया कि युवक का नाम सोनू है। जो जून महिने के पहले सप्ताह में बेउर जेल से आर्म्स एक्ट के मामले में बेल पर बाहर निकला है। मूल रूप से बिहटा के मथुरा गाँव का निवासी है। सिपाही ने बताया कि सोनू के मार्फ़त वो अमित सिंह की सारी जानकारी किसी और तक भिजवा रहा था। दरअसल, ताबिश बेउर जेल में कैद पटना जिले के टॉप टेन अपराधियों में शुमार नौबतपुर के शंभुपुरा गांव निवासी माणिक सिंह को पहुचवा रहा था। मतलब साफ था अमित की हत्या में बेउर जेल के सेल में कैद माणिक सिंह की बडी अहम भूमिका है।

माणिक उर्फ आदित्य कुमार उर्फ बबुआ

13 अगस्त 2020 को पटना के टॉप टेन में शुमार अपराधी माणिक कुमार उर्फ आदित्य उर्फ बबुआ को एसटीएफ ने हजारीबाग में छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया। नौबतपुर के शंभुपुरा गांव का रहने वाला माणिक उर्फ बबुआ अपने कुख्यात अपराधी पिता मनोज सिंह के साथ बाप-बेटा गिरोह का संचालक है। 17 अगस्त 2020 से पटना के बेउर जेल में कैद है। इस दौरान एक बार भागलपुर के जुब्बा साहनी कारागार भी घूम आया है। तो वही पिता कुख्यात मनोज सिंह अगस्त 2017 में जेल से बेल पर निकलने के बाद से अब तक पटना पुलिस की नज़र में फरार है। इस दौरान मनोज सिंह लगातार अपने गुर्गों के जरिए अपराध कारित करवा रहा है। 

माँ शिक्षिका है बेटे को बिहटा के एयरफोर्स स्कूल और आरपीएस स्कूल में दाखिला दिलाया ताकि पढ़लिख सके लेकिन बबुआ ने आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी। कुख्यात माणिक के बारे में बताया जाता है कि महज 11 वर्ष की उम्र में अपराध की दुनिया में इसने कदम रखा था। अपराध की दुनिया का बेहद शातिर गिरोहबाज मनोज सिंह इस कदर आपराधिक प्रवृत्ति का है की इसने अपने इकलौते बेटे माणिक उर्फ आदित्य को भी शातिर अपराधी बना दिया। इसके लिए बेटे को खास ट्रेनिंग भी दी और कई हथियार चलाना भी सिखाया।बाप-बेटों ने मिलकर अपराध की कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है।

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                          बाप की सह का ही नतीज़ा रहा कि बिगड़ैल ने अपनी पहली ही वारदात में बबुआ ने फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के मौर्य बिहार कॉलोनी में मामूली सी बात पर पड़ोस में रहने वाले अरविंद सिंह की गोली मारकर हत्या कर उस वक्त सनसनी फैला दिया था। एक बार मुँह को खून लगा तो फिर मणिक भी अपने पिता मनोज सिंह के रास्ते पर चलने लगा। और अपराध की  दुनिया मे सक्रिय हो गया। नाबालिग माणिक ने बिहार झारखंड मे कई आपराधिक घटना को अंजाम दिया।

जमशेदपुर में ठेकेदार की सुपारी लेकर हत्या 

अपराध की दुनिया मे नाबालिक माणिक पर बिहार के बाहर जमशेदपुर में पहली हत्याकांड का आरोप चस्पा हुआ। भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र के बेलाउर गांव निवासी अंतरराज्यीय सुपारी किलर कुख्यात अपराधी रंजीत चौधरी के साथ मिल कर माणिक पर बिष्टुपुर जुबली पार्क में 01 (एक) अगस्त 2015 को बागबेड़ा कॉलोनी निवासी ठेकेदार रामसकल यादव की गोली मारकर हत्या करने का भी आरोप है। 

                        जमशेदपुर में राम सकल यादव हत्याकांड में मुख्य आरोपी उपेंद्र सिंह (हत्या हो चुकी है) की गिरफ्तारी के बाद अपराधी रवि शेखर, रंजीत चौधरी,अभिषेक,बबुआ उर्फ माणिक, रोहित कुमार समेत जमशेदपुर के पंकज, अविनाश, मुनमुन और नितेश तिवारी का नाम सामने आया था। इस कांड के बाद से माणिक ने पीछे मुड़कर नही देखा और अपराध की दुनिया मे पिता मनोज सिंह के इशारे पर कई काण्डों को बेधड़क अंजाम देता रहा। बाद में इसने अपना मॉडस ऑपरेंडी बदला और कम उम्र के लड़को को।अपने टीम मे शामिल कर आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलाने लगा और बिहार झारखंड में अपना नेटवर्क खड़ा कर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। लेकिन काननू की नज़र में आगया और आखिरकार पहली बार गिरफ्तार हो गया पिता के साथ। 

                  वर्ष 2015 में पहली बार तत्कालीन एसएसपी पटना मनु महाराज की टीम ने बिक्रम थाना क्षेत्र से कुख्यात मनोज सिंह व माणिक सिंह सहित गिरोह के कई लोगों को भारी मात्रा मे हथियारों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था।ढाई वर्ष बाद बाप बेटा मनोज सिंह व माणिक सिंह जेल से छूट कर बाहर आया उसके बाद बिहटा ,नौबतपुर सहित कई क्षेत्रों मे लगातार अपराध कर ख़ाकी को चुनौती देते गया। अपने पिता की मौत का बदले की लड़ाई को पेशा बना लिया। रंगदारी करना और क्राइम करना कराना दोनों का धंधा बन गया। कुख्यात मनोज सिंह व माणिक सिंह का बाप-बेटा गिरोह बिहार,झारखंड के अंडरवर्ल्ड की दुनिया मे विख्यात है।

कौन है माणिक का गुरु और बॉस ..बबुआ का डॉक्टर पिता … … बबुआ और निशांत में था कभी याराना …. फिर आखिर क्यों …हुए दुश्मन और फिर 18 जून …

सीरीज़ के पार्ट -2 में पढ़िए …. जुर्म का डॉक्टर उर्फ मनोज सिंह उर्फ मनोजवा …

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