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BiG News-पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को मिली “सशर्त पेरोल” कोर्ट ने परिवार को दिल्ली बुलाकर मिलने को कहा

पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने मांगी बीमार मां से मिलने के लिए जमानत, कोर्ट ने कहा मुलाकात के लिए दिल्ली बुला लो

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पटना Live डेस्क।पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही अपने परिवार से मिलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने हिरासती पेरोल को मंजूरी दे दी है। विदित हो कि पूर्व सांसद के वालिद का इसी वर्ष 19सितंबर को इंतकाल हो गया था।शहाबुद्दीन ने पिता की कब्र पर जाने, बीमार मां तथा परिवार के सदस्यों से मिलने के लिये परोल मांगी थी।वर्त्तमान में पूर्व सांसद हत्या के जुर्म में तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे है। पूर्व सांसद को राष्ट्रीय राजधानी में ही अपने परिवार से मिलने के लिये तीन दिन की सशर्त हिरासती परोल दी गयी है।

ये है पेरोल की शर्त
कोर्ट ने शहाबुद्दीन को सशर्त कस्टडी पैरोल दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 30 दिनों के अंदर कोई भी तीन दिन चुन लें। सुबह 6 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच वह परिजनों से मिल सकते हैं। कोर्ट ने उन्हें 6 घंटे का वक्त दिया है। लेकिन इसमें जेल से आने-जाने का समय भी शामिल रहेगा। इस दौरान शहाबुद्दीन से सिर्फ उनकी मां, पत्नी और रिश्तेदार ही मिल सकेंगे। किसी बाहरी व्यक्ति को मिलने की इजाजत नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सियासी तौर पर बेहद मजबूत नेताओं में शुमार मो.शहाबुद्दीन को 15 फरवरी 2017 सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की सीवान जेल से तिहाड़ लाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश पर 18 फरवरी 2017 को सीवान जेल (Siwan jail) से पटना के बेउर जेल लाया गया था। फिर ट्रेन के जरिए 19 फरवरी की सुबह तिहाड़ जेल लाया गया था। तब से पूर्व सांसद तिहाड़ में कैद है।

19 सितंबर को पिता का हुआ देहांत

शहाबुद्दीन ने अपने पिता के देहांत के बाद परिवार से मिलने सीवान जाने के लिये हिरासती पैरोल मांगी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (2 दिसम्बर) को आदेश पारित किया, जिसके अनुसार शहाबुद्दीन 30 दिन के अंदर अपनी पसंद के किसी भी तीन दिन में छह घंटे की “हिरासती परोल” ले सकता है। वह चाहे तो लगातार तीन दिनों तक छह-छह घंटे या फिर 30 दिनों के अंदर किसी भी तीन दिन में इतने घंटे की पेरोल ले सकता है।पूर्व सांसद को अदालत ने कहा है कि परोल की अवधि के दौरान वे सिर्फ अपनी मां, पत्नी और अन्य रक्त संबंधियों से मिलने की ही इजाजत होगी।

परिजनों से दिल्ली में ही होगी मुलाकात

दरअसल, दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन बिहार के सीवान स्थित अपने पैतृक गाँव प्रतापपुर जाकर परिवार से मिलना चाहते थे,लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें परिवार को दिल्ली बुलाकर ही मिलने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश तब दिया, जब मो.शहाबुद्दीन को सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर बिहार और दिल्ली सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाई।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील संजय लाव ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि बिहार में कैदी की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्हें बिहार ले जाना मुश्किल होगा, क्योंकि उनके साथ जाने के लिए पुलिस की एक पूरी बटालियन की जरूरत होगी और कोरोना महामारी के कारण ट्रेनें भी सामान्य रूप से नहीं चल रही हैं।

वही, बिहार सरकार की तरफ से पेश वकील केशव मोहन ने कहा कि शहाबुद्दीन को दिल्ली की तिहाड़ जेल नम्बर 2 में रखा गया है तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निश्चित तौर पर दिल्ली पुलिस की ही है।

वहीं याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि अदालत कैदी शहाबुद्दीन को पारिवारिक शोक जैसी स्थिति में ‘कस्टडी पैरोल’ देने पर विचार कर सकती है, मगर असल मुद्दा यह है कि बिहार और दिल्ली सरकार दोनों उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति में उनके परिवार को उनसे यहीं मुलाकात करनी होगी।

गौरतलब है कि हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शहाबुद्दीन ने सीवान जाने के लिए इस आधार पर ‘कस्टडी पैरोल’ (Custody Parole) मांगी थी कि उनके पिता का 19 सितंबर को निधन हो गया और वह अपनी मां के साथ कुछ समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां पिता की मौत के बाद से अस्वस्थ चल रही हैं।

शहाबुद्दीन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि बिहार सरकार एक हलफनामे में कहे कि वह उनकी देखरेख और रक्षा नहीं कर सकते हैं। इसके बाद वह अदालत द्वारा सुझाए गए विकल्पपर विचार करेंगे।शहाबुद्दीन को ‘हिस्ट्रीशीटर टाइप ए’ या सुधार से परे घोषित किया गया था।

11 साल की कैद के बाद मिली थी जमानत

विदित हो कि पूर्व सांसद शहाबुद्दीन 07 सितंबर 2016 को लगभग 11 साल बाद पटना हाईकोर्ट से राजीव रोशन हत्या मामले में जमानत मिली थी। राजीव सीवान के दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में प्रमुख गवाह थे। जमानत के बाद शहाबुद्दीन को भागलपुर सेंट्रल जेल से 10सितंबर को रिहा किया गया था।

नीतीश कुमार परिस्थियों के CM – शहाबुद्दीन

भागलपुर कारा से अपनी रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा था कि लालू यादव मेरे नेता हैं और नीतीश कुमार परिस्थितियो के CM हैं। शहाबुद्दीन के जमानत पर जेल से बाहर निकलने और बयानबाजियों के बाद सूबे में सियासी घमासान मच गया था। विपक्ष ने मुख्ममंत्री नीतीश कुमार पर महागठबंधन के सहयोगी लालू प्रसाद के दबाव में शहाबुद्दीन की जमानत में मदद करने का आरोप लगाया था। इसके बाद बिहार सरकार ने शहाबुद्दीन की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। बिहार सरकार ने याचिका में मांग की थी कि शहाबुद्दीन की जमानत पर रोक लगे और उनके के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो।

तदुपरान्त सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू (जिनके तीन बेटों की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन आरोपित हैं) की याचिका पर सुनवाई करते हुए 19 सितंबर 2016 को शहाबुद्दीन को नोटिस जारी किया था।  साथ ही शहाबुद्दीन को जमानत देने वाले हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चर्चित वकील प्रशांत भूषण ने  पीड़ित परिवारों की तरफ से एक याचिका लगाई थी।

महज 20 दिन की रही जमानत की मियाद

सभी पक्षो की जिरह और पक्ष जानने के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 30 सितंबर 2016 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को राजीव रोशन की हत्या के मामले में पटना उच्चन्यायालय से मिली जमानत  को रदद् करते हुए वापस जेल भेजने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की पीठ ने कहा था कि शहाबुद्दीन को तुरंत हिरासत में लिया जाए। इसके बाद शहाबुद्दीन ने 30 सितंबर 2016 को सीवान की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

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