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BiG Breaking – वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट से उप चुनाव लड़ेंगे Ex DGP गुप्तेश्वर पांडेय! 2019 चुनाव में JDU के पास गई थी यह सीट

Gupt eshwar Pandey latest News: पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि गुप्तेश्वर पांडेय ने इसी आश्वासन के तहत अपने पद से वीआरएस लिया है।

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पटना Live डेस्क। बिहार के डीजीपी के पद से अपना कार्यकाल खत्म होने से महज 5 महिने पहले इस्तीफा देकर गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने सियासी पारी पर मुहर लगा दी है। आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव के साथ बाल्मीकि नगर लोकसभा उपचुनाव को लेकर तमाम सियासी दलों की राजनीतिक कवायदे धीरे धीरे ही सही पर उरूज का रूख़ अख्तियार कर रही है। इसी बीच बिहार पुलिस के मुखिया गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर भी लगातार चर्चा हो रही थी कि जल्द ही इस्तीफा देकर अपनी सियासी पारिनक आगाज करेंगे चर्चाएं सच साबित हुई और मंगलवार की देर शाम आखिरकार बिहार सरकार ने भी अधिसूचना जारी कर दी और इस बात पर मुहर लगा दी कि DGP के पद से गुप्तेश्वर पांडेय के स्वैच्छिक सेवानिवृति हेतु आवेदन को स्वीकार कर तत्काल प्रभाव से 22 सितंबर की दोपहर से उन्हें वीआरएस प्रदान कर दिया गया है।

अब चुकी यह बाते यह बात स्पष्ट हो चुका है कि 1987 बैच के IPS गुप्तेश्वर पांडेय ने वीआरएस ले लिया है। ताकि जम्हूरियत के सबसे बड़े पर्व में शिरकत कर सकें। सनद रहे कि यह पहली बार नही जब पूर्व डीजीपी ने भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफ़ा दिया है। पूर्व में भी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार इस्तीफ़ा देकर सियासी महासमर में कूदने की कवायद की थी पर मनवांक्षित प्रयास सफल न होने पर पुनः पुलिस सेवा में लौट आये थे। ख़ैर,

सुशासन सरकार ने इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है। मतलब सियासी पारी का आग़ाज़ होना तय है। पर अब सवाल उठता है की गुतेश्वर पांडेय जिन्हें अमूमन लोग बाबा के उपनाम से भी सम्बोधित करते है आखिर अपने सियासी कैरियर के आगाज कहाँ से और किस दल के जरिए करेंगे? यह एक यक्ष्य प्रश्न है जो लगभग तय है। लगभग क्योकि राजनीति में कुछ भी स्थायी और सच तबतक नही माना जाता जबतक उसकी अधिकारी घोषणा न हो जाए। वही चुनावी टिकट तो घोषणा होने के बाद भी कट जाने का इतिहास बिहार की सियासत में रहा है।

लेकिन पटना Live आपके मन मे उमड़ घुमड़ रहे बाबा के बाबत इस सवाल का जवाब ढूढ़ लाया है कि “कहाँ से और किस दल से सियासी पारी का करेंगे आगाज?” तो ख़्वातीनो हज़रात गुतेश्वर पांडेय अपनी सियासी पारी का आगाज जदयू के टिकट पर तीर चलाते हुए वाल्मीकि नगर लोकसभा उपचुनाव से करेंगे।

वाल्मीकि नगर लोकसभा उपचुनाव

वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में आता है। ये इलाका नेपाल की सीमा से सटा हुआ है और बिहार के सुदूर उत्तर में पड़ता है। 2002 के परिसीमन के बाद साल 2008 में पहली बार ये लोकसभा सीट अस्तित्व में आया। इससे पहले ये सीट बगहा के नाम से जानी जाती थी।

वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट पर पिछले 20 सालों से NDA (एनडीए) का कब्जा है। 1999 से लेकर 2014 तक हुए लोकसभा चुनावों में 3 बार जदयू और एक बार भाजपा ने जीत का पहचम लहराया है। 1999, 2004 और 2009 में जीत जदयू के हाथ लगी जबकि 2014 में मोदी लहर के बीच इस सीट पर भाजपा का खाता खुला।

वही, पुनः एक बार 2019 में यहाँ से जदयू के टिकट पर वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट पर एनडीए प्रत्याशी वैद्यनाथ प्रसाद महतो ने जीत दर्ज की थी। लेकिन इसी वर्ष फरवरी में बीमारी की वजह से नई दिल्ली स्थित Aiims में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। तब से यह लोकसभा सीट उपचुनाव की बाट जोह रही है।

6 विधानसभा क्षेत्र 4 सीटों पर NDA का कब्जा

इस लोकसभा क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- वाल्मीकि नगर, रामनगर, नरकटियागंज, बगहा, लौरिया और सिकटा। 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में 3 सीट बीजेपी, एक-एक सीट जदयू और कांग्रेस ने जीती थी। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी।

ग्राउंड रिपोर्ट और जातीय समीकरण

वाल्मीकी नगर लोकसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 12 लाख 75 हजार 653 है। इनमें से पुरुष वोटरों की संख्या 6 लाख 90 हजार 155 जबकि महिला वोटरों की संख्या 5 लाख 85 हजार 498 है। नेपाल की सीमा से सटे होने के कारण और नक्सल प्रभाव के कारण ये इलाका सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है।

थारू और सवर्ण वोटरों का है दबदबा

बिहार में एक वाल्मीकिनगर एकमात्र लोकसभा सीट है, जहां हार-जीत में थारू जनजाति की बड़ी भूमिका होती है। इस क्षेत्र में थारू वोटरों की संख्‍या 1 लाख से अधिक बतायी जाती है। यादव वोटरों की संख्या डेढ़ लाख और मुसलमान वोटरों की संख्या सवा लाख होगी। सवर्णों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण हैं,जिनका वोट 80 हजार के आसपास है। ब्राह्मणों के बाद राजपूतों का वोट है।अतिपिछड़ा में बिंद,मल्लाह, नोनिया की भी अच्छी आबादी है।

कुशवाहा वोटरों की संख्या भी लगभग एक लाख है। मुस्लिम और यादव वोटर गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। पिछले चुनाव में सवर्णों के साथ ही अतिपिछड़ा भी NDA के पक्ष खड़े हो गये थे। नतीजा वैद्यनाथ महतो आराम से लोकसभा पहुच गए थे।

कील कांटे दुरुस्त और तीर

विगत 2 दिनों में जदयू के कद्दावर नेताओं और मुख्यमंत्री से मंत्रणा और उनके दूतों से कई दौर की बातचीत व मुलाकातों के बाद पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने पूर्व के अनुभव से जांच परख कर फ़ैसला किया और वीआरएस ख़ातिर आवेदन लिखा।

यानी सब कुछ तय है। जदयू के टिकट पर बाल्मीकी नगर लोकसभा चुनाव लड़ना तय है। जीत होने पर सेंट्रल की NDA गठबंधन की सरकार में मंत्री पद भी मिलेगा इसके लिए भी आश्वस्त किया गया हैं।

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