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BiG News-पटना के कंकड़बाग में हो रही थी रेमडेसिविर की कालाबाजारी, EOU ने तीन को दबोचा

एक ओर कोरोना वायरस की दूसरी लहर में इंसानी जिन्दगियों पर आपदा कहर बनकर टूट रहा है वही दूसरी तरफ आपदा को अवसर समझ कर कुछ लोग जीवन रक्षक अति आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी से भी नहीं रहे हैं चूक

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पटना Live डेस्क। कारोना के कहर के बीच जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमडेसिविर की कालाबाज़री की लगातार मिलती खबरों के बाद एक्शन में आई बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले गिरोहों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई प्रारम्भ कर दिया है। इसी क्रम में यूनिट को पटना के कंकड़बाग थाना क्षेत्र में रेमेडिसिवर और ऑक्सीजन की काला बाजारी की जानकारी अपने सूत्रों से मिल रही थी। दरअसल, कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक तरफ जीवन को बचाने की जिद्दोजहद है तो दूसरी ओर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों का गिरोह भी सक्रिय है।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है। ईओयू की टीम ने कंकड़बाग में इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के तीन लोगों को तीन पैक और दो खाली इंजेक्शन के साथ धर दबोचा है। तीनों की पहचान कंकड़बाग के चांदमारी रोड नंबर आठ निवासी अमित कुमार, अशोक नगर रोड नंबर एक सी निवासी नीतिश कुमार और कंकड़बाग के चांदमारी रोड नंबर आठ निवासी भास्कर पाठक के रूप में हुई है।

फार्मा कंपनी का अधिकारी भी धंधे में शामिल

पूछताछ में पता चला कि नीतिश कुमार एक फार्मा कंपनी का सेल्स अधिकारी है, जबकि भास्कर एक निजी न्यूज़ पोर्टल में एचआर का काम करता है। सूत्रों की मानें तो पकड़े गए लोगों ने शशि यादव नाम के एक युवक के बारे में बताया है। वह उनलोगों को इंजेक्शन मुहैया कराता था। वह इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसका संपर्क कंकड़बाग में ही संचालित एक अन्य निजी हॉस्पिटल से है।ईओयू को आशंका है कि मास्टरमांड शशि को उसी हॉस्पिटल से इंजेक्शन मिल रहा था। इसके बाद रात करीब नौ बजे ईओयू की टीम उस निजी अस्पताल में छापेमारी को पहुंच गई। साथ में डीएसपी, पुलिस दस्ता और औषधि विभाग की टीम भी थी। देर रात तक टीम अस्पताल के स्टाक की जांच में जुटी रही।

70 हजार रुपये में बेच रहे थे एक इंजेक्शन

ईओयू को सूचना मिली थी कि कंकड़बाग में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाला एक गिरोह बेहद सक्रिय है। टीम ने दो दिनों तक उस इलाके की रेकी की। उसे शनिवार की दोपहर एक दलाल का मोबाइल नंबर मिला। तदुपरान्त आर्थिक अपराध दस्ते ने उक्त नम्बर को सर्विजलेंस पर कुछ घण्टे रखा और बातचीत को सुना तो स्पष्ट हुआ कि वो सही दिशा में आगे बढ़ रहे है। उक्त नम्बर पर लगातार इंजेक्शन से जुड़ी बातचीत की जा रही थी। सर्विजलेंस के दौरान 4 नम्बर लगातार संपर्क में थे। चारो नम्बरो को इओयू ने वेरिफाई कर लिया है। मास्टरमाइंड की पहचान हो गई है।

कस्टमर बनकर बात की

शनिवार की दोपहर मिले दलाल के मोबाइल नंबर पर दस्ते ने ग्राहक बनकर इंजेक्शन दिलाने की मांग की। दलाल ने शाम चार बजे इंजेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही एक इंजेक्शन के बदले 70 हजार रुपये की डिमांड की गई। 50 हजार रुपये पर बात बनी। फिर दलाल से दो इंजेक्शन की मांग की गई। शाम के चार बजे दो बाइक पर सवार तीनों दलाल पहुंच गए। ईओयू की टीम ग्राहक बनकर तय ठिकाने पर खड़ी थी। पहले इंजेक्शन दिखाने की बात हुई। जैसे ही तीनों ने बाइक की डिक्की से दोनों इंजेक्शन निकालकर ईओयू को दिखाया, टीम ने तीनों को वहीं दबोच लिया। थोड़ी देर में कंकड़बाग थाने की पुलिस भी पहुंच गई। पूछताछ में यह भी बात सामने आ रही है कि मास्टरमाइंड एक निजी अस्पताल का मालिक भी है।

कंकड़बाग थाने में की जा रही पूछताछ

कंकड़बाग थाना में रखकर सभी से पूछताछ की जा रही है। कालाबाजारी के लिए इनके पास इंजेक्शन कहां से आया? इसके बारे में पता लगाया जा रहा है। EOU इनके पूरे कनेक्शन को खंगाल रही है। इंजेक्शन के अलावा इनके पास से बरामद दो बाइक, कई ATM कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जब्त की गई बाइक पर न्यूज पोर्टल NEWS 4 INDIA का स्टिकर भी लगा हुआ था।

दर्जन से अधिक लोगों को बेच चुके थे इंजेक्शन

पूछताछ में यह बातें भी सामने आई कि तीनों के अलावा चार और भी शख्स इस गिरोह में शामिल हैं। तीनों कंकड़बाग में कई अन्य निजी अस्पताल के संपर्क में थे, जहां कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती थे। वे जरूरतमंद से संपर्क करते थे और उन्हें 50 से 70 हजार रुपये में एक इंजेक्शन बेच देते थे। अब तक यह गिरोह दो दर्जन से अधिक लोगों को इंजेक्शन बेच चुका है।

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