Super Exclusive -“लूट की सुशासन साज़िश” पहले मरम्मत के नाम पर लाखों लाख डकारों, फिर उसे तुड़वाओ, फिर अन्यत्र बनाओ, जानिए कैसे लूटते है शातिर सरकारी अधिकारी आपकी मेहनत की कमाई …..

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#58 लाख खर्च कर डिस्पेंसरी की हुई मरम्मत,
#अब तोड़ने की क़वायद की तैयारी,नए स्थल पर हुआ भूमि पूजन

पटना Live डेस्क। बिहार में सुशासन की सरकार है। ये दावा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लेकिंन इस सुशासन की सरकार में सरकारी पैसे की बंदरबाट और लूट भी बेहद सुनियोजित और शांति से की जा रही है। ये हम नही कह रहे बल्कि वो सुबूत और साक्ष्य कह रहे है जो चीख चीख कर सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे लुटेरों की कहानी बयां कर रहे है। यानी लूट की छूट के बीच सरकारी फण्ड को डकारने की शातिराना  साजिश एक बार फिर सफल हो गई है और हद तो देखिए सरकारी राशि का बिना किसी शोर शराबे के पूरे इत्मिदान से बंदरबांट कर लिया गया। यानी उस मुहावरे को पुनः साबित कर दिया गया कि “बेईमानी के धंधे सबसे ज्यादा ईमानदारी” बरती है।

पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल डिस्पेंसरी तोड़कर पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के लिए पार्किंग बनाने की तैयारी जोरों पर है। सेंट्रल डिस्पेंसरी खातिर अन्यत्र भूमि पूजन हो गया है। यानी अब सेंट्रल डिस्पेंसरी की जगह PMCH खातिर 12 करोड़ की लागत से मल्टीलेबल पार्किंग का निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

                  वही, पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल डिस्पेंसरी को हटाने के विरोध में छात्र-छात्राओं द्वारा विरोध भी किया जा रहा है। इस निर्णय का विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि परिसर में बाकी चीजें रह सकती हैं तो डिस्पेंसरी क्यों नहीं रह सकती। पार्किंग बनने का विरोध कर रहे छात्र नेताओं ने कहा कि छात्रहित में विवि प्रशासन मांगों को नहीं मानती है तो आंदोलन किया जाएगा।

तोड़ना ही था तो लगभग 58 लाख लुटाये क्यो ?                        18 मार्च, 2018 को शिक्षा विभाग के बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बीएसईआइडीसी) ने सेंट्रल डिस्पेंसरी के विशेष मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 58,46,969 रुपये संवेदक को जारी कर दिए। मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य का 90 फीसद काम हो चुका है। 15 अगस्त तक संवेदक भवन का जीर्णोद्धार कर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप देगा। वहीं, 10 अप्रैल को शिक्षा विभाग के अपर सचिव ने सेंट्रल डिस्पेंसरी और उसकी भूमि को पीएमसीएच को हस्तांतरित करने के संबंध में अद्यतन स्थिति की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगी है। पत्र के आलोक में अभिषद् की बैठक में 30 जून को इस पर चर्चा हुई और कुलपति के आदेश पर छह सदस्यीय कमेटी का गठन 20 जुलाई को किया गया। कुलसचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार 10 अगस्त तक कमेटी कुलपति कार्यालय को रिपोर्ट सौंप देगी।

सेंट्रल डिस्पेंसरी में चिकित्सा के साथ ही योग भी 

सेंट्रल डिस्पेंसरी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. बीके मिश्रा ने बताया कि यहां शिक्षक, छात्र और कर्मियों की चिकित्सा के साथ-साथ योग की भी पढ़ाई होती है। योग में डिप्लोमा कोर्स कई वर्षो से संचालित है। यह विश्वविद्यालय की जमीन है और इसमें योग के विभिन्न कोर्स प्रारंभ करने की योजना है। डिस्पेंसरी के भवन का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने 1955 में किया था। व‌र्ल्ड यूनिवर्सिटी सर्विस के फंड से जी प्लस टू भवन का निर्माण किया गया था।

12 करोड़ खर्च कर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव

पीएमसीएच प्रशासन के अनुसार डिस्पेंसरी के बगल में संस्थान का 1010 वर्गमीटर भूखंड खाली है। डिस्पेंसरी की 1430.61 वर्ग मीटर भूखंड मिल जाने पर उसमें प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना फेज-4 के अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल भवन का निर्माण और मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कराया जाएगा। प्रस्तावित मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण कार्य में अनुमानित व्यय 12 करोड़ रुपये है।

चर्म एवं रति रोग विभाग से स्थानांतरण का प्रस्ताव

2014 में पीएमसीएच ने सेंट्रल डिस्पेंसरी को अपनी जमीन बताकर खाली करने के लिए पीयू प्रशासन को पत्र लिखा था। लेकिन, जांच में डिस्पेंसरी की जमीन पीयू की निकली। इसके बाद डिस्पेंसरी की जमीन का हस्तांतरण पटना कॉलेज परिसर स्थित चर्म एवं रति रोग विभाग से कराने का प्रस्ताव दिया। पीयू प्रशासन का मानना है कि जिस जमीन को हस्तांतरित करने की बात कही जा रही है वह पटना कॉलेज की जमीन है, जो पीएमसीएच को दी गई थी।

पूटा और पुसु स्थानांतरण का करेंगे विरोध

पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (पूटा) के अध्यक्ष प्रो. रणधीर कुमार सिंह और पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ (पुसु) के अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज का कहना है कि डिस्पेंसरी के हस्तांतरण का हर स्तर पर विरोध होगा। पीएमसीएच का विकास हो, लेकिन पीयू को नुकसान पहुंचाकर नहीं। शिक्षा विभाग ने एक ओर मरम्मत के लिए 58 लाख रुपये खर्च कर दिए, तो वहीं दूसरी ओर इसे तोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह सरकारी राशि का दुरुपयोग है।

डिस्पेंसरी के स्थानांतरण के लिए अभिषद् की बैठक में निर्णय के आधार पर छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।

– प्रो. एनके झा, डीएसडब्ल्यू, पटना विश्वविद्यालय

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