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BiG News-RSS के नए सर कार्यवाह चुने गए दत्तात्रेय होसबोले सांस्कृतिक संगठन को मिला राजनीतिक नेतृत्व

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पटना Live डेस्क। दुनिया की सबसे बड़ी स्वयं सेवकों की संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेंगलुरू में आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्तात्रेय होसबोले को संगठन का अगला सर कार्यवाह चुना गया है। इससे यह संभावना बलवती हो गई है कि संघ और सरकार के रिश्ते ज्यादा सहज और मजबूत होंगे। साथ ही अपेक्षाकृत युवा होसबोले को संघ में दूसरे नंबर का सबसे शक्तिशाली पद मिलने के कई मायने हैं।

PM मोदी को किया है दीक्षित व प्रशिक्षित

विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि के नाते दत्तात्रेय होसबोले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी बेहद करीबी माना जाता है। जबकि जोशी संघ में मोदी से वरिष्ठ थे और उन्होंने ही नरेंद्र मोदी को संघ में दीक्षित और प्रशिक्षित किया था। संघ के भीतरी सूत्रों के मुताबिक होसबोले आधुनिक सोच वाले व्यक्ति हैं और वह संघ की पुरानी लकीर से बंधे रहने वाले नहीं हैं। इस लिहाज से भी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों और कार्यशैली के करीब माने जाते हैं।

संघ के एक जानकार के मुताबिक हालांकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संघ और सरकार के रिश्तों में कोई ज्यादा बिगाड़ नहीं रहा, लेकिन फिर भी कुछ मुददों पर संघ को सरकार के कुछ फैसलों ने असहज किया। लेकिन सर संघचालक मोहन भागवत और सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ने सरकार को असहज करने वाला कोई कदम नहीं उठाया। अब दत्तात्रेय होसबोले के आने के बाद सरकार और संघ के संबंध और भी ज्यादा सहज और तालमेल वाले होंगे।

कौन है दत्तात्रेय होसबोले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भैयाजी जोशी की जगह दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी है। एक दिसम्बर 1955 को कर्नाटक के शिमोगा जिले के सोरबा तालुक के एक छोटे से गांव में हुआ।शुरुआती पढ़ाई लिखाई उनके गांव में ही हुई। कॉलेज की पढ़ाई के लिए वो बेंगुलुरु गये और नेशनल कॉलेज में एडमिशन लिए। उन्होंने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी लिटरेचर में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की हमेशा से उनकी रुचि साहित्यिक गतिविधियों में रही।

पांच भाषाओं यानि कन्नड़, तमिल, हिंदी,अंग्रेजी और संस्कृत में धाराप्रवाह बोलने वाले दत्तात्रेय होसबोले का जन्म कर्नाटक के लगभग सभी प्रसिद्ध लेखकों और पत्रकारों के साथ उनकी निकटता रही है।जिनमें वाई एन कृष्णमूर्ति और गोपाल कृष्ण जैसे नाम प्रमुख हैं। उन्होंने इस दरम्यान एक कन्नड़ मासिक का भी संचालन किया। इंदिरा गांधी सरकार में देश पर थोपे गए आपातकाल का इन्होंने तीखा विरोध किया। नतीजा, उन्हें मीसा एक्ट में डेढ़ साल से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा।

इन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को सबसे मजबूत छात्र संगठन बनाने में अहम भूमिका निभाई।अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम (यूके) में हिंदू स्वयंसेवकों को एकजुट करने के लिए बने हिंदू स्वयंसेवक संघ के मेंटर की भी इन्होंने बाखूबी भूमिका निभाई।दत्तात्रेय होसबोले अगले तीन साल तक आरएसएस संगठन संचालन में अतिमहत्वपूर्ण नंबर दो का पद रहेंगे। इसके पूर्व वह संघ के लखनऊ में सह- सरकार्यवाह (ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी) पद पर थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में लोग उनका पूरा नाम लेने की बजाए आदरपूर्वक ‘दत्ताजी’ कहकर सम्बोधित करते है। वर्ष 2009 में जब डॉ. मोहन भागवत संघ के सरसंघचालक बने तो दत्तात्रेय होसबोले को उन्हें अपनी टीम में सहसरकार्यवाह (ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी) बनाया। लगातार 12 साल जिम्मेदारी निभाने के बाद यानि आज 20 मार्च 2021 को उन्हें सरकार्यवाह (जनरल सेक्रेटरी) पद पर सर्वसम्मति से चुना गया। दत्तात्रेय होसबोले, सुरेश भैयाजी जोशी का स्थान लेंगे, जो वर्ष 2009 से लगातार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी देख रहे थे।

उम्मीद है कि इससे संगठन को न सिर्फ और अधिक विस्तार मिलेगा बल्कि इसकी रीति नीति और कामकाज में भी बदलते दौर के मुताबिक जरूरी बदलाव भी होंगे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि के दत्तात्रेय होसबोले के सर कार्यवाह बनने पर संघ के ही एक पुराने स्वयंसेवक की टिप्पणी भी की है। उन्होंने कहा ‘गैरराजनीतिक और सांस्कृतिक संगठन की कार्यकारी कमान अब एक राजनीतिक व्यक्ति के हाथों में आने जा रही है।’

           होसबोले सकारात्मक आधुनिक विचारों को अपनाने के पक्ष में हैं, इसलिए मुमकिन है कि संघ देश के तमाम हिस्सों और वर्गों में अपना और भी विस्तार कर सके और युवाओं को आकर्षित करने के लिए अपनी रीति नीति में भी कुछ बदलाव करे। मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले दत्तात्रेय होसबोले दक्षिण भारत में भी संघ के विस्तार को गति प्रदान कर सकते हैं, ऐसी उम्मीद भी संघ और भाजपा से जुड़े तमाम लोगों को है।

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