‘बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से निकले’अध्यक्ष पद से हटाए गए अशोक चौधरी का छलका दर्द,कहा-‘मेरी सम्मानपूर्वक विदाई हो सकती थी’

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पटना Live डेस्क.  बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से निकले…आखिर वही हुआ जिसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी आलाकमान से गुहार लगा रहे थे…कह रहे थे कि मुझे या तो बना कर रखो या फिर पद से हटा दो…अशोक चौधरी की यह पुकार शायद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुन ली…ना अशोक चौधरी से पूछा..ना बताया.. और अचानक उन्हें हटाने का ले लिया फैसला…प्रदेश की सारी कमेटियां भी भंग कर दीं… जिसने सुना वो भौंचक्का रह गया..कि आखिर यह सब इतना जल्दी कैसे हो गया…सोनिया गांधी राज्य में कांग्रेस के चल रहे सांगठनिक चुनाव को तो खत्म होने देती… पद से हटाए जाने के बाद अशोक चौधरी को भी रहा नहीं गया और आखिरकार दिल का दर्द छलककर बाहर आ ही गया..कहा मेरी सम्मानपूर्वक विदाई हो सकती थी…ऐसा भी नहीं है कि यह सब एकदम अचानक से हुआ…बिहार प्रदेश कांग्रेस की पटकथा पिछले दो महीने से लिखी जा रही थी..जब से राज्य में महागठबंधन की सरकार टूटी सबसे ज्यादा उथल पुथल कांग्रेस में ही देखने को मिली…सालों बाद सत्ता का स्वाद चख रहे कांग्रेसियों को सरकार का जाना रास नहीं आया…अचानक से पद चला गया..रुतबा चला गया..पूछ चली गयी..इसे ना तो अशोक चौधरी पचा पा रहे थे…और न ही पार्टी के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह…कहा जाने लगा कि किसी भी समय कांग्रेसी विधायकों में टूट हो सकती है…और टूटा हुआ धड़ा जेडीयू में मिल सकता है…अफवाहों का बाजार गर्म था…कोई कह रहा था कि टूट के लिए पर्याप्त तादाद नहीं होने के चलते विधायक चुप बैठे हैं…तो कोई कह रहा था कि अशोक चौधरी ने विधायकों से टूट के नाम पर हस्ताक्षर भी करा लिए हैं..और विधायकों की गिनती का इंतजार हो रहा है…प्रदेश राजनीति में पार्टी की टूट की खबरों के बीच शीर्ष नेतृत्व भी सजग हुआ और पहले दौर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह को दिल्ली तलब किया…दोनों को दिल्ली बुलाकर सोनिया ने समझाया भी और नसीहत भी दी…लेकिन दिल्ली से लौटने के बाद भी कांग्रेस में मामला ठंढा नहीं हुआ…विधायकों के बीच असंतोष की खबर रोजाना आने लगी…जेडीयू नेताओं के बयानों ने भी इस प्रकरण में आग में घी का काम किया..प्रदेश पार्टी में बढ़ रहे असंतोष के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सक्रिय हुए…और विधायकों को दिल्ली तलब किया…प्रदेश के 27 विधायकों में से 21 विधायकों को दिल्ली बुलाकर राहुल गांधी ने उनसे वन टू वन बात की और समस्या की असली वजह जानने की कोशिश की…कई विधायकों ने राहुल गांधी को यह सुझाव दिया कि वो राज्य में राजद का साथ छोड़ें और अपने बूते कांग्रेस को मजबूत करें….लेकिन राहुल गांधी लालू प्रसाद से सालों की दोस्ती तोड़ने को तैयार नहीं थे…सो उन्होंने विधायकों से दो टूक कह दिया की चाहे जो हो जाए वो लालू से अपनी दोस्ती नहीं तोड़ेंगे…..राहुल का यह कहना कई विधायकों को रास नहीं आया..और उन्होंने राहुल गांधी के फैसले के खिलाफ अपनी आवाज उठाई…दिल्ली बैठक के बाद वापस पटना लौटे भागलपुर से विधायक अजीत शर्मा और बक्सर से विधायक संजय तिवारी ने खुले तौर पर पार्टी को राजद का साथ छोड़ने की नसीहत दे डाली…और कहा कि इससे कम पर उन्हें कोई बात मंजूर नहीं…विधानपार्षद दिलीप चौधरी ने भी अशोक चौधरी के पक्ष में अपनी आवाज बुलंदी की..लेकिन खुद को पार्टी अध्यक्ष पद का दावेदार भी बता दिया…बहरहाल अशोक चौधरी अध्यक्ष पद से हटा दिए गए हैं…पार्टी में बढ़ रहे असंतोष की वजह भी उन्हें ही बताया जा रहा है…अशोक चौधरी की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बढ़ी नजदीकी जगजाहिर है…ऐसे में इस कहानी का असली क्लाइमैक्स देखने का लोगों का इंतजार है.. कयास यह भी लगाए जा रहे है कि अशोक चौधरी अपने समर्थक विधायकों को गोलबंद कर सकते हैं और कांग्रेस को राज्य में क्षति पहुंचा सकते हैं…

 

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