BiG Breaking – बिहार में NDA में हो गई बड़ी बगावत -भाजपा उपाध्यक्ष ने किया ऐलान “निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव”, 25 मार्च को भरेंगे पर्चा बजायेंगे नगाड़ा

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पटना Live डेस्क।  बिहार में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए टिकट बंटवारे से नाराज बीजेपी के भीतर की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। दरअसल, बिहार में भाजपा ने गठबंधन के तहत 17 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। वही अपनी जीती हुई 5 सीटों को जदयू के हवाले कर दिया है। इसी सियासी विवशता की वजह से अब भाजपा में विद्रोह का बिजुल लगातार मुखर होता जा रहा है। तमाम बयानबाजियों और बगावती सुरों के बीच बिहार भाजपा में अबतक का सबसे बड़ा विद्रोह हो गया है। दरअसल भाजपा उपाध्यक्ष सह बांका की पूर्व सांसद ने खुल्लम खुल्ला ऐलान कर दिया है कि वो बतौर निर्दलीय 25 मार्च को नामांकन का पर्चा भरेंगी। उल्लेखनीय है कि सीट शेयरिंग फार्मूले के तहत बांका जदयू कोटे में है। यानी गठबंधन को नकारते निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर पुतुल सिंह ने NDA के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बांका लोकसभा क्षेत्र को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग से लेकर टिकट आवंटन तक में चल रही कीच-कीच से आजीज आकर आखिरकार पूर्व सांसद पुतुल सिंह ने आज अपनी स्थिति साफ कर दी। उन्होंने गर्जना करते हुए कहा कि उनकी स्थिति साफ है। एनडीए बांका लोकसभा क्षेत्र को लेकर जो निर्णय ले, उन्होंने अपनी ओर से यहां नगाड़ा बजा देने का संकल्प ले लिया है।

बिहार प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद पुतुल सिंह बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी इस बात की तस्दीक खुद की है। उन्होंने कहा कि वह 25 मार्च को अपना नामांकन पेश करेंगी। दरसअल, पुतुल सिंह दो दिनों से पटना में मौजूद थीं। पटना में एनडीए की स्थिति को भांपते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में चुनाव लड़ने की मंशा के साथ वापसी का निर्णय लिया।
ज्ञात हो कि एनडीए के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बांका लोकसभा क्षेत्र की अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई। ‘इच बूथ- 10 यूथ’ से लेकर छोटे से बड़े हर पार्टी कार्यक्रम के जरिए क्षेत्र में एनडीए को एक सशक्त और सबल आकार देने और इस अभियान को मुकाम तक पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली पूर्व सांसद पुतुल सिंह अंततः इस बात को लेकर आश्वस्त हो चुकी हैं कि पहले तो यह सीट बीजेपी के हाथ से फिसली और फिर टिकट आवंटन को लेकर भी जदयू नेतृत्व स्पष्ट नहीं है।
 पूर्व सांसद पुतुल सिंह ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अब मन बना लिया है कि वह मूकदर्शक बनकर नहीं रहेंगी। एनडीए के रवैए पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो स्थिति है उसमें या तो दुखी होकर बैठने और इस स्थिति को पैदा करने के लिए जिम्मेदार तबके को बैठे रह कर कोसने अथवा मैदान में उतर कर संघर्ष करने का विकल्प है। उन्होंने संघर्ष का विकल्प चुना है। जनता उनके साथ है तो जीत भी उनकी होगी।
उन्होंने कहा कि जो होना था सो तो हो लिया, लेकिन अब जो होना है वह काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। पुतुल सिंह बांका लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। पिछले यानी 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव के साथ उनकी यहां कड़ी टक्कर हुई थी। इस मुकाबले में वह करीब 10 हजार मतों से पराजित हो गई थीं।

इसके बाद से लगातार उन्होंने क्षेत्र को समय देकर यहां बीजेपी के नए और व्यापक जनाधार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इसके लिए उन्होंने रात दिन एक कर दिया। उन्होंने बीजेपी के लिए बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी के नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा। प्रत्येक बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का संगठन खड़ा करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। बांका में बीजेपी के संगठन को उन्होंने एक नया आयाम देने की हर संभव कोशिश की।वर्ष 2014 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में बांका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाली बिहार प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष पुतुल सिंह को जदयू के साथ गठबंधन होने के बाद भी उम्मीद थी कि यह सीट बीजेपी के खाते में रहेगी और उन्हें यहां से प्रत्याशी घोषित किया जाएगा। लेकिन अब जबकि बांका लोकसभा क्षेत्र में द्वितीय चरण में होने वाले चुनाव को लेकर नामांकन का दौर शुरू हो चुका है, पहले तो यह सीट बीजेपी से खिसक कर जदयू के खाते में चली गयी और दूसरे यह कि यहां से अब तक प्रत्याशी के नाम की घोषणा पर चल रही किचकिच से क्षुब्ध होकर आखिरकार उन्होंने पटना से बांका वापसी का मन बनाया।उन्होंने स्पष्ट किया कि बांका लोकसभा क्षेत्र उनके पति पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह और खुद उनकी कर्म भूमि है। इस भूमि पर वह मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकतीं। क्षेत्र और क्षेत्र की जनता के हित में वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। बांका लोकसभा क्षेत्र में एक बार फिर से वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव का इतिहास दोहराया जाएगा।ज्ञात हो कि वर्ष 2009 में जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के साथ समता पार्टी के संस्थापक रहे पुतुल सिंह के पति स्वर्गीय दिग्विजय सिंह को नीतीश कुमार ने ही टिकट से वंचित कर दिया था। जिसके बाद नगाड़ा छाप चुनाव चिन्ह पर निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए उन्होंने क्षेत्र में मजबूत जीत दर्ज की थी। तब जदयू का प्रत्याशी बांका लोकसभा क्षेत्र से बिहार के तत्कालीन मंत्री दामोदर रावत को बनाया गया था जो तीसरे स्थान पर रहे थे।उन्होंने स्पष्ट किया कि बाँका वर्ष 2009 का इतिहास 2019 में दोहराएगा। 2009 में यहां की चुनावी राजनीति में दादा ने नगाड़ा बजा दिया था और इस बार उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए बाँका की जनता तथा दादा के सपनों को मुकाम पहुंचाने के संकल्प के साथ वह बाँका लोकसभा क्षेत्र की चुनावी राजनीति में क्षेत्र की जनता के आशीर्वाद और सहयोग से नगाड़ा बजा देंगी।

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