PM मोदी के वायदें “न खाऊंगा न खाने दूंगा” की बिहार में उड़ी धज़्ज़िया, BJP के MP करोड़ो के गबन में शामिल!

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coruption by janardan sigriwaal

पटना Live डेस्क। वज़ीर-ए-आज़म हिंदुस्तान मुल्क  में घूम-घूम कर खुद को देश का चौकीदार बताते हैं। बड़े फ़क्र से मुनादी भी करते है कि “न खाऊंगा और न खाने दूँगा” पर शायद उन्ही के पार्टी के नेता उनकी चौकीदारी की धज़्ज़िया उड़ाने से बाज़ नही आ रहे है। यानी पीएम के वायदों की हवा “घर के विभीषण” ही निकाल दे रहे है। इसी क्रम में एक मामले के मय सुबूत खुलासे ने भाजपा और प्रधानसेवक की चौकीदारी पर सवालिया निशान लगा दिया है।

भाजपा के आला नेताओं के साथ जनार्दन सिग्रीवाल
भाजपा के आला नेताओं के साथ जनार्दन सिग्रीवाल

दरअसल, जनता की खून पसीने की कमाई पर डाका डालने का कारनामा बिहार के महाराजगंज के भाजपा सांसद से जुड़ा हुआ है। महाराजगंज से भाजपा सांसद जनार्दन सिग्रीवाल पर जयप्रकाश यूनिवर्सिटी के कॉलेजो में सचिव रहते करोड़ो के गबन का मामला निकल कर सामने आया है। निगरानी विभाग ने 2016 में सांसद साहब पर नामजद FIR किया। प्राथमिकी संख्या – 102/16 में दर्ज FIR के बाद इस मामले में चार्जशीट भी दायर हो चूका है। सांसद साहब पर धारा 420/467/468/471/472/477(A)/409/120(B) एवं 13(1) (D) के तहत  कॉलेजों के नाम पर मिली करोड़ों की सरकारी अनुदान की राशि के गबन का जिक्र है।

आखिर क्या है पूरा मामला

साल 2016 में निगरानी विभाग द्वारा FIR दर्ज होने के बाद JPU में  घोटाले की बात सामने आयी। छपरा स्थित जयप्रकाश विश्वविद्यालय के 50 से ज्यादा वित्तरहित इंटर और डिग्री कॉलेजों की जांच  निगरानी की टीम ने की थी, जिसमें बड़े स्तर पर अनुदान की राशि वितरण करने में बड़े स्तर पर धांधली की बात निकालकर सामने आयी। निगरानी विभाग के मुताबिक तब इस मामले में निगरानी ब्यूरो ने 95 के आसपास लोगों को अभियुक्त बनाते हुए 10 एफआइआर दर्ज किया था।

इसके अलावा जांच के दौरान यह बात भी सामने आयी थी कि कई कॉलेजों में तो बिना निबंधन कराये ही छात्रों से ग्रेजुएशन की परीक्षा ली गयी है। अनुदान राशि वितरण में गड़बड़ी और बिना निबंधन कराये ही छात्रों से परीक्षा लेने की ये दोनों गड़बड़ी शैक्षणिक वर्ष 2005 से लेकर 2014 के बीच की है।

आपको बता दें कि इसके अलावा जिनके खिलाफ एफआइआर दर्ज हुआ था, उनमें तकरीबन सभी JPU के  कॉलेजों के प्राचार्य (कुछ के वर्तमान और कुछ के तत्कालीन), विभागाध्यक्ष समेत अन्य कर्मचारी और शिक्षक शामिल थे। इसी मामले में MLC केदार पांडेय पर भी आरोप लगे है।

खैर. लोकतंत्र है और जनता मूकबधिर हो कर इस गौरवशाली व पुरातन महान लोकतंत्र में हिस्सेदारी कर रही है। घोटाले तो सामने आते रहते है जनता की गाढ़ी कमाई लूटती रहती है फिर भी तमाम सियासी दल  भ्रष्टाचार  पर अपने दोहरे रवैये से बाज़ नहीं आ रहे हैं।

अपने इस खुलासे में हम न तो भाजपा सांसद को दोषी करार दे रहे न हमारा यह काम है। बस हमरा उद्देश्य सच को जनता के सामने लाना मात्र है। कौन गुनहगार या कौन साधु यह निर्णय लेना माननीय न्यायालय के विशेषाधिकार के तहत आता है। लेकिन यह तो स्पष्ट है कि अगर गबन की बात सामने आयी है और मामला दर्ज हुआ है तो कोई न कोई दोषी तो होगा ही ?

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