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बड़ी खबर -(वीडियो) गणतंत्रता दिवस पर बिहार हुआ शर्माशार, चिथड़े वाला तिरंगा, उलटा तिरंगा और DM की बड़ी भूल …

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पटना Live डेस्क। मुल्क जब गणतंत्र की 69वीं वर्षगांठ मना रहा है।तिरंगे की आन बान शाम पर अनगिनत शहिदों को याद कर गर्व की अनुभूति कर रहा है।वही बिहार में गणतंत्र को शर्माशार करने की घटना ने सूबे के माथे पर कलंक का टीका लगा दिया है। गणतंत्र दिवस समारोह के हर्षोल्लास के बीच जब ये तस्वीरें और वीडियो वायरल हुई एक बार फिर बिहार शर्माशार हो गया। हद तो ये की एक DM तो तिरंगे को सलामी देना ही भूल गए। वही बेशर्मी की हद देखिये जब हर भारतीय के आन बान शान का प्रतीक तिरंगे का अक्षम्य अपमान मानवीय भूल कहकर बत्तीसी दिखाकर काम चला लिया जाता है। शर्मनाक …
शेखपुर में DM साहब सलामी देना ही भूल गए सूबे में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन अब शायद सरकारी महकमो खातिर महज रस्म आदायगी भर बनता जा रहा है। इसका प्रमाण बिहार के शेखपुर में दिखाई दिया जब DM दिनेश कुमार झंडातोलन के वक्त तिरंगे को सलामी देना ही भूल गए। DM साहब की इस हरकत का वीडियो जब वायरल हुआ तो सफाई देने की बजाय मोबाइल उठाना ही बंद कर खामोशी अख्तियार कर लिया है। लेकिन एक आईएएस अफसर की इस लापरवाही ने जिले और सूबे को शर्मशार कर दिया।

जदयू कार्यालय, पटनासूबे के मुखिया नीतीश कुमार जिस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष उसी दल यानी जदयू मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के द्वारा उलटा तिरंगा फहराया गया। लेकिन ज्यो ही इस बेहद बड़ी भूल पर नज़रे उठी तत्काल भूल सुधार कर लिया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वीडियो वायरल हो चुका था।

देखे कैसे (वीडियो) जदयू मुख्यालय पटना में प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने फहराया उलटा तिरंगा
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बांका (बिहार)बिहार के बांका जिला अंतर्गत फुल्लीडुमर प्रखंड के बेतिया पंचायत भवन में तो गजब हो गया।तिरंगे की जगह मुखिया ने तिरंगे का चिथड़ा फहरा दिया। हद तो ये की इससे भी शर्मनाक तो यह रहा कि तेज हवा के बीच फटा हुआ यह तिरंगा भीतिया पंचायत भवन में यूं ही फहरता रहा और लोग देखते रहे। यह मामला जबरदस्त ढंग से वायरल होकर देभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

त्रासद – बिहार के बांका में शर्मसार हुआ गणतंत्र, मुखिया ने फहराया तिरंगे का चिथड़ा
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कहने वाले कह सकते है ये महज तीन घटनाये है  लेकिन ये त्रुटिपूर्ण लापरवाही भरी करतूतों ने तिरंगे की आन बान शान और अनगिनत शहिदों की कुर्बानी को अपमानित करता प्रतीत होता है। साथ ही अपने पीछे पुनः एक बार फिर वही सवाल खड़ा करता है। आखिर क्या सूबे के सरकारी या निजी उपक्रम या संस्थान के द्वारा झंडोतोलन के आयोजन के तय कार्यक्रम का होम वर्क नही किया जाता है? हर बार हर साल सूबे में कही न कही कोई-न-कोई उलटा तिरंगा फहराने के घटना इस बात को साबित करती है कि झंडातोलन भी महज एक रस्मी अदायगी भर होता जा रहा है। तभी तो हर भारतीय के आन बान शान का प्रतीक तिरंगा उलटा फहरा दिया जाता है और इसे मानवीय भूल कह कर बत्तीसी दिखाकर काम चला लिया जाता है। देखिये और सोचियेगा..सवाल बड़ा है।

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