BiG Story – डेढ़ वर्ष की अबोध बच्ची के लिए फरिश्ता बना बिहार पुलिस का सिपाही,रक्तदान कर दिया नया जीवन

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पटना Live डेस्क। अमूमन खाकी का नाम आते ही एक तस्वीर यादों के झरोखे में सामने तैरने लगती है जो यकीनन ‘निगेटिव’ होती है। लेकिन कहते है न बदलाव प्रकृति का शाश्वत नियम है। बीतते वक्त के साथ तस्वीरें भी बदलने लगी है। दरअसल,एक अबोध मासूम बच्ची जिसकी उम्र महज डेढ़ साल है, 2 दिनों से एक अस्पताल में इलाजरात थी।

दरअसल,मासूम का नाम प्रतिज्ञा हैं,जो शहर के चर्चित शिशु रोग विशेषज्ञ डा तनवीर फरीदी के यहां इलाजरात थी। पूर्व में बच्ची जिस डॉक्टर के यहाँ इलाजरात थी। उन्होंने मासूम की गम्भीर हालात को देखते हुए रेफर कर दिया। परिवार वाले शहर के चर्चित चाइल्ड स्पेशलिस्ट Dr तनवीर फरीदी के पास लेकर पहुचे। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया की मासूम के शरीर में बहुत कम खून है। खून की चार-पांच घंटे के अंदर व्यवस्था करनी होगी। अन्यथा इसे बिहार से बाहर ले जाए।

डॉक्टर के आदेश पर मासूम के पिता पंकज श्रीवास्तव जो शहर के सिविल लाइन के रहने वाले हैं फौरन दौड़े हुए तुरंत ब्लड बैंक गए। लेकिन चुकी बच्ची का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव (B Negetive) है जो रेयर ऑफ दी रेयरेस्ट की श्रेणी में आता है। ब्लड़ बैंक ने स्पष्ट ही कह दिया था। हमारे पास बी नेगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। अपनी बेटी ख़ातिर पिता ने तमाम जान पहचान और ब्लड बैकों से संपर्क किया। लेकिन सब जगह से निराशा हाथ लगी। वक्त तेजी से बीत रहा था। धड़कने तेज हो रही थी। घड़ी की टीक टीक हथौड़े के मानिद महसूस हो रही थी।

तभी किसी ने परेशान परिवार वालों को शहर के समाजसेवी रामजी सिंह से संपर्क करने की सलाह दी। उम्मीद के साथ मासूम के पिता ने समाजसेवी से संपर्क किया और मदद की गुहार लगाई। हालात की गम्भीरत के मद्देनजर रामजी सिंह की टीम इस अभियान में जुट गई। सभी लोग B(-ve) ब्लड ख़ातिर संपर्क के माध्यम से प्रयासरत हो गए। इसी बीच नगर थाने में तैनात टाइगर मोबाइल के जवान मनीष कुमार सिंह को यह बात पता चली।इस जानकारी पर मनीष खुद आगे आ गए और मासूम को रक्त देकर जीवनरक्षा ख़ातिर अस्पताल पहुच गए।

जब बक्सर पुलिस के जवान मनीष डॉ तनवीर अफरीदी के अस्पताल में पहुचे तो मासूम के पिता उन्हें एकटक निहारते रह गए। मनीष ने सहर्ष रक्तदान किया और बच्ची का उपचार शुरू हो गया। मासूम के परिजन ख़ातिर किसी फरिश्ते के तरह सहर्ष आगे आये मनीष प्रतिज्ञा को जीवन दे कर पुनः अपनी ड्यूटी पर वापस लौट गए और पूछे छोड़ गए एक संदेश हम अक्सर पुलिस के बारे में गलत सोचते हैं। लेकिन, मनीष ने जो किया। वह साबित करता है। पुलिस वाले नैतिक रुप से किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटते।

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