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BiG News-पटना के BiG Hospital का “महापाप” हुआ Exposed, पीड़ित ने साझा किया शोषण के शातिराना खेल का सच 

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  • BIG हॉस्पिटल बना बिग ब्लडर्स का अड्डा 
  • धरती के कथित भगवान का “गिद्ध” अवतार
  • मर्ज नही होता ठीक पर दरिद्र हो जाता है मरीज
  • निजी अस्पताल बन गए “शोषण” के अंधे कुए 

पटना Live डेस्क। डॉक्टरों के उजले गाउन पर लगते स्याह धब्बो की कारस्तानियों से अमूमन हम और आप कई बार दोचार हुए है। लेकिन वर्त्तमान दौर में “धरती के भगवान”कहे जाने वाले कब “गिद्धों” में तब्दील हो गए इसका ठीक ठाक अंदाज़ा तो कोई नही बता सकता है। लेकिन अब यह “उजले रंग के गिद्ध” जिंदा इंसान को नोच नोच कर इस हालात में पहुचाने लगे है कि “डॉक्टर” शब्द से आम आदमी पहले घबराता है अब खौफ़जदा होता जा रहा है। फिर अलबला जाता कभी खुद को कभी “अस्पताल की ऊंची” इमारत को।

सूबे के ‘फाइव स्टार’ कल्चर वाले बड़े निजी अस्पतालों  द्वारा मरीजों तथा उनके परिजनों के शोषण की खबरें तो बेहद आम है।अमुुुमन इन निजी आलीशान अस्पतालों के हालात ये है कि बीमार का मर्ज तो ठीक नही होता है पर वो और उसका परिवार दरिद्र जरूर हो जाता है। 

इस कड़ी में आज हम जिस अस्पताल के शातिराना खेल और शोषण के चक्रव्यूह से आपको रूबरू कराने जा रहे है। वो बिहार ही नही अपितु मुल्क के बड़े अस्पतालों में न केवल शुमार करता है बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी श्रृंखलाए है। वही, बिहार की राजधानी में इस अस्पताल से जुड़े हुए है सूबे के ही नही देश भर में बेहद चर्चित पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ विजय प्रकाश।

देश के ख्यातिनाम डॉक्टरों में शुमार डॉक्टर विजय प्रकाश की बेहतरीन चिकित्सीय सेवा-उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार समेत तमाम बड़े पुरस्कारों और अलंकरणों से नवाजा जा चुका है। विगत वर्षों पूर्व डॉ विजय ने शीतल माता मंदिर रोड में सम्प हाउस के नज़दीक BIG Hospital नामक एक अपना निजी अस्पताल शुरू किया था। लेकिन अब Apollo Hospitals के साथ अनुबंध में संचालित हो रहा है।

यह पंच सितारा फैसिलिटी वाला आलीशान अस्पताल वास्तव में मरीजों के लिए चक्रव्यूह के मानिंद है। इस संस्थान में मरीज के इलाज के नाम पर परिजनों से उगाही का शातिराना खेल खेला जाता है। इस का खुलासा करने वाला शख्स जो स्वयं भी पटना से प्रकाशित होने वाले एक बड़े बड़े दैनिक अखबार का पत्रकार है। उसने आपबीती का जो शाब्दिक खाका खिंचा है वो आपके होश फाख्ता कर देगा। भले ही पत्रकार उज्जवल कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से “नाम बड़े और करतब छोटे नही बल्कि घिनौने” वाले इस निजी अस्पताल के यानी Big Apollo Spectra Hospitals Patna से जुड़े अपने अनुभव को शेयर करते हुए अपनी विवशता की जो तस्वीर शब्दो के माध्यम से साझा किया है वो न केवल आपको भौचक्क कर देता है बल्कि खौफ़जदा कर देता है। आप सोचने पर विवश हो जाते है कि क्या ये “फाइव स्टार” विलासिता वाले अस्पताल अस्पताल न होकर “शोषण के अंधे कुए” है। लब्बोलुआब यह कि वर्तमान दौर में हालात बद से बदतर इस कदर हो चुुके है की धरती के कथित भगवान का “गिद्ध” अवतार  ले चुके है।

उज्ज्वल अपनी आपबीती में कहते हैं कि नाम के अनुरूप भवन तो जरूर बिग है, मगर अस्पताल में डॉक्टर तथा इलाज की बहुत कमी है। दरअसल उज्ज्वल उस अस्पताल में अपने चचेरे भाई को लेकर गए थे। जहां दो दिन रखने के बावजूद डॉ विजय प्रकाश जिनके नाम के बदौलत इस अस्पताल तक वे लोग पहुंचे थे, देखने तक नहीं आए। उज्ज्वल के भाई लीवर की समस्या से पीड़ित थे।

उज्ज्वल ने बताया कि एडमिट किए जाने के 5 घंटों तक कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने तक नहीं पहुंचा। यहां तक कि मरीज के परिजनों को भी सच्चाई से दूर रखा गया। 24 घंटे के बाद उनके मरीज के परिजन को डॉ विजय प्रकाश के द्वारा ही बताया गया कि मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। जो यहां संभव नहीं है, दिल्ली में हो जाएगा, मैं रेफर कर दूंगा।

अपने फेसबुक पोस्ट में उज्ज्वल ने बहुत कुछ बिग हॉस्पिटल के बारे में कहा है।उन्होंने कहा है कि अस्पताल के बड़े भवन को देखकर ना जाइए। जरूरी नहीं कि वहां पर अच्छे डॉक्टर भी सुलभ होंगे। उन्होंने बताया कि बड़े महंगे अस्पताल के संचालकों का मरीजों तथा उनके परिजनों के प्रति व्यवहार बेहद ही आपत्तिजनक होता है।

पटना के अधिकांश हस्पताल बस मरीज को भर्ती कर उसका दोहन करना जानते हैं। जब इलाज की बेहतर सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं है तो क्रिटिकल कंडीशन के मरीजों को किस आधार पर सिर्फ रेफर करने की सलाह देने के लिए एडमिट किया जाता है। साथ ही उस दौरान हजारों लाखों खर्च भी करवा दिए जाते हैं।

बहरहाल उज्ज्वल ने अपने पोस्ट में बताया उनके पास तो काफी पैरवी थी। तब भी उन्हें इतना कुछ झेलना पड़ा। सोचिए जिनके पास न पैरवी हो ना सिफारिश हो उनके साथ यह बड़े अस्पताल वाले क्या करते होंगे ? सवाल खुद में एक बड़े सच का पर्दाफ़ाश कर देता है कि निजी अस्पताल बन गए “शोषण” के अंधे कुए।

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